Last updated: 03 April 2026, 16:55
कोटा विश्वविद्यालय ने ओम गुंजल का पीएचडी पंजीकरण किया रद्द — महिला प्रोफेसर को धमकाने पर कड़ा एक्शन
कोटा विश्वविद्यालय के शांत परिसर में इन दिनों भारी तनाव का माहौल है, जहां शिक्षा के मंदिर में एक शिक्षक की गरिमा को ठेस पहुंचाने का मामला तूल पकड़ चुका है। पूर्व विधायक प्रहलाद गुंजल के भतीजे और पूर्व पार्षद ओम गुंजल पर एक महिला प्रोफेसर ने गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए उनकी 'नो एंट्री' के आदेश जारी कर दिए हैं। यह कार्रवाई पुलिस में दर्ज उस शिकायत के बाद हुई है जिसमें पीछा करने और मानसिक प्रताड़ना की बात कही गई थी।

यूं बढ़ा विवादों का सिलसिला
मामला तब गरमाया जब कोटा विश्वविद्यालय की एक महिला प्रोफेसर ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि ओम गुंजल उन्हें लंबे समय से परेशान कर रहे हैं। प्रोफेसर का आरोप है कि आरोपी न केवल उनका पीछा करता था, बल्कि शराब के नशे में उनके घर तक पहुंच जाता था। हद तो तब हो गई जब प्रोफेसर को जान से मारने की धमकियां दी जाने लगीं। पुलिस ने इस मामले में आईपीसी की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। जैसे ही यह खबर विश्वविद्यालय प्रशासन तक पहुंची, दूध का दूध और पानी का पानी करने के लिए अनुशासनात्मक समिति की बैठक बुलाई गई।
विश्वविद्यालय का कड़ा रुख और पीएचडी पर गाज
शिक्षा के क्षेत्र में अनुशासन को सर्वोपरि रखते हुए विश्वविद्यालय ने ओम गुंजल का पीएचडी रजिस्ट्रेशन तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। प्रशासन का मानना है कि किसी भी शोधार्थी का ऐसा व्यवहार संस्थान की छवि को धूमिल करता है।

यही नहीं, अब आरोपी के लिए विश्वविद्यालय के दरवाजे पूरी तरह बंद कर दिए गए हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक पुलिस जांच पूरी नहीं हो जाती, ओम गुंजल परिसर के भीतर कदम नहीं रख सकेंगे। इस फैसले से अन्य छात्रों के बीच यह कड़ा संदेश गया है कि रसूख चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, कानून और अनुशासन से ऊपर कोई नहीं है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शोध कार्य के दौरान गरिमा बनाए रखना अनिवार्य है।
प्रतिक्रियाएं और आधिकारिक बयान
इस पूरे मामले पर स्थानीय राजनीतिक हलकों में भी चर्चाएं तेज हैं, क्योंकि आरोपी एक प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखते हैं। हालांकि, पीड़ित पक्ष की सुरक्षा को लेकर छात्र संगठन और शिक्षक संघ एकजुट नजर आ रहे हैं।
महिला प्रोफेसर की शिकायत बेहद गंभीर थी। हमने विश्वविद्यालय के नियमों के तहत सख्त कदम उठाए हैं ताकि शैक्षणिक वातावरण सुरक्षित बना रहे।
पुलिस की टीमें अब आरोपी की तलाश में जुटी हैं, क्योंकि प्राथमिकी दर्ज होने के बाद से ही वह गिरफ्तारी से बच रहा है। सूत्रों के मुताबिक, पुलिस ने पीड़िता के बयान दर्ज कर लिए हैं और कॉल रिकॉर्ड्स की जांच की जा रही है।
मामले का गहरा असर और सामाजिक परिप्रेक्ष्य
यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं है, बल्कि यह कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा और कैंपस में 'पावर पॉलिटिक्स' के दुरुपयोग पर भी सवाल उठाती है। कोटा जैसे शिक्षा हब में इस तरह की खबरें अभिभावकों और छात्रों की चिंता बढ़ा देती हैं। आ बैल मुझे मार वाली स्थिति पैदा करते हुए आरोपी ने अपने राजनीतिक करियर के साथ-साथ अपनी शैक्षणिक योग्यता को भी दांव पर लगा दिया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई से संस्थानों में विश्वास बढ़ता है। कोटा विश्वविद्यालय द्वारा लिया गया यह निर्णय एक नजीर साबित हो सकता है।
आगे की राह
फिलहाल, ओम गुंजल की गिरफ्तारी होना बाकी है। पुलिस का कहना है कि वे तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की लोकेशन ट्रेस कर रहे हैं। मामले की विस्तृत जानकारी के लिए मुख्य रिपोर्ट देखें। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या आरोपी सरेंडर करता है या पुलिस उसे धर दबोचती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- ओम गुंजल पर क्या आरोप हैं? उन पर कोटा विश्वविद्यालय की एक महिला प्रोफेसर का पीछा करने, शराब पीकर उनके घर जाने और जान से मारने की धमकी देने के आरोप हैं।
- विश्वविद्यालय ने क्या कार्रवाई की है? विश्वविद्यालय ने ओम गुंजल का पीएचडी रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया है और परिसर में उनके प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है।
- क्या ओम गुंजल की गिरफ्तारी हुई है? नहीं, पुलिस अभी भी आरोपी की तलाश में छापेमारी कर रही है और वह फिलहाल फरार है।
- पीड़ित प्रोफेसर ने क्या शिकायत की? प्रोफेसर ने आरोप लगाया कि आरोपी उन्हें ब्लैकमेल कर रहा था और लगातार उनका पीछा कर रहा था जिससे उनकी सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया है।
संसाधन
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