छात्र प्रदर्शनों पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश: बिना आपराधिक रिकॉर्ड वाले नाबालिगों को तुरंत रिहा करने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने नीट पेपर लीक प्रदर्शनों के दौरान हिरासत में लिए गए निर्दोष नाबालिगों को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया है और प्रदर्शनकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है।

छात्र प्रदर्शन: सुप्रीम कोर्ट का नाबालिगों को रिहा करने का आदेश
📢विज्ञापन

छात्र प्रदर्शनों पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश: बिना आपराधिक रिकॉर्ड वाले नाबालिगों को तुरंत रिहा करने का निर्देश

नीट पेपर लीक मामले को लेकर देश भर में हुए छात्र प्रदर्शनों और पुलिस कार्रवाई के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि बिना किसी आपराधिक रिकॉर्ड वाले 18 साल से कम उम्र के प्रदर्शनकारियों को तुरंत रिहा किया जाए। इसके साथ ही अदालत ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ किसी भी तरह की कठोर दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है।

सुप्रीम कोर्ट छात्र प्रदर्शन सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने नाबालिग प्रदर्शनकारियों को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया — BBC

क्या है मामला और अदालत की सख्त टिप्पणी

20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के बैनर तले नीट प्रश्नपत्र लीक के विरोध में और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर बड़े पैमाने पर छात्र प्रदर्शन हुआ था। इस दौरान संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच तीखी झड़प हुई। पुलिस पर अत्यधिक बल प्रयोग, लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले और पैलेट गन चलाने के आरोप लगे। वहीं दूसरी ओर, पुलिस का दावा है कि प्रदर्शनकारियों की ओर से किए गए हमले में 200 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए थे।

कानूनी बहस और पृष्ठभूमि

सुनवाई के दौरान याचिकाओं में आरोप लगाया गया कि प्रदर्शनकारियों को दबाने के लिए पुलिस ने गैर-अनुपातिक बल का इस्तेमाल किया। वकीलों ने अदालत को बताया कि पैलेट गन के इस्तेमाल से 19 साल के एक छात्र की आंखों की रोशनी चली गई, जबकि कई छात्र और मीडियाकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए। इसके अलावा, बिहार में 13 साल के बच्चे समेत 140 से अधिक लोगों को हिरासत में रखे जाने की बात भी सामने रखी गई।

जंतर-मंतर पर पुलिस कार्रवाई
जंतर मंतर पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प — BBC

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने इन आरोपों को बेहद गंभीर माना। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने मौखिक रूप से टिप्पणी करते हुए कहा:

शांतिपूर्ण और क़ानूनसम्मत प्रदर्शन का अधिकार संविधान द्वारा संरक्षित है और केवल आंदोलन करने के आधार पर लाठीचार्ज को सही नहीं ठहराया जा सकता। जब तक आंदोलन शांतिपूर्ण है, केवल इसलिए कि आंदोलन हो रहा है, अत्यधिक बल नहीं हो सकता।

जस्टिस सूर्यकांत, मुख्य न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट

अदालत के प्रमुख निर्देश और आगे की दिशा

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए कई अहम अंतरिम आदेश दिए हैं:

  • नाबालिगों की रिहाई: 18 वर्ष से कम आयु के उन सभी किशोरों को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया गया है जिनका कोई पिछला आपराधिक इतिहास नहीं है।
  • डिजिटल साक्ष्यों का संरक्षण: दिल्ली समेत 8 राज्यों (महाराष्ट्र, बिहार, केरल, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, असम और पश्चिम बंगाल) को निर्देश दिया गया है कि वे सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन रिकॉर्डिंग, बॉडी-कैमरा फुटेज और पीसीआर लॉग को सुरक्षित रखें।
  • डेटा गोपनीयता: पुलिस द्वारा एकत्र किए गए प्रदर्शनकारियों के किसी भी व्यक्तिगत डेटा या प्रोफाइलिंग जानकारी को सार्वजनिक करने पर रोक लगाई गई है।
  • स्वतंत्र जांच का संकेत: अदालत ने कहा कि पुलिस कार्रवाई और हिंसा दोनों पहलुओं की जांच के लिए एक पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में विशेष जांच दल (SIT) या उच्चस्तरीय समिति गठित की जा सकती है।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने निष्पक्ष जांच के संकेत दिए हैं — Navbharat Times

क्या प्रभाव पड़ेगा

अदालत के इस रुख से देश भर में चल रहे छात्र आंदोलनों और नागरिक अधिकारों के संरक्षण को बल मिला है। सर्वोच्च अदालत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पुलिस बल को भीड़ नियंत्रण के लिए एक राष्ट्रीय मानक प्रोटोकॉल (standard protocol) का पालन करना अनिवार्य होना चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। मामले की अगली सुनवाई अब 3 अगस्त को निर्धारित की गई है।

क्या अब भी अस्पष्ट है

अदालत ने हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया है कि पैलेट गन का प्रयोग किसके सीधे आदेश पर हुआ था। साथ ही, यह जांच का विषय बना हुआ है कि हिंसा की शुरुआत प्रदर्शनकारी छात्रों द्वारा की गई थी या भीड़ में शामिल बाहरी असामाजिक तत्वों ने माहौल बिगड़ा। इन सभी बिंदुओं पर केंद्र और राज्य सरकारों के जवाब आने के बाद स्थिति पूरी तरह साफ होगी।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

सुप्रीम कोर्ट ने नाबालिग प्रदर्शनकारियों के लिए क्या आदेश दिया है?

कोर्ट ने निर्देश दिया है कि 18 वर्ष से कम उम्र के ऐसे सभी नाबालिगों को तुरंत रिहा किया जाए जिनका कोई पिछला आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।

क्या प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकियों पर रोक लग गई है?

अदालत ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ किसी भी तरह की कठोर या दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाई है, हालांकि आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों को यह सुरक्षा नहीं मिलेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस बल प्रयोग पर क्या टिप्पणी की?

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार संवैधानिक है और केवल आंदोलन होने के आधार पर अत्यधिक बल प्रयोग या लाठीचार्ज नहीं किया जा सकता।

किन राज्यों को सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया है?

अदालत ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, केरल, असम और पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिवों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

मामले की अगली सुनवाई कब होगी?

सर्वोच्च अदालत इस मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को करेगी।

Ahmed Sezer profile photo

लेखक

Ahmed Sezer

वरिष्ठ संपादक

राजनीति, सरकार और सामान्य जनहित के विषयों में विशेषज्ञ।

यह लेख AI-सहायता प्राप्त संपादकीय टूल की मदद से तैयार किया गया और प्रकाशन से पहले Trend Digest के संपादकीय मानकों के तहत समीक्षा की गई।

हमारी कार्यप्रणाली के बारे में जानें
राजनीतिसार्वजनिक नीतिसामान्य ट्रेंड

📚संसाधन

इस लेख में उद्धृत स्रोत और संदर्भ।