गुजरात में जैश नेटवर्क की साजिश का दावा: एटीएस ने आठ संदिग्धों को पकड़ा

गुजरात एटीएस ने जैश-ए-मोहम्मद से कथित संबंध रखने वाले आठ संदिग्धों को गुजरात और मध्य प्रदेश से गिरफ्तार किया है। एजेंसी का दावा है कि आरोपी राज्य में सक्रिय नेटवर्क खड़ा करने और नए लोगों को जोड़ने की कोशिश कर रहे थे।

गुजरात एटीएस ने जैश से जुड़े आठ संदिग्ध पकड़े
अंतिम अपडेटJul 3, 2026, 8:16:34 PM
4 घंटे पहले
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गुजरात में जैश नेटवर्क की साजिश का दावा: एटीएस ने आठ संदिग्धों को पकड़ा

आठ गिरफ्तारियां, पांच ठिकानों पर कार्रवाई और आरोप कि गुजरात में प्रतिबंधित संगठन जैश-ए-मोहम्मद का नया नेटवर्क खड़ा किया जा रहा था। गुजरात एटीएस की यह कार्रवाई अहमदाबाद की भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा से पहले सामने आई है, जिसमें लाखों श्रद्धालुओं के शामिल होने की जानकारी दी गई है। जांच एजेंसी अब गिरफ्तार आरोपियों के संपर्कों, डिजिटल सामग्री और कथित फंडिंग की कड़ियां जोड़ रही है।

गुजरात एटीएस की गिरफ्तारी से जुड़े आठ आरोपी
गुजरात और मध्य प्रदेश से पकड़े गए संदिग्धों की तस्वीर — Navbharat Times

सीधी बात

  • गुजरात एटीएस ने जैश-ए-मोहम्मद से कथित संबंध रखने वाले आठ संदिग्धों को गुजरात और मध्य प्रदेश से गिरफ्तार किया है।
  • सात आरोपी गुजरात के बनासकांठा, पाटन और नवसारी जैसे जिलों से, जबकि एक आरोपी मध्य प्रदेश के देवास से पकड़ा गया।
  • एजेंसी का दावा है कि आरोपी गुजरात में सक्रिय नेटवर्क तैयार करने और नए लोगों को जोड़ने की कोशिश कर रहे थे।
  • मामले में यूएपीए की धाराएं 13, 17, 18, 38, 39 और भारतीय न्याय संहिता की धाराएं 148 और 61 लगाई गई हैं।
  • जांच में कथित तौर पर डिजिटल सामग्री, साहित्य, झंडे और करीब तीन लाख रुपये की फंडिंग से जुड़े सुराग सामने आए हैं।

पूरी बात कैसे खुली

गुजरात एटीएस के अनुसार, गुप्त सूचना के बाद तकनीकी निगरानी और मानव खुफिया जानकारी के आधार पर कार्रवाई शुरू हुई। एजेंसी ने पांच विशेष टीमें बनाईं और गुजरात के बनासकांठा, मेहसाणा, पाटन, नवसारी तथा मध्य प्रदेश के देवास में छापेमारी की। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में एटीएस डीआईजी सुनील जोशी के हवाले से बताया गया कि पहले दो आरोपी पकड़े गए, फिर छह और गिरफ्तारियां हुईं।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अहमद अब्दुल्ला गाजीवाला, इब्राहिम मोहम्मद हुसैन घाघा, मुदस्सिर अब्दुल्ला गाजीवाला, जकारिया दुरानी मोहम्मद अम्मार घाघा, मुफ्ती फौजान इस्माइल दौवा, मोहम्मद अमीन शेरा, मोहम्मद अब्दुल रहमान सावदी और बिलाल दुरानी मोहम्मद अम्मार घाघा के रूप में की गई है। इनमें दो युवकों की उम्र 18 और 19 वर्ष बताई गई है, जो जांच के सामाजिक पहलू को भी गंभीर बनाता है। सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह सिर्फ गिरफ्तारी का मामला नहीं, बल्कि कथित भर्ती और कट्टरपंथी सामग्री के प्रसार की जांच भी है।

गुजरात एटीएस की कार्रवाई से जुड़ी तस्वीर
एटीएस ने गुजरात और मध्य प्रदेश में अलग-अलग जगहों पर कार्रवाई की — AajTak

आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपियों पर जैश-ए-मोहम्मद के निर्देश पर गुजरात में नेटवर्क मजबूत करने की कोशिश का आरोप है। जांच एजेंसियां उनके डिजिटल उपकरणों, वित्तीय लेनदेन और संपर्कों की पड़ताल कर रही हैं। यहीं से मामला एक स्थानीय छापेमारी से आगे बढ़कर संभावित संगठित तंत्र की जांच में बदल जाता है।

देवास से पकड़े गए बिलाल दुरानी को लेकर अलग से स्थानीय जांच का कोण सामने आया है। अमर उजाला की रिपोर्ट में बताया गया कि वह टाइल्स लगाने का काम करता था और पांचवीं तक पढ़ा था। देवास पुलिस अधीक्षक पुनीत गहलोद ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए कहा कि गुजरात एटीएस एक संदिग्ध की तलाश में आई थी और नियमानुसार उसे एटीएस को सौंप दिया गया।

यह मामला क्यों बड़ा है

इस कार्रवाई का समय अहम है। अहमदाबाद में भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा को लेकर भारी भीड़ जुटती है और नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार इस आयोजन में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के शामिल होने की बात भी कही गई है। ऐसे बड़े धार्मिक आयोजन से पहले किसी कथित आतंकी नेटवर्क पर कार्रवाई सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता और जोखिम मूल्यांकन दोनों को सामने लाती है।

देवास से संदिग्ध गिरफ्तारी से जुड़ी तस्वीर
देवास से पकड़े गए संदिग्ध को लेकर स्थानीय पुलिस ने गिरफ्तारी की पुष्टि की — Dainik Bhaskar

एटीएस का दावा है कि आरोपियों ने जैश-ए-मोहम्मद की विचारधारा फैलाने के लिए साहित्य का गुजराती में अनुवाद किया और नए लोगों को जोड़ने की कोशिश की। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि आरोपी पाकिस्तान स्थित अब्दुल्ला साहब नाम के हैंडलर के संपर्क में थे और उन्हें एक व्यक्ति के जरिए करीब तीन लाख रुपये मिले थे। अगर जांच में यह दावा साबित होता है, तो यह मामला सिर्फ ऑनलाइन प्रचार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि संगठन, धन और स्थानीय भर्ती की संयुक्त जांच बनेगा।

भारत में आतंकी नेटवर्क की जांच अक्सर डिजिटल संपर्कों, स्थानीय सहायक ढांचे और छोटी रकम के लेनदेन से आगे बढ़ती है। इस मामले में मोबाइल से कथित तौर पर 254 दस्तावेज, ऑडियो-वीडियो, फोटो, झंडा, उर्दू पत्र और गुजराती अनुवादित सामग्री मिलने का दावा किया गया है। ऐसे सबूत अदालत में किस तरह रखे जाते हैं और उनसे आरोप कैसे सिद्ध किए जाते हैं, यह आगे की कानूनी प्रक्रिया तय करेगी।

अब आगे क्या होगा

गुजरात एटीएस ने सभी आठ आरोपियों के खिलाफ यूएपीए और भारतीय न्याय संहिता की धाराओं में मामला दर्ज किया है। अब पूछताछ, डिजिटल फॉरेंसिक, वित्तीय लेनदेन की जांच और संपर्कों की पड़ताल आगे की दिशा तय करेगी। एजेंसी ने कहा है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

देवास, पाटन, बनासकांठा और नवसारी से जुड़ी कड़ियों के कारण जांच कई जिलों और दो राज्यों तक फैली है। अगले चरण में यह स्पष्ट होगा कि कथित संगठनात्मक ढांचा कितना सक्रिय था, किसने धन दिया और क्या कोई ठोस हमले की योजना तैयार की गई थी।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

गुजरात एटीएस ने कितने लोगों को गिरफ्तार किया?

गुजरात एटीएस ने कुल आठ संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। इनमें सात गुजरात से और एक मध्य प्रदेश के देवास से पकड़ा गया है।

आरोपियों पर मुख्य आरोप क्या हैं?

एटीएस का दावा है कि आरोपी प्रतिबंधित संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े थे और गुजरात में उसका सक्रिय नेटवर्क खड़ा करने की कोशिश कर रहे थे। उन पर नए लोगों को जोड़ने और संगठन की विचारधारा फैलाने का भी आरोप है।

किन कानूनों के तहत मामला दर्ज हुआ है?

आरोपियों के खिलाफ यूएपीए की धाराएं 13, 17, 18, 38, 39 और भारतीय न्याय संहिता की धाराएं 148 और 61 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

देवास से पकड़ा गया आरोपी कौन है?

देवास से पकड़े गए आरोपी की पहचान बिलाल दुरानी मोहम्मद अम्मार घाघा उर्फ अबू दुजाना के रूप में हुई है। रिपोर्टों के अनुसार उसकी उम्र 18 वर्ष है और वह वारसी नगर क्षेत्र से पकड़ा गया।

आम लोगों पर इसका क्या असर है?

इस समय आम लोगों के लिए सबसे सीधा असर सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा है, खासकर बड़े धार्मिक आयोजनों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में। जांच एजेंसियां नेटवर्क, संपर्कों और संभावित खतरे की दिशा में आगे काम कर रही हैं।

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लेखक

Ahmed Sezer

वरिष्ठ संपादक

राजनीति, सरकार और सामान्य जनहित के विषयों में विशेषज्ञ।

यह लेख AI-सहायता प्राप्त संपादकीय टूल की मदद से तैयार किया गया और प्रकाशन से पहले Trend Digest के संपादकीय मानकों के तहत समीक्षा की गई।

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