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चक्रवात का असर: देश के कई राज्यों में मूसलाधार बारिश और आंधी का अलर्ट

बंगाल की खाड़ी से उठे डीप डिप्रेशन के कारण आंध्र प्रदेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में भारी बारिश और तेज हवाओं का दौर जारी है, जिसे लेकर प्रशासन ने हाई अलर्ट घोषित किया है।

게시됨업데이트됨1개월 전
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बंगाल की खाड़ी में बने गहरे दबाव और चक्रवाती सिस्टम के कारण देश के कई राज्यों में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है। मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर आंध्र प्रदेश और दक्षिण ओडिशा के तटों को पार करने वाले इस सिस्टम से तटीय इलाकों में भारी तबाही और लगातार बारिश देखने को मिल रही है। आम जनजीवन को सुरक्षित रखने के लिए प्रशासन ने कई जिलों में स्कूल बंद करने के साथ ही रेड अलर्ट जारी किया है।

तट पार करने वाला सिस्टम और क्या तय हुआ

बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना यह गहन अवदाब (डीप डिप्रेशन) 23 और 24 सितंबर की दरमियानी रात आंध्र प्रदेश के कलिंगपट्टनम के पास तट को पार कर चुका है। लैंडफॉल के वक्त हवा की रफ्तार 55 से 65 किलोमीटर प्रति घंटे थी, जो बढ़कर 75 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई थी। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह सिस्टम अब जमीन के ऊपर आगे बढ़ रहा है और धीरे-धीरे कमजोर हो रहा है, लेकिन इसके बावजूद इसकी वजह से नमी का प्रवाह बना हुआ है जिससे व्यापक स्तर पर बारिश हो रही है। पुरी और विशाखापत्तनम जैसे तटीय क्षेत्रों में समुद्र की स्थिति बेहद खतरनाक बनी हुई है, जिसके चलते प्रशासन ने समुद्र तटों पर आवाजाही पूरी तरह प्रतिबंधित कर दी है।

नीतियों और नियमों के तहत क्या निर्देश दिए गए हैं

प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कड़े एहतियाती कदम उठाए हैं। ओडिशा के दक्षिण हिस्सों में 10 से अधिक जिलों में स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों को बंद कर दिया गया है। इसके अलावा, करीब 5,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शरण दी गई है। मलकानगिरी में पुलों के डूबने और राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात बाधित होने के कारण आपदा प्रबंधन टीमों को तैनात किया गया है। ओडिशा सरकार ने किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए ओडीआरएएफ की 33 टीमों को मैदान में उतारा है, जिनमें से 24 टीमें अतिसंवेदनशील जिलों में पूरी तरह मुस्तैद हैं।

भारी बारिश और चक्रवात का असर
देशभर में मौसम के बदले मिजाज और चक्रवात का असर — Navbharat Times

किन लोगों और क्षेत्रों पर इसका प्रभाव पड़ रहा है

इस चक्रवाती गतिविधि और मानसूनी हलचल का सीधा असर आंध्र प्रदेश, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, झारखंड और मध्य प्रदेश के निवासियों पर पड़ रहा है। विशाखापत्तनम और पेड्डा वाल्टेयर जैसे इलाकों में 250 मिलीमीटर से अधिक रिकॉर्ड तोड़ बारिश दर्ज की गई है, जिससे निचले इलाकों में भारी जलभराव हो गया है और शहरी जीवन थम सा गया है। इसके साथ ही, किसानों को अपनी फसलों को सुरक्षित रखने की सलाह दी गई है क्योंकि लगातार पानी भरने से कृषि भूमि को नुकसान पहुंच सकता है। मछुआरों को अगले आदेश तक समुद्र में न जाने की सख्त चेतावनी दी गई है ताकि किसी भी तरह की अनहोनी से बचा जा सके।

प्रशासनिक कदम और भविष्य की तैयारियां

मौसम विभाग का अनुमान है कि यह मौसमी सिस्टम अगले 24 से 36 घंटों के दौरान और अधिक कमजोर पड़ जाएगा, लेकिन तब तक पूर्वी और मध्य भारत के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी रह सकता है। राज्य और जिला स्तर के नियंत्रण कक्ष लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं ताकि समय रहते राहत सामग्री और चिकित्सीय सहायता पहुंचाई जा सके। नागरिकों से अपील की गई है कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें और मौसम विभाग की ओर से जारी किए जाने वाले आधिकारिक अपडेट का पालन करते रहें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

  • क्या यह एक पूर्ण चक्रवात था?
    मौसम विभाग (IMD) के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार इसे 'डीप डिप्रेशन' यानी गहन अवदाब के रूप में दर्ज किया गया है, जिसने तट को पार किया।
  • किन राज्यों में सबसे ज्यादा बारिश की चेतावनी है?
    ओडिशा, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और झारखंड के कई जिलों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश का अलर्ट है।
  • मछुआरों के लिए क्या निर्देश हैं?
    समुद्र में खतरनाक लहरों और तेज हवाओं के कारण मछुआरों को अगले कुछ दिनों तक समुद्र में न जाने की सख्त सलाह दी गई है।
  • क्या स्कूलों में छुट्टियां घोषित की गई हैं?
    हां, अत्यधिक बारिश और सुरक्षा कारणों से ओडिशा और आंध्र प्रदेश के कई प्रभावित जिलों में स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है।
  • स्थिति में सुधार कब तक होने की उम्मीद है?
    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, सिस्टम के जमीन पर आगे बढ़ने के साथ अगले 24 घंटों में यह धीरे-धीरे कमजोर हो जाएगा।