दीपिका चिखलिया: बी-ग्रेड फिल्मों के संघर्ष से 'सीता' बनने का वो अनसुना सफर
रामायण की सीता फेम दीपिका चिखलिया के जन्मदिन पर जानिए कैसे उन्होंने 40 लड़कियों को पछाड़कर यह रोल पाया और कैसे एक समय मजबूरी में बी-ग्रेड फिल्में करनी पड़ी थीं।
दीपिका चिखलिया: बी-ग्रेड फिल्मों के संघर्ष से 'साक्षात सीता' बनने तक का वो अनसुना सफररामानंद सागर की 'रामायण' में सीता का किरदार निभाने वाली दीपिका चिखलिया आज अपना जन्मदिन मना रही हैं। भारत के घर-घर में पूजी जाने वाली दीपिका के लिए यह मुकाम हासिल करना इतना आसान नहीं था, जितना आज दिखता है। एक समय ऐसा भी था जब उन्हें अपने करियर को बचाने के लिए बी-ग्रेड फिल्मों का सहारा लेना पड़ा था, लेकिन उनकी किस्मत ने ऐसी करवट ली कि वह करोड़ों भारतीयों के लिए आस्था का प्रतीक बन गईं।रामायण के 'लक्ष्मण' यानी सुनील लहरी ने खास अंदाज में दीपिका को जन्मदिन की बधाई दी।संघर्षों की लंबी दास्तानदीपिका चिखलिया के करियर की शुरुआत काफी उतार-चढ़ाव भरी रही। रामायण से पहले उनकी कई फिल्में बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हो चुकी थीं। काम की तलाश और डूबते करियर को बचाने की मजबूरी में उन्होंने 'रात के अंधेरे में' जैसी बी-ग्रेड फिल्मों में भी काम किया। उन दिनों उन्हें कोई नहीं जानता था कि यही अभिनेत्री एक दिन भारतीय टेलीविजन इतिहास की सबसे बड़ी पहचान बनेगी। वक्त की मार ने उन्हें उन किरदारों को चुनने पर मजबूर किया, जिन्हें आज वह शायद खुद भी याद नहीं करना चाहेंगी।दिलचस्प बात यह है कि जब रामानंद सागर ने रामायण के लिए ऑडिशन शुरू किए, तो सीता के रोल के लिए करीब 40 लड़कियों ने दावेदारी पेश की थी। दीपिका ने इन सबको पीछे छोड़ते हुए यह प्रतिष्ठित रोल हासिल किया। वह कहती हैं कि उस समय उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि यह एक रोल उनकी पूरी जिंदगी और पहचान को हमेशा के लिए बदल देगा।जब हकीकत और पर्दे का अंतर मिट गयारामायण के प्रसारण के बाद जो हुआ, वह किसी चमत्कार से कम नहीं था। लोगों ने दीपिका को अभिनेत्री समझना छोड़ दिया और उन्हें सचमुच 'माता सीता' का अवतार मान लिया। हालात ये थे कि सेट पर लोग उनके पैर छूने लगते थे। दीपिका बताती हैं कि सीता की छवि इतनी हावी हो गई थी कि उन्हें सार्वजनिक रूप से खाना खाने तक की आजादी नहीं थी; लोग उन्हें खाते देख भी भावुक हो जाते थे।सीता के किरदार ने दीपिका को रातों-रात वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई।इतना ही नहीं, शूटिंग के दौरान मर्यादा बनाए रखने के लिए उन्हें 'राम' (अरुण गोविल) और 'लक्ष्मण' (सुनील लहरी) से एक निश्चित दूरी बनाकर रखनी पड़ती थी। सेट पर माहौल इतना गंभीर रहता था कि वह रावण का किरदार निभाने वाले अरविंद त्रिवेदी से ही अधिक बातचीत कर पाती थीं, क्योंकि पर्दे पर वह उनके शत्रु थे लेकिन असल जिंदगी में उनके अच्छे मित्र बन गए थे। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी तक रामायण की कैसेट्स मंगवाकर देखते थे, जो इस शो की लोकप्रियता का प्रमाण है।लोगों की प्रतिक्रिया और आदर'आज सीता मां का जन्मदिन है... भगवान उन्हें हमेशा खुश रखें।'— सुनील लहरी, अभिनेता (लक्ष्मण)सुनील लहरी के इस संदेश ने सोशल मीडिया पर फैंस को भावुक कर दिया। लोग आज भी उन्हें उसी सम्मान के साथ देखते हैं जैसा 80 के दशक में देखते थे। हालांकि, उनके पुराने बी-ग्रेड फिल्मों के फुटेज जब वायरल होते हैं, तो सोशल मीडिया पर चर्चा जरूर होती है, लेकिन फैंस का कहना है कि दीपिका का संघर्ष ही उनकी सफलता की असली कहानी है।बदलाव और आज की स्थितिबी-ग्रेड फिल्मों के उस दौर से निकलकर आज दीपिका चिखलिया करोड़ों की संपत्ति की मालकिन हैं। वह न केवल एक सफल अभिनेत्री रही हैं, बल्कि राजनीति में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुकी हैं। उनका जीवन सिखाता है कि सफलता के रास्ते में कांटे तो आएंगे ही, लेकिन दृढ़ निश्चय हो तो इंसान अपनी नियति खुद लिख सकता है।संघर्ष से सफलता तक दीपिका का सफर हर कलाकार के लिए प्रेरणा है।भविष्य की राहआज भी दीपिका सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय हैं और अपने फैंस के साथ पुरानी यादें साझा करती रहती हैं। वह नई पीढ़ी के कलाकारों के लिए एक मार्गदर्शक की तरह हैं, जो बताती हैं कि किरदार में जान फूंकने के लिए कितनी तपस्या की जरूरत होती है। उनके जन्मदिन पर देश भर से मिल रही बधाइयां साबित करती हैं कि 'सीता' का वह जादू आज भी बरकरार है।अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)दीपिका चिखलिया को सीता का रोल कैसे मिला?उन्होंने ऑडिशन में 40 अन्य लड़कियों को पीछे छोड़ा था, जिसके बाद रामानंद सागर ने उन्हें इस भूमिका के लिए चुना।क्या दीपिका ने सच में बी-ग्रेड फिल्मों में काम किया था?हां, रामायण से पहले करियर के शुरुआती संघर्ष के दौरान उन्होंने कुछ कम बजट और बी-ग्रेड फिल्मों में अभिनय किया था।रामायण के दौरान उनका अनुभव कैसा था?उन्हें सेट पर बहुत मर्यादा में रहना पड़ता था और लोग उन्हें असल में देवी मानकर उनके पैर छूते थे।आज दीपिका चिखलिया क्या कर रही हैं?वह सोशल मीडिया और टीवी इंडस्ट्री में सक्रिय हैं और अक्सर पौराणिक कथाओं और कला से जुड़े विषयों पर अपनी राय साझा करती हैं।
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लेखक
आया नजीब
वरिष्ठ संपादक
मनोरंजन, संस्कृति, जीवनशैली और भोजन को कवर करता है।