पीएम किसान: सम्मान निधि और मान-धन से किसानों को सीधा सहारा
खेत में बुवाई का समय आते ही खर्चों की कतार लंबी हो जाती है—बीज, खाद, कीटनाशक, डीजल और मजदूरी। इसी दबाव के बीच पीएम किसान सम्मान निधि और प्रधानमंत्री किसान मान-धन योजना छोटे किसानों के लिए नकद मदद और बुजुर्गावस्था की सुरक्षा का रास्ता बन रही हैं। गुजरात के आंकड़े दिखाते हैं कि सीधे बैंक खाते में जाने वाली छोटी-छोटी किस्तें भी खेती की योजना बदल सकती हैं। साथ ही मान-धन योजना 60 साल के बाद मासिक पेंशन का भरोसा देती है।

घटनाक्रम कैसे आगे बढ़ा
पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत गुजरात में शुरुआत से अब तक 69.25 लाख से अधिक किसान परिवारों को 23,083 करोड़ रुपये से ज्यादा की सहायता सीधे बैंक खातों में भेजी गई है। यह भुगतान कुल 22 किस्तों में हुआ है।
राष्ट्रीय स्तर पर भी दायरा बड़ा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार देश के 11 करोड़ से अधिक किसानों को अब तक 4.27 लाख करोड़ रुपये से अधिक की सहायता दी जा चुकी है। किसान को हर साल 6,000 रुपये तीन किस्तों में मिलते हैं, यानी हर चार महीने में 2,000 रुपये।
गुजरात में पहली किस्त के समय 28.65 लाख से अधिक किसानों को 572.21 करोड़ रुपये दिए गए थे। हाल की 22वीं किस्त में राज्य के 50.54 लाख से अधिक किसान परिवारों को 1,010 करोड़ रुपये से ज्यादा राशि भेजी गई। यह फर्क बताता है कि योजना का कवरेज शुरुआती चरण से काफी फैल चुका है।
इसके साथ एक और योजना चर्चा में है—प्रधानमंत्री किसान मान-धन योजना। यह खासकर उन छोटे और सीमांत किसानों के लिए है जिनके पास कुल मिलाकर 2 हेक्टेयर या उससे कम कृषि योग्य भूमि है और जिनकी उम्र 18 से 40 वर्ष के बीच है।
बारीक बात क्या है
सम्मान निधि और मान-धन, दोनों योजनाओं की प्रकृति अलग है। सम्मान निधि खेती के मौसमी खर्चों में मदद देती है, जबकि मान-धन योजना बुजुर्गावस्था में नियमित आय का आधार बनाने की कोशिश करती है। यही वजह है कि एक योजना तुरंत नकदी प्रवाह से जुड़ती है और दूसरी लंबी अवधि की सुरक्षा से।

मान-धन योजना में किसान को उम्र के हिसाब से हर महीने 55 रुपये से 200 रुपये तक प्रीमियम देना होता है। जितनी रकम किसान जमा करता है, उतनी ही रकम केंद्र सरकार भी पेंशन फंड में डालती है। 60 साल की उम्र पूरी होने पर किसान को हर महीने 3,000 रुपये पेंशन मिलती है, यानी सालाना 36,000 रुपये।
अगर किसान की मृत्यु हो जाती है, तो जीवनसाथी को परिवार पेंशन के रूप में मासिक पेंशन का 50 प्रतिशत, यानी 1,500 रुपये मिलते हैं। यह रकम बड़ी आय नहीं है, लेकिन दवा, राशन और छोटे घरेलू खर्चों में सहारा बन सकती है, खासकर उन परिवारों में जहां खेती ही मुख्य आजीविका है।
प्रतिक्रिया क्या रही
गुजरात के कृषि मंत्री जीतूभाई वाघाणी ने कहा कि पीएम किसान सम्मान निधि योजना ने किसानों को आर्थिक सुरक्षा दी है और छोटे व सीमांत किसानों को बीज, उर्वरक जैसे खेती के जरूरी इनपुट के लिए मदद मिलती है। उनका बयान इसलिए अहम है क्योंकि योजना का असर सबसे ज्यादा बुवाई के मौसम में दिखाई देता है, जब किसान को नकद खर्च एक साथ करना पड़ता है।
पीएम किसान सम्मान निधि योजना ने धरतीपुत्रों को आर्थिक सुरक्षा कवच प्रदान किया है। इस सहायता के कारण छोटे और सीमांत किसानों को खेती में आवश्यक बीज, उर्वरक जैसे इनपुट के लिए आर्थिक मदद प्राप्त होती है।
गांधीनगर जिले के दशेला गांव के किसान गोविंदभाई पटेल ने बताया कि साल में तीन किस्तों से खाद, बीज और कीटनाशक खरीदने में समय पर मदद मिलती है। उनके मुताबिक इसी राशि से मूंगफली और कपास जैसी फसलों की बुवाई निश्चिंत होकर की जा पाती है।
सरकार की ओर से वर्ष में जो तीन किश्तें सीधे बैंक खाते में मिलती हैं, उससे हमें खेती के लिए खाद, बीज तथा कीटनाशक जैसी वस्तुएँ लेने में समय पर मदद मिल जाती है, इस राशि के कारण हम मूंगफली और कपास जैसी फसलों की बुवाई निश्चिंत होकर कर पाते हैं।
इसे व्यापक संदर्भ में समझें
खेती में नकदी की जरूरत सबसे ज्यादा तब होती है जब फसल अभी खेत में है और कमाई बाद में आएगी। ऐसे समय पर अगर किसान को बाजार या उधार पर निर्भर रहना पड़े, तो लागत बढ़ जाती है। सम्मान निधि की किस्त उसी अंतराल में थोड़ी राहत देती है।

सूत्र सामग्री के अनुसार, गुजरात में छोटे और मध्यम वर्ग के किसान समय पर बेहतर बीज खरीद सके हैं, जिससे भूमि की उत्पादकता और फसल स्वास्थ्य में सुधार दर्ज हुआ। योजना की शुरुआत में 2 हेक्टेयर तक की भूमि सीमा थी, जिसे बाद में समाप्त किया गया, जिससे सभी भूमिधारक किसानों को लाभ का रास्ता मिला।
भारत जैसे देश में, जहां खेती की लागत मौसम, ईंधन और इनपुट कीमतों से प्रभावित होती है, सीधे खाते में छोटी राशि भी किसान की निर्णय क्षमता बढ़ाती है। यह कोई पूरी आय का विकल्प नहीं है, लेकिन बुवाई से पहले की नकदी कमी को कम कर सकती है।
आगे क्या तय है
मान-धन योजना में पंजीकरण के लिए किसान नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर पर आधार कार्ड, जमीन के दस्तावेज और बैंक पासबुक के साथ आवेदन कर सकते हैं। स्रोत के अनुसार पंजीकरण मुफ्त कराया जा सकता है।
जो किसान पहले से पीएम किसान सम्मान निधि का लाभ ले रहे हैं, वे चाहें तो मान-धन योजना का प्रीमियम अपनी मिलने वाली किस्तों से कटवाने का विकल्प चुन सकते हैं। सम्मान निधि में पारदर्शिता के लिए 12वीं किस्त से भूमि रिकॉर्ड सत्यापन, 13वीं किस्त से आधार सीडिंग और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण, तथा 15वीं किस्त से ई-केवाईसी अनिवार्य की गई है।
लोग यह भी पूछते हैं
पीएम किसान सम्मान निधि में किसान को कितने रुपये मिलते हैं?
इस योजना में पात्र किसानों को हर साल 6,000 रुपये मिलते हैं। राशि तीन किस्तों में सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है।
गुजरात में पीएम किसान योजना से कितने किसानों को लाभ मिला?
गुजरात में शुरुआत से अब तक 69.25 लाख से अधिक किसान परिवारों को लाभ मिला है। कुल सहायता राशि 23,083 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है।
प्रधानमंत्री किसान मान-धन योजना में पेंशन कितनी है?
मान-धन योजना में 60 साल की उम्र पूरी होने पर किसान को हर महीने 3,000 रुपये पेंशन मिलती है। सालाना यह राशि 36,000 रुपये होती है।
मान-धन योजना में कौन आवेदन कर सकता है?
यह योजना उन छोटे और सीमांत किसानों के लिए है जिनके पास कुल मिलाकर 2 हेक्टेयर या उससे कम कृषि योग्य भूमि है। आवेदन के लिए उम्र 18 से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
मान-धन योजना का प्रीमियम कितना है?
किसान की उम्र के आधार पर मासिक प्रीमियम 55 रुपये से 200 रुपये तक है। जितना योगदान किसान करता है, उतनी ही राशि केंद्र सरकार भी पेंशन फंड में जमा करती है।
पीएम किसान में ई-केवाईसी क्यों जरूरी है?
ई-केवाईसी से लाभार्थी की पहचान डिजिटल रूप से सत्यापित होती है। स्रोतों के अनुसार 15वीं किस्त से इसे अनिवार्य किया गया, ताकि लाभ वास्तविक किसानों तक पहुंचे।
संसाधन
इस लेख में उद्धृत स्रोत और संदर्भ।
