अमिताभ बच्चन ने डीपी वायर्स में किया बड़ा फेरबदल: 2.48 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, फिर निचले भाव पर की खरीदारी
दलालों के शोर और स्क्रीन पर बदलती लाल-हरी आकृतियों के बीच मुंबई और दिल्ली के दफ्तरों में अचानक हलचल तेज हो गई। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के बल्क डील आंकड़ों पर जैसे ही एक नाम चमका, हर किसी की नजरें स्क्रीन पर टिक गईं—नाम था बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन का। उन्होंने अपनी लंबे समय से पसंदीदा रही स्मॉल-कैप कंपनी डीपी वायर्स लिमिटेड में अपनी हिस्सेदारी को हल्का करने का फैसला किया था, लेकिन इसके तुरंत बाद उन्होंने उसी कंपनी के कुछ नए शेयर निचले भाव पर वापस भी खरीद लिए।

बाजार में ऐसे बदला महानायक के निवेश का गणित
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर बुधवार, 24 जून 2026 को सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, अमिताभ बच्चन ने एक बड़ी ब्लॉक डील के जरिए मध्य प्रदेश की इस कंपनी में अपनी आंशिक हिस्सेदारी बेच दी। उन्होंने खुले बाजार में करीब 1,23,622 इक्विटी शेयर बेचे, जो कंपनी की कुल हिस्सेदारी का 0.79 प्रतिशत के बराबर है। यह पूरा लेनदेन 200.84 रुपये प्रति शेयर की औसत कीमत पर हुआ, जिससे उन्हें कुल 2.48 करोड़ रुपये से अधिक की रकम हासिल हुई।
दिलचस्प बात यह रही कि अमिताभ बच्चन ने एक तरफ जहां मोटी रकम जुटाई, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने इसी कंपनी के 41,566 नए शेयर दोबारा खरीद लिए। यह नई खरीदारी उन्होंने 199.90 रुपये प्रति शेयर के औसत भाव पर की, जिसमें उनका कुल 83.09 लाख रुपये का निवेश हुआ। इस बिकवाली और खरीदारी के बाद वे बाजार में कुल 82,056 शेयरों के नेट सेलर रहे हैं, जिससे उनकी कुल होल्डिंग थोड़ी कम जरूर हुई है, लेकिन कंपनी में उनका निवेश अब भी बरकरार है।
आम तौर पर जब कोई हाई-प्रोफाइल सेलिब्रिटी किसी कंपनी में अपनी हिस्सेदारी घटाता है, तो छोटे निवेशकों के बीच घबराहट फैल जाती है और शेयर पर दबाव देखने को मिलता है। हालांकि, डीपी वायर्स के मामले में बिल्कुल उल्टा हुआ। बिग बी के बेचने के औसत भाव से भी ऊपर जाते हुए कंपनी का शेयर बुधवार को 4.56 प्रतिशत की बढ़त के साथ 213.03 रुपये पर बंद हुआ। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि प्रमोटर्स या संस्थागत निवेशकों के बजाय खुदरा निवेशकों ने इस सौदे को केवल एक आंशिक मुनाफावसूली के रूप में देखा है, न कि किसी नकारात्मक संकेत के रूप में।
लंबे समय का सफर और वित्तीय दबाव की इनसाइड स्टोरी
अमिताभ बच्चन मार्च 2018 की तिमाही से डीपी वायर्स में एक सार्वजनिक शेयरधारक के रूप में बने हुए हैं। मार्च 2026 को समाप्त हुई तिमाही के आंकड़ों के अनुसार, उनके पास कंपनी के कुल 3,27,590 इक्विटी शेयर थे, जो कंपनी में 2.11 प्रतिशत हिस्सेदारी का प्रतिनिधित्व करते थे। इस हालिया लेनदेन के बाद अब उनकी हिस्सेदारी घटकर करीब 1.6 प्रतिशत के आसपास रह गई है। इस आंशिक बिकवाली के पीछे कंपनी का पिछला रिकॉर्ड और इसके प्रदर्शन से मिलने वाला सुस्त रिटर्न एक बड़ी वजह माना जा रहा है।

डीपी वायर्स लिमिटेड का शेयर अपने 17 नवंबर 2023 के ऑल-टाइम हाई रिकॉर्ड 681.45 रुपये से लगभग 68 प्रतिशत तक टूट चुका है। हालांकि पिछले 5 कारोबारी दिनों में स्टॉक में 22 प्रतिशत की तेजी आई है और साल 2026 में अब तक इसने करीब 7 प्रतिशत का रिटर्न दिया है, लेकिन पिछले 5 वर्षों में इसका प्रदर्शन महज 44 प्रतिशत के मामूली रिटर्न तक ही सीमित रहा है।
इस भारी गिरावट के पीछे कंपनी का कमजोर वित्तीय प्रदर्शन भी एक मुख्य कारण है। वित्तीय वर्ष 2026 में कंपनी की स्टैंडअलोन बिक्री घटकर 480.11 करोड़ रुपये रह गई, जो वित्तीय वर्ष 2025 में 620.93 करोड़ रुपये थी। इसी तरह कंपनी का सालाना मुनाफा भी 22.20 करोड़ रुपये से घटकर 17.58 करोड़ रुपये पर आ चुका है। इन कमजोर नतीजों के कारण शेयर लंबे समय से दबाव का सामना कर रहा था।
बाजार विशेषज्ञों और प्रमोटर्स की स्थिति
कंपनी के मौजूदा शेयरहोल्डिंग पैटर्न की बात करें तो प्रमोटर्स के पास सबसे बड़ी 74.78 प्रतिशत हिस्सेदारी सुरक्षित है। वहीं विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) के पास 0.01 प्रतिशत और घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) के पास 0.03 प्रतिशत हिस्सेदारी है। बाकी बची 25.19 प्रतिशत हिस्सेदारी सार्वजनिक शेयरधारकों के पास है, जिसमें अमिताभ बच्चन एक प्रमुख नाम हैं। फिलहाल इस ब्लॉक डील में अमिताभ बच्चन से शेयर खरीदने वाले दूसरे पक्षों या निवेशकों की पहचान उजागर नहीं की गई है।
भविष्य और बुनियादी असर
डीपी वायर्स का वर्तमान में बाजार पूंजीकरण 316 करोड़ रुपये है। यह स्टॉक फिलहाल 18 गुना प्राइस-टू-अर्निंग्स (PE) अनुपात पर ट्रेड कर रहा है, जबकि इसी उद्योग का औसत पीई 22.6 गुना है। यह दर्शाता है कि यह कंपनी उद्योग मूल्यांकन की तुलना में कुछ छूट पर उपलब्ध है। 1996 में स्थापित और रतलाम, मध्य प्रदेश में मुख्यालय वाली यह कंपनी पावर ट्रांसमिशन, बुनियादी ढांचे और ऑटोमोबाइल क्षेत्रों को अपने गैल्वेनाइज्ड स्टील वायर, प्लास्टिक-कोटेड वायर और जियोमेम्ब्रेन प्लास्टिक शीट की आपूर्ति करती है। इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती मांग के कारण कंपनी का मुख्य बिजनेस मजबूत है, लेकिन निवेशकों को आने वाले तिमाही वित्तीय अपडेट और परिचालन प्रदर्शन पर बारीक नजर रखनी होगी कि क्या कंपनी अपने राजस्व और घटते लाभ मार्जिन को दोबारा पटरी पर ला पाती है या नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
क्या अमिताभ बच्चन ने डीपी वायर्स लिमिटेड की अपनी पूरी हिस्सेदारी बेच दी है?
नहीं, अमिताभ बच्चन ने कंपनी से अपनी हिस्सेदारी पूरी तरह खत्म नहीं की है। उन्होंने मार्च 2026 तिमाही के अपने 3.27 लाख शेयरों में से केवल 1.23 लाख शेयर बेचे और उसी दिन 41,566 शेयर दोबारा खरीद लिए। इस बदलाव के बाद भी उनके पास कंपनी के शेयर मौजूद हैं और उनकी हिस्सेदारी लगभग 1.6% बची हुई है।
अमिताभ बच्चन को इस ब्लॉक डील से कुल कितने रुपये मिले?
अमिताभ बच्चन ने बुधवार को 200.84 रुपये प्रति शेयर के औसत भाव पर 1,23,622 शेयर बेचे, जिससे इस पूरी डील की वैल्यू लगभग 2.48 करोड़ रुपये रही। वहीं उन्होंने 199.90 रुपये प्रति शेयर के भाव पर 83.09 लाख रुपये के नए शेयर वापस खरीदे भी हैं।
डीपी वायर्स का शेयर अपने ऑल-टाइम हाई से कितना नीचे चल रहा है?
डीपी वायर्स का शेयर 17 नवंबर 2023 को छुए गए अपने ऑल-टाइम हाई रिकॉर्ड 681.45 रुपये से लगभग 68% नीचे कारोबार कर रहा है। कमजोर वित्तीय नतीजों और मुनाफे में कमी के कारण पिछले दो सालों में इस स्टॉक पर भारी दबाव देखा गया है।
डीपी वायर्स लिमिटेड मुख्य रूप से किस कारोबार से जुड़ी हुई है?
डीपी वायर्स लिमिटेड स्टील वायर्स, स्पेशलाइज्ड LRPC स्ट्रैंड्स और जियोमेम्ब्रेन प्लास्टिक शीट्स बनाने वाली भारत की एक प्रमुख कंपनी है। इसके उत्पादों का उपयोग मुख्य रूप से बिजली ट्रांसमिशन, पुलों, फ्लाईओवरों, दूरसंचार, रेलवे और इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर किया जाता है।
संसाधन
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