ध्रुव राठी वीडियो मामला आज: समिति को 15 दिन में फैसला करना होगा

दिल्ली हाईकोर्ट ने ध्रुव राठी के विवादित वीडियो को हटाने की मांग वाली अपील पर शिकायत अपीलीय समिति को 15 दिनों में फैसला करने का निर्देश दिया है। अदालत ने अभी वीडियो हटाने का अंतिम आदेश नहीं दिया है।

ध्रुव राठी वीडियो पर 15 दिन में फैसला: हाईकोर्ट
अंतिम अपडेटJul 3, 2026, 11:24:42 PM
1 घंटा पहले
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ध्रुव राठी वीडियो मामला आज: समिति को 15 दिन में फैसला करना होगा

ध्रुव राठी के 21 मार्च के वीडियो को हटाया जाएगा या नहीं, इस पर अब केंद्र की शिकायत अपीलीय समिति को 15 दिनों के भीतर फैसला करना होगा। दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को यह समयसीमा तय करते हुए कहा कि आदेश की अनदेखी को गंभीरता से लिया जाएगा। अदालत ने स्वयं वीडियो हटाने का अंतिम आदेश नहीं दिया है। मामला अधिवक्ता अमिता सचदेवा की उस अपील से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने धार्मिक भावनाएं आहत होने और कथित रूप से भड़काऊ सामग्री होने का आरोप लगाया है।

ध्रुव राठी के विवादित वीडियो से जुड़ी तस्वीर
ध्रुव राठी के वीडियो को हटाने की मांग पर अदालत ने समयसीमा तय की — Navbharat Times

अब तक क्या पता है

दिल्ली हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ ने शिकायत अपीलीय समिति को सचदेवा की अपील पर तेजी से निर्णय लेने का निर्देश दिया। सचदेवा ने पहले यूट्यूब के शिकायत अधिकारी से वीडियो हटाने की मांग की थी, लेकिन वहां सामुदायिक दिशानिर्देशों के उल्लंघन का मामला नहीं पाया गया। इसके बाद 27 मार्च को शिकायत अपीलीय समिति के सामने अपील दायर की गई।

विवाद 21 मार्च 2026 को अपलोड किए गए वीडियो से जुड़ा है, जिसका शीर्षक था ‘क्या हिंदू बीफ खा सकते हैं? केरल स्टोरी 2 का पर्दाफाश’। वीडियो में हिंदू धर्मग्रंथों और खान-पान की आदतों पर चर्चा की गई है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि इसमें भगवान राम, माता सीता और भगवान कृष्ण के बारे में कथित बयान धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचाते हैं और धर्मग्रंथों को गलत तरीके से पेश करते हैं।

ध्रुव राठी के वीडियो विवाद पर अदालत की सुनवाई
वीडियो पर शिकायत और अपील के बाद मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा — AajTak

सचदेवा ने कहा कि दो महीने से अधिक समय बीतने के बावजूद समिति ने गूगल द्वारा वीडियो तुरंत हटाने से इनकार किए जाने के खिलाफ उनकी अपील पर फैसला नहीं किया था। इसी देरी के बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा। अदालत का निर्देश विवाद की सामग्री पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं है; यह अपील पर तय समय में समिति का फैसला कराने के लिए दिया गया आदेश है।

सुनवाई में केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कहा कि मध्यस्थ मंच को उचित सावधानी बरतनी चाहिए और नुकसान पहुंचाने वाली सामग्री को हटाना चाहिए। गूगल की ओर से पेश वकील ने बताया कि कंपनी याचिकाकर्ता को जवाब दे चुकी है और मामला शिकायत अपीलीय समिति के सामने लंबित है।

शिकायत अपीलीय समिति
वह समिति जिसके सामने किसी मंच के शिकायत निवारण फैसले के खिलाफ अपील की गई है।
मध्यस्थ मंच
वह डिजिटल मंच जिस पर उचित सावधानी बरतने की जिम्मेदारी का सवाल सुनवाई में उठा।

पक्ष क्या कह रहे हैं

अमिता सचदेवा का पक्ष है कि वीडियो अपमानजनक, भड़काऊ और सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील है। उन्होंने वीडियो हटाने की मांग के साथ दिल्ली पुलिस के साइबर प्रकोष्ठ में शिकायत भेजने और निचली अदालत में प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग करने की भी बात कही है।

केंद्र की ओर से चेतन शर्मा ने कहा कि ऐसी सामग्री को मंच नहीं मिलना चाहिए जो धार्मिक भावनाओं को आहत करे या समाज में विभाजन पैदा करे। दूसरी ओर, गूगल के वकील ने अदालत को बताया कि कंपनी अपना जवाब दे चुकी है और अपील पर निर्णय समिति को करना है। अदालत का आदेश फिलहाल इसी निर्णय प्रक्रिया को समयबद्ध करता है।

इसका आप पर क्या असर पड़ता है

भारत में इस मामले का सबसे सीधा असर डिजिटल सामग्री देखने और प्रकाशित करने वाले लोगों पर है। अदालत ने वीडियो हटाने का अंतिम आदेश नहीं दिया; इसलिए आरोप, सरकारी पक्ष और अदालत के वास्तविक निर्देश को अलग-अलग समझना जरूरी है। यह मामला दिखाता है कि मंच के शिकायत निवारण के बाद भी अपीलीय प्रक्रिया सक्रिय हो सकती है।

ध्रुव राठी के वीडियो पर विवाद से जुड़ी तस्वीर
अदालत ने हटाने पर अंतिम फैसला नहीं दिया, बल्कि अपील के निर्णय की समयसीमा तय की — Live Hindustan

धार्मिक विषयों पर सामग्री को लेकर शिकायत, मंचीय समीक्षा, अपील और न्यायिक हस्तक्षेप तक की प्रक्रिया बन सकती है। दर्शकों के लिए व्यावहारिक बात यह है कि 15 दिन पूरे होने से पहले वीडियो के हटने या बने रहने को अदालत का अंतिम फैसला मानना गलत होगा।

आगे क्या होगा

अब शिकायत अपीलीय समिति को हाईकोर्ट के आदेश की प्राप्ति से 15 दिनों के भीतर सचदेवा की अपील पर फैसला करना है और अदालत को इसकी सूचना देनी है। अगर शिकायत बनी रहती है, तो याचिकाकर्ता नई याचिका दायर कर सकती हैं। फिलहाल अगला पुष्ट कदम समिति का निर्णय है, न कि वीडियो हटने की निश्चित घोषणा।

एक नजर में

  • दिल्ली हाईकोर्ट ने समिति को 15 दिन में फैसला करने का निर्देश दिया।
  • विवाद 21 मार्च 2026 को अपलोड किए गए ध्रुव राठी के वीडियो से जुड़ा है।
  • याचिकाकर्ता अमिता सचदेवा ने धार्मिक भावनाएं आहत होने का आरोप लगाया है।
  • केंद्र ने मध्यस्थ मंच से अधिक सावधानी बरतने की दलील दी।
  • गूगल ने कहा कि उसने जवाब दे दिया है और अपील समिति के सामने लंबित है।
  • अदालत ने अभी वीडियो हटाने का अंतिम आदेश नहीं दिया है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या दिल्ली हाईकोर्ट ने ध्रुव राठी का वीडियो हटाने का आदेश दे दिया है?

नहीं। अदालत ने शिकायत अपीलीय समिति को वीडियो हटाने की मांग वाली अपील पर 15 दिनों में फैसला करने का निर्देश दिया है।

मामला किस वीडियो से जुड़ा है?

मामला 21 मार्च 2026 को अपलोड किए गए ‘क्या हिंदू बीफ खा सकते हैं? केरल स्टोरी 2 का पर्दाफाश’ शीर्षक वाले वीडियो से जुड़ा है।

याचिका किसने दायर की?

अधिवक्ता अमिता सचदेवा ने याचिका दायर की। उन्होंने वीडियो को अपमानजनक, भड़काऊ और धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला बताया है।

शिकायत अपीलीय समिति को कब तक फैसला करना है?

हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार, समिति को आदेश मिलने की तारीख से 15 दिनों के भीतर फैसला करना है।

फैसले के बाद क्या हो सकता है?

समिति अपना निर्णय देगी और अदालत को सूचना देगी। अगर याचिकाकर्ता की शिकायत बनी रहती है, तो नई याचिका दायर की जा सकती है।

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लेखक

Ahmed Sezer

वरिष्ठ संपादक

राजनीति, सरकार और सामान्य जनहित के विषयों में विशेषज्ञ।

यह लेख AI-सहायता प्राप्त संपादकीय टूल की मदद से तैयार किया गया और प्रकाशन से पहले Trend Digest के संपादकीय मानकों के तहत समीक्षा की गई।

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