फसल बीमा 2026: खरीफ पंजीकरण की अंतिम तारीख 31 जुलाई

खरीफ फसल बीमा के लिए किसान 31 जुलाई 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। नुकसान होने पर 72 घंटे में सूचना देना जरूरी है।

फसल बीमा 2026: 31 जुलाई तक आवेदन, जानें पूरी प्रक्रिया
अंतिम अपडेटJul 16, 2026, 6:29:13 AM
1 घंटा पहले
📢विज्ञापन

फसल बीमा 2026: खरीफ पंजीकरण की अंतिम तारीख 31 जुलाई

31 जुलाई 2026 खरीफ फसलों का बीमा कराने की अंतिम तारीख है। प्राकृतिक आपदा से फसल खराब होने पर किसान को नुकसान की सूचना 72 घंटे के भीतर देनी होगी, जबकि सामान्य खरीफ फसलों के लिए किसान का प्रीमियम बीमित राशि का केवल 2 प्रतिशत रखा गया है। भारी बारिश, सूखा, ओलावृष्टि, जलभराव और कीट प्रकोप जैसे जोखिमों के बीच यह समयसीमा किसानों के लिए सीधे आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी है।

खेत में खड़ी फसल और किसान
खरीफ फसलों के बीमा के लिए आवेदन 31 जुलाई तक किया जा सकता है — mint हिन्दी

मुख्य बातें

  • खरीफ 2026 के लिए फसल बीमा पंजीकरण की अंतिम तारीख 31 जुलाई है।
  • ऋणी, गैर-ऋणी, भू-धारक और बटाईदार किसान योजना में स्वेच्छा से शामिल हो सकते हैं।
  • धान, मक्का, सोयाबीन, अरहर, मूंगफली, मूंग, उड़द, कोदो, कुटकी और रागी सहित अधिसूचित फसलों का बीमा कराया जा सकता है।
  • फसल नुकसान की जानकारी 72 घंटे के भीतर बीमा कंपनी, बैंक या संबंधित विभाग को देनी होगी।
  • कटाई के बाद खेत में सुखाने के लिए रखी उपज को भी कुछ परिस्थितियों में अगले 14 दिनों तक सुरक्षा मिल सकती है।

पूरी प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ेगी

खरीफ की बुवाई शुरू होने के साथ कई राज्यों में बीमा पंजीकरण भी खोला गया है। छत्तीसगढ़ में प्रक्रिया 12 जुलाई से शुरू हुई और किसानों को अंतिम तारीख का इंतजार न करने की सलाह दी गई है। योजना अधिसूचित क्षेत्र में बोई गई अधिसूचित फसल पर लागू होती है, इसलिए किसान को आवेदन से पहले अपने गांव और फसल की पात्रता की पुष्टि करनी चाहिए।

आवेदन के लिए आधार कार्ड, जमीन का अभिलेख, बैंक पासबुक, बोई गई फसल का विवरण और बुवाई प्रमाण पत्र मांगा जा सकता है। किसान आवेदन की बताई गई प्रक्रिया के अनुसार सरकारी फसल बीमा पोर्टल पर पंजीकरण कर सकते हैं। बैंक, लोक सेवा केंद्र, अधिकृत बीमा कंपनी और कृषि विभाग के माध्यम से भी आवेदन की सुविधा उपलब्ध है।

खरीफ फसल की देखभाल करता किसान
धान, मक्का, सोयाबीन और कई दलहनी व मोटे अनाज बीमा के दायरे में हैं — Tractor Junction

सामान्य खरीफ फसलों के लिए किसान का प्रीमियम बीमित राशि का 2 प्रतिशत बताया गया है। जशपुर में उदाहरण के तौर पर सिंचित धान के लिए 1,100 रुपये, असिंचित धान के लिए 860 रुपये, मक्का के लिए 700 रुपये और अरहर के लिए 600 रुपये निर्धारित किए गए हैं। ये रकम स्थानीय अधिसूचना और बीमित राशि के आधार पर अलग हो सकती है, इसलिए आवेदन करते समय संबंधित क्षेत्र की दर देखना जरूरी है।

बीमा केवल तैयार फसल के पूरी तरह नष्ट होने तक सीमित नहीं है। खराब मौसम के कारण बुवाई न हो पाने, रोपण विफल होने, ओलावृष्टि, बादल फटने, जलभराव और भूस्खलन जैसी स्थानीय आपदाओं से हुए नुकसान को भी शामिल किया गया है। कटाई के बाद खेत में रखी उपज पर चक्रवात या बेमौसम बारिश का असर पड़े, तो निर्धारित शर्तों के तहत दावा किया जा सकता है।

किसानों के लिए इसका अर्थ

बीमा का असली महत्व नुकसान के बाद दिखाई देता है। संयुक्त राष्ट्र समाचार में प्रकाशित विवरण के अनुसार, छत्तीसगढ़ की लक्ष्मी राठिया ने 2023 में अत्यधिक बारिश से हुए नुकसान के बाद 6,000 रुपये के प्रीमियम पर 97,956 रुपये की दावा राशि प्राप्त की। उत्तराखंड के मोहन सिंह राणा को भी 2023 में वन्यजीवों से सेब की फसल खराब होने के बाद बीमा भुगतान मिला, जिससे उन्हें गांव छोड़कर काम खोजने की जरूरत नहीं पड़ी।

दूरदराज क्षेत्र में फसल के साथ किसान
दूरदराज क्षेत्रों में बीमा भुगतान किसानों को दोबारा खेती शुरू करने में मदद कर रहा है — UN News

दूरदराज इलाकों में योजना की पहुंच से जुड़े आंकड़े इसका व्यापक दायरा दिखाते हैं। वर्ष 2016 से अब तक 93 करोड़ से अधिक किसान आवेदनों का बीमा किया गया, 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक के दावों का निपटारा हुआ और 12.43 करोड़ किसानों को सहायता मिली। योजना 25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 1.70 लाख से अधिक बैंक शाखाओं तथा लगभग 6 लाख वितरण केंद्रों के माध्यम से चल रही है।

इसके बावजूद पंजीकरण और वास्तविक दावों के बीच अंतर बना हुआ है। अमरोहा में 1,93,982 पंजीकृत किसानों के मुकाबले 2023-24 के खरीफ मौसम में केवल 2,519 किसानों ने बीमा कराया था। इससे स्पष्ट होता है कि केवल योजना उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं है; समय पर पंजीकरण, सही फसल विवरण और नुकसान की तत्काल सूचना भी उतनी ही जरूरी है।

अब क्या करना है

किसान को पहले यह जांचना चाहिए कि उसकी फसल और क्षेत्र अधिसूचित हैं या नहीं। इसके बाद आवश्यक दस्तावेज लेकर 31 जुलाई से पहले आवेदन पूरा करें। कृषि ऋण वाले किसानों को बैंक से पुष्टि करनी चाहिए कि बीमा पंजीकरण वास्तव में दर्ज हुआ है।

फसल खराब होने पर इंतजार न करें। नुकसान के 72 घंटे के भीतर बीमा कंपनी, कृषि विभाग, राजस्व विभाग या बैंक को सूचना दें। सहायता के लिए सरकारी निःशुल्क दूरभाष संख्या 14447 पर भी संपर्क किया जा सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

फसल बीमा 2026 की अंतिम तारीख क्या है?

खरीफ 2026 की अधिसूचित फसलों के बीमा के लिए अंतिम तारीख 31 जुलाई 2026 बताई गई है। किसानों को दस्तावेज या भुगतान संबंधी समस्या से बचने के लिए पहले आवेदन करने की सलाह दी गई है।

फसल खराब होने के कितने समय में सूचना देनी होगी?

प्राकृतिक आपदा या स्थानीय नुकसान की सूचना 72 घंटे के भीतर देनी होगी। देर होने पर दावा प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

फसल बीमा के लिए कौन आवेदन कर सकता है?

ऋणी, गैर-ऋणी, भू-धारक और बटाईदार किसान आवेदन कर सकते हैं। किसान की फसल और क्षेत्र का सरकारी अधिसूचना में शामिल होना जरूरी है।

आवेदन के लिए कौन से दस्तावेज चाहिए?

आधार कार्ड, जमीन का अभिलेख, बैंक पासबुक, फसल का विवरण और बुवाई प्रमाण पत्र मांगे जा सकते हैं। बैंक खाता आधार से जुड़ा होना चाहिए।

किन फसलों का बीमा कराया जा सकता है?

धान, मक्का, सोयाबीन, अरहर, मूंगफली, मूंग, उड़द, कोदो, कुटकी और रागी सहित अधिसूचित खरीफ फसलें शामिल हैं। सही सूची क्षेत्र के अनुसार अलग हो सकती है।

क्या कटाई के बाद भी बीमा सुरक्षा मिलती है?

खेत में सुखाने के लिए रखी कटी फसल को चक्रवात या बेमौसम बारिश से नुकसान होने पर निर्धारित शर्तों के तहत 14 दिनों तक सुरक्षा मिल सकती है। किसान को समय सीमा में नुकसान की सूचना देनी होगी।

Ahmed Sezer profile photo

लेखक

Ahmed Sezer

वरिष्ठ संपादक

राजनीति, सरकार और सामान्य जनहित के विषयों में विशेषज्ञ।

यह लेख AI-सहायता प्राप्त संपादकीय टूल की मदद से तैयार किया गया और प्रकाशन से पहले Trend Digest के संपादकीय मानकों के तहत समीक्षा की गई।

हमारी कार्यप्रणाली के बारे में जानें
राजनीतिसार्वजनिक नीतिसामान्य ट्रेंड

📚संसाधन

इस लेख में उद्धृत स्रोत और संदर्भ।