बिहार सरकार का बड़ा फैसला: सरकारी कर्मचारी अब दे सकेंगे केवल एक बार परीक्षा

बिहार के नगर विकास विभाग ने सरकारी कर्मचारियों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठने के मौके सीमित कर दिए हैं। अब सेवा में रहते हुए केवल एक अतिरिक्त अवसर मिलेगा, जिसे लेकर राज्य में राजनीतिक और प्रशासनिक बवाल शुरू हो गया है।

बिहार सरकारी कर्मचारी परीक्षा नियम 2026: केवल 1 प्रयास मान्य
Last UpdateApr 7, 2026, 5:10:59 PM
ago
📢Advertisement

बिहार में सरकारी कर्मचारियों के लिए नया फरमान: अब करियर की ऊंची उड़ान पर लगी 'एक बार' की बंदिश

पटना के गलियारों में आज सन्नाटा कम और फुसफुसाहटें ज्यादा हैं। सचिवालय की कैंटीन हो या चाय की टपरी, हर जगह एक ही सवाल तैर रहा है—क्या अब अपनी ही मेहनत से आगे बढ़ने का रास्ता बंद हो गया है? बिहार सरकार के एक नए आदेश ने राज्य के हजारों सरकारी कर्मचारियों की रातों की नींद उड़ा दी है, जो सेवा में रहते हुए और ऊंचे पदों पर जाने का सपना देख रहे थे।

बिहार सरकार का नया नियम
नीतीश सरकार के नए फैसले ने कर्मचारियों के बीच हलचल पैदा कर दी है।

ऐसे बदला सरकारी नौकरी का समीकरण

बिहार सरकार के नगर विकास एवं आवास विभाग ने एक ऐसा निर्देश जारी किया है जो कर्मचारियों के करियर की दिशा बदल सकता है। अब विभाग में कार्यरत पदाधिकारी और कर्मचारी अपने सेवाकाल के दौरान प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठने के लिए केवल एक अतिरिक्त अवसर का लाभ उठा सकेंगे। हाथ कंगन को आरसी क्या, सरकारी फाइलों में दर्ज यह नया नियम साफ कहता है कि अगर आप पहले से नौकरी में हैं, तो अब बार-बार परीक्षा देकर पदोन्नति या नई सेवा में जाने का मौका नहीं मिलेगा।

यह आदेश विशेष रूप से उन लोगों को प्रभावित करता है जो बीपीएससी (BPSC) जैसी परीक्षाओं के जरिए अपने कैडर को सुधारना चाहते थे। विभाग का मानना है कि कर्मचारी परीक्षा की तैयारी में इतना उलझ जाते हैं कि दफ्तर का काम प्रभावित होने लगता है। वहीं, कर्मचारियों का तर्क है कि यह उनके मौलिक अधिकारों और आगे बढ़ने की इच्छाशक्ति पर प्रहार है।

नियम की बारीकियां और पेच

इस फैसले की गहराई में जाएं तो पता चलता है कि सरकार प्रशासन में स्थिरता लाना चाहती है। अक्सर देखा गया है कि छोटे पदों पर तैनात कर्मचारी लगातार बड़ी परीक्षाओं की तैयारी करते रहते हैं, जिससे विभाग में मैनपावर की कमी बनी रहती है।

बिहार कर्मचारी परीक्षा नियम
सरकारी सेवा में रहते हुए अब प्रतियोगी परीक्षाओं के मौके सीमित कर दिए गए हैं।
लेकिन यहाँ एक तकनीकी पेंच भी है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह एक मौका केवल उन्हीं के लिए है जो पहले से ही सरकारी सेवा का हिस्सा हैं। अगर कोई कर्मचारी इस्तीफा देकर परीक्षा देना चाहता है, तो उस पर यह पाबंदी नहीं होगी, लेकिन यह किसी के लिए भी एक बड़ा जोखिम भरा कदम है।

सेवाकाल (Service Period)
वह समय जब तक कोई व्यक्ति आधिकारिक रूप से सरकारी पद पर नियुक्त रहता है।
प्रतियोगी परीक्षा (Competitive Exam)
पद के चयन के लिए आयोजित की जाने वाली सार्वजनिक परीक्षा, जैसे BPSC या SSC।

विपक्ष का हमला और विशेषज्ञों की राय

राजनीतिक गलियारों में भी इस फैसले ने आग लगा दी है। विपक्षी नेताओं ने इसे 'तुगलकी फरमान' करार दिया है। कांग्रेस और अन्य दलों का कहना है कि विजय सिन्हा के विभाग से निकले इस आदेश ने युवाओं के उत्साह को कम कर दिया है। राजनीति अपनी जगह है, लेकिन प्रशासनिक विशेषज्ञ इसे कार्यक्षमता बढ़ाने का एक कड़ा कदम मान रहे हैं।

अगर किसी को बड़ा अधिकारी बनना है, तो उसे अपनी वर्तमान जिम्मेदारियों और भविष्य की तैयारी के बीच संतुलन बनाना होगा या फिर इस्तीफा देकर पूर्ण रूप से तैयारी करनी होगी।

सरकारी सूत्र, नगर विकास एवं आवास विभाग

दूरगामी परिणाम और जमीनी हकीकत

इस फैसले का सीधा असर बिहार के हजारों कर्मचारियों पर पड़ेगा। नाच न जाने आंगन टेढ़ा वाली स्थिति उन अभ्यर्थियों के लिए हो गई है जो सोचते थे कि नौकरी लगने के बाद वे सुरक्षित होकर बड़ी परीक्षाओं की तैयारी करेंगे।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार
बिहार की राजनीति में इस प्रशासनिक फैसले पर बहस छिड़ गई है।
अब उनके पास केवल 'करो या मरो' की स्थिति है। क्या एक ही प्रयास में सफलता मिलेगी? यह सवाल अब हर सरकारी कर्मचारी के मन में कौंध रहा है।

आगे क्या होगा?

फिलहाल यह नियम नगर विकास विभाग में लागू दिख रहा है, लेकिन चर्चा है कि इसे जल्द ही अन्य विभागों में भी विस्तार दिया जा सकता है। विस्तृत सरकारी गाइडलाइंस का इंतजार है। आने वाले दिनों में कर्मचारी यूनियनें इस फैसले के खिलाफ सड़कों पर उतर सकती हैं या कानूनी रास्ता अपना सकती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

  • क्या यह नियम सभी सरकारी कर्मचारियों पर लागू है? फिलहाल यह आदेश नगर विकास एवं आवास विभाग के पदाधिकारियों और कर्मियों के लिए स्पष्ट किया गया है, लेकिन अन्य विभागों में भी इसके लागू होने की संभावना है।
  • एक सरकारी कर्मचारी कुल कितने बार परीक्षा दे सकता है? नए नियम के अनुसार, सेवा में आने के बाद कर्मचारी को केवल एक ही अतिरिक्त अवसर (Attempt) मिलेगा।
  • क्या इस्तीफा देने के बाद फिर से परीक्षा दी जा सकती है? हाँ, यदि कर्मचारी पद से इस्तीफा दे देता है, तो वह सामान्य अभ्यर्थी की तरह परीक्षा में बैठ सकता है, लेकिन सरकारी सेवा के लाभ समाप्त हो जाएंगे।
  • इस फैसले का मुख्य कारण क्या बताया जा रहा है? सरकार का उद्देश्य प्रशासनिक कार्यों में निरंतरता बनाए रखना और कर्मचारियों का ध्यान पूरी तरह से उनके वर्तमान कार्य पर केंद्रित करना है।
  • क्या पुराने प्रयासों को भी इसमें गिना जाएगा? इस पर अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन आमतौर पर नए नियम भविष्य की परीक्षाओं के लिए लागू होते हैं।
Ahmed Sezer profile photo

लेखक

अहमद सेज़र

वरिष्ठ संपादक

राजनीति, सरकार और सामान्य जनहित के विषयों में विशेषज्ञ।

राजनीतिसार्वजनिक नीतिसामान्य ट्रेंड

📚संसाधन

इस लेख में उद्धृत स्रोत और संदर्भ।