Last updated: 30 अगस्त 2026
मंदाकिनी नदी का जलस्तर 135 मीटर पहुंचा: चित्रकूट में बाढ़ से भारी तबाही, 48 ट्रेनें प्रभावित
चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का जलस्तर सामान्य स्तर 126 मीटर से 9 मीटर ऊपर चढ़कर 135 मीटर तक पहुंच गया, जिससे क्षेत्र में करीब 23 साल का रिकॉर्ड टूट गया। इस भीषण जलभराव के कारण रामघाट की 800 से अधिक दुकानें जलमग्न हो गईं और डोडा डैम टूटने से सतना-मानिकपुर रेलखंड की पटरियों पर तीन फीट पानी भर गया। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और भारतीय वायुसेना ने संयुक्त बचाव अभियान चलाकर दर्जनों ग्रामीणों और श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकाला।

एक नज़र में पूरी स्थिति
लगातार तीन-चार दिनों की मूसलाधार बारिश और बांधों के ओवरफ्लो होने से मंदाकिनी नदी ने विकराल रूप ले लिया। बाढ़ का पानी चित्रकूट के शहरी हिस्सों के साथ-साथ यमुना तट से लगे तिरहार क्षेत्र के 50 से अधिक गांवों तक फैल गया। झांसी-मिर्जापुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर कर्वी को जोड़ने वाले पुल और रामघाट से हनुमान धारा जाने वाले पुराने पुल को भारी नुकसान पहुंचा, जिससे दोनों राज्यों के बीच सड़क संपर्क टूट गया।
रेलवे ट्रैक पर पानी भरने से 48 ट्रेनें प्रभावित हुईं, जिनमें 28 यात्री गाड़ियां और 20 मालगाड़ियां शामिल थीं। प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाने के लिए प्रशासन ने छह विशेष आश्रय स्थल स्थापित किए हैं।
घटनाक्रम का सिलसिलेवार ब्योरा
शनिवार सुबह मूसलाधार बारिश के बाद मानिकपुर के पास स्थित डोडा डैम के क्षतिग्रस्त होने से पानी तेजी से रिहायशी इलाकों और रेल पटरियों की तरफ बढ़ा। चितहरा और मझगवां स्टेशनों के बीच रेलवे लाइन पर करीब 3 फीट पानी जमा हो गया, जिससे ट्रेनों की आवाजाही तुरंत रोक दी गई। सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रेलकर्मी हाथ में लाल झंडी लेकर पटरियों पर उतरे और बेहद धीमी गति से ट्रेनों को सुरक्षित मार्ग से पार कराया।

शनिवार दोपहर तक पानी रामघाट के बाजार और रिहायशी परिसरों में घुस गया। रविवार सुबह तक नदी के जलस्तर में 8 मीटर की कमी दर्ज की गई, हालांकि प्रवाह अब भी खतरे के निशान से एक मीटर ऊपर बना रहा। जलस्तर घटते ही राजापुर और कर्वी तहसीलों के प्रभावित हिस्सों में सड़कों से कीचड़ और मलबा हटाने का काम शुरू हुआ।
प्रमुख अधिकारी, आंकड़े और नुकसान का विवरण
बाढ़ की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने रीवा में आपात समीक्षा बैठक की और रविवार सुबह सतना तथा चित्रकूट के जलमग्न क्षेत्रों का स्थलीय मुआयना किया। उन्होंने स्पष्ट निर्देश जारी किए कि किसी भी स्थिति में जनहानि या पशुहानि नहीं होनी चाहिए।
पिछले 3-4 दिनों से लगातार बारिश हो रही थी और बीती रात भी काफी तेज बारिश हुई, जिससे नदियां उफान पर आ गईं। सुबह लगभग 6:30 बजे ट्रैक पर पानी भरने की स्थिति बनी। चितहरा और मझगवां के पास रेल ट्रैक के ऊपर पानी आ गया था। रेलवे के सुरक्षा प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन करते हुए हमारी पेट्रोलिंग टीम, की-मैन और सुपरवाइजर्स ने ट्रैक की सघन जांच की। जांच पूरी होने के बाद ही ट्रेनों को सुरक्षित रवाना किया गया।

बचाव कार्यों के दौरान एनडीआरएफ और पुलिस ने रमयापुर, पनौटी और चौरा गांवों से 45 ग्रामीणों को सुरक्षित निकाला, जिनमें एक गर्भवती महिला भी शामिल थी। प्रयागराज से पहुंचे भारतीय वायुसेना के चेतक हेलीकॉप्टर ने सटीक विंचिंग ऑपरेशन चलाकर तेज धारा में फंसे दो बुजुर्गों को एयरलिफ्ट किया। सतना जिले के छह गांवों में रेस्क्यू चलाकर सात लोगों को बाहर निकाला गया, जबकि चित्रकूट में कुल 72 नागरिकों को सुरक्षित आश्रय तक पहुंचाया गया।
प्रशासनिक कदम और राहत सहायता
चित्रकूट के जिलाधिकारी पुलकित गर्ग और पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह ने प्रभावित बस्तियों का दौरा कर राहत कार्यों का जायजा लिया। प्रशासन ने नगर परिषद और पटवारियों की संयुक्त टीमें गठित कर नुकसान का विस्तृत सर्वेक्षण शुरू किया है।
- पात्र बाढ़ पीड़ित परिवारों को तुरंत 5000 रुपये की नकद सहायता और 50 किलो राशन उपलब्ध कराया जा रहा है।
- मकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के नुकसान का आकलन दैवी आपदा राहत नियमों के तहत किया जा रहा है।
- पेयजल संकट से निपटने के लिए टैंकरों से शुद्ध पानी और भोजन के पैकेट वितरित किए जा रहे हैं।
- सड़कों से मलबा हटाने के लिए 40 से अधिक सफाईकर्मी, फायर ब्रिगेड और ट्रैक्टर-ट्रॉली तैनात किए गए हैं।
आगे की स्थिति और निगरानी
मंदाकिनी का जलस्तर घटने से रेलवे ने मुंबई-हावड़ा रेलमार्ग पर ट्रेनों का संचालन सामान्य कर दिया है, जिसे पहले 10 किमी प्रति घंटे की गति सीमा पर संचालित किया जा रहा था। मानिकपुर-सतना मेमू ट्रेन को छोड़कर अन्य लंबी दूरी की रेल सेवाएं बहाल हैं। प्रशासन ने यमुना के तटवर्ती गांवों में निगरानी चौकियां स्थापित की हैं ताकि जलस्तर दोबारा बढ़ने पर समय रहते बचाव दल सक्रिय हो सकें। नागरिकों को क्षतिग्रस्त पुलों और जलभराव वाले रास्तों से दूर रहने की सख्त हिदायत दी गई है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मंदाकिनी नदी में आई बाढ़ से कौन से इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित हुए?
चित्रकूट का प्रमुख धार्मिक स्थल रामघाट, कर्वी, राजापुर, आरोग्य धाम और तिरहार क्षेत्र के लगभग 50 गांव सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं।
रेल यातायात पर बाढ़ का क्या असर पड़ा?
डोडा डैम टूटने से पटरियों पर पानी भर गया, जिससे लगभग 48 ट्रेनों का संचालन प्रभावित हुआ और सतना-मानिकपुर मेमू ट्रेन को रद्द करना पड़ा।
प्रशासन पीड़ितों को क्या राहत और मुआवजा दे रहा है?
प्रशासन पात्र प्रभावित परिवारों को 5000 रुपये की नकद सहायता, 50 किलोग्राम राशन, पेयजल और क्षतिग्रस्त मकानों के लिए नियमानुसार वित्तीय मुआवजा दे रहा है।
बचाव अभियान में किन सुरक्षा बलों ने भाग लिया?
राहत और बचाव कार्यों में स्थानीय पुलिस के साथ एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और भारतीय वायुसेना के चेतक हेलीकॉप्टर ने हिस्सा लिया।
संसाधन
इस लेख में उद्धृत स्रोत और संदर्भ।
