लखनऊ अग्निकांड: अलीगंज की अवैध बिल्डिंग में 15 युवाओं की मौत, मालिक समेत 4 गिरफ्तार
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज स्थित पुरनिया इलाके में सोमवार दोपहर एक तीन मंजिला व्यावसायिक इमारत में भीषण आग लग गई, जिसने 15 युवाओं की जिंदगी छीन ली। इस दिल दहला देने वाले हादसे के समय पूरी बिल्डिंग में 25 से अधिक छात्र और डिजिटल पेशेवर मौजूद थे, जो आग और घने धुएं के कारण अंदर ही फंस गए। उत्तर प्रदेश सरकार ने घटना की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सभी आधिकारिक कार्यक्रम रद्द कर दिए हैं।

अब तक की बड़ी कार्रवाई और खुलासे
इस दर्दनाक हादसे के बाद पुलिस और प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए छह नामजद आरोपियों में से चार को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार किए गए लोगों में मुख्य आरोपी और बिल्डिंग मालिक वीरेंद्र शुक्ला शामिल हैं, जो रामेश्वरम इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के मालिक भी हैं। उनके अलावा 'हेक्सार स्टूडियो' नामक एनिमेशन ट्रेनिंग सेंटर के फाउंडर तुषांक कृष्णा जैसवाल, स्टूडियो मैनेजर रामकृष्ण उपाध्याय और सुरेश कुमार शाहु को पुलिस ने हिरासत में लिया है। सभी आरोपियों के खिलाफ थाना अलीगंज में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं और उत्तर प्रदेश अग्निशमन सेवा अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। इसके अलावा, प्रशासनिक लापरवाही के आरोप में चार अधिकारियों को भी तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
इमारत के इतिहास को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा भी सामने आया है। अलीगंज योजना के सेक्टर-डी स्थित इस भवन (संख्या एमएस/102/डी) को साल 2014 में आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत किया गया था। लेकिन साल 2016 में लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने इसमें अवैध निर्माण को लेकर मुकदमा दर्ज कराया था। हैरानी की बात यह है कि 10 मई 2016 को इस भवन को ध्वस्त करने का आदेश जारी हुआ था, जिसे बाद में भवन स्वामियों की आपत्ति के बाद 5 जुलाई 2016 को निरस्त कर दिया गया। तब से इस आवासीय नक्शे वाली बिल्डिंग में धड़ल्ले से कमर्शियल गतिविधियां संचालित हो रही थीं।
प्राथमिक जांच में सामने आया है कि आग लगने की मुख्य वजह बेसमेंट में लगे एयर कंडीशनर (AC) में हुआ शॉर्ट सर्किट था। आग लगते ही बिजली कट गई, जिसके कारण स्टूडियो का मुख्य बायोमेट्रिक गेट ऑटोमैटिक लॉक हो गया। अंगूठे के निशान (थंब इम्प्रेशन) से खुलने वाले इस दरवाजे के बंद होने से अंदर मौजूद युवाओं को बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिला। सीढ़ियों का रास्ता बेहद संकरा था और पूरी तीन मंजिला इमारत में कोई भी इमरजेंसी एग्जिट (आपातकालीन निकास मार्ग) नहीं था।

चश्मदीदों और पीड़ितों की आपबीती
हादसे में सुरक्षित बची और पिछले पांच महीनों से 'हेक्सार स्टूडियो' में काम कर रही दिल्ली की लवप्रीत ने रोते हुए प्रशासनिक देरी पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि आग लगने के बाद अंदर चीख-पुकार मच गई थी और कोई मदद के लिए मौजूद नहीं था। लोग लगातार फोन मिलाते रहे, लेकिन समय पर कोई प्रशासनिक सहायता नहीं पहुंची।
स्थानीय चश्मदीद ओम प्रकाश ने बताया कि दमकल की गाड़ियां हादसे के करीब आधे घंटे बाद मौके पर पहुंचीं। तब तक अंदर फंसे युवाओं ने जान बचाने के लिए पत्थरों से खिड़कियों के कांच तोड़ दिए थे। शीशे टूटने के बाद कई युवक-युवतियां छज्जों से नीचे कूदने लगे। वीडियो में लोग रस्सियों और तारों के सहारे लटककर नीचे आते दिखे। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान जब मुख्य रास्ते से अंदर जाना असंभव हो गया, तो दमकलकर्मियों ने बगल के मकान की दीवार तोड़ी। इसी रास्ते से तीन घंटे की मशक्कत के बाद घायलों और शवों को बाहर निकाला जा सका। इस हादसे में अपनी जान गंवाने वाले 15 युवाओं की उम्र 20 से 24 साल के बीच है, जिनमें अब्दुल रहमान, मोहम्मद अम्मार, अनामिका, आदित्य श्रीवास्तव, जैनिल चक्रवर्ती, ज्योति, नीलेश, सागर, संयम, शहजान, सौमाल्या, सुखमणि, अनुक्षा, भविष्य और सूरज शामिल हैं।
इस त्रासदी का व्यापक असर
इस भयानक हादसे ने देश के प्रमुख शहरों में व्यावसायिक इमारतों की सुरक्षा और उनके नियमों के उल्लंघन की पोल खोल दी है। लखनऊ का पुरनिया क्षेत्र एक बड़ा एजुकेशनल और डिजिटल हब है, जहां रोजाना हजारों छात्र पढ़ने और प्रशिक्षण के लिए आते हैं। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों और छात्रों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भारी आक्रोश है। शाहजहांपुर में जिला युवा कांग्रेस ने इस घटना के विरोध में और मृतक छात्रों को श्रद्धांजलि देने के लिए शहीद स्तंभ तक एक कैंडल मार्च भी निकाला।

पीड़ित परिवारों की मदद के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने मृतकों के आश्रितों को 5-5 लाख रुपये और गंभीर रूप से घायलों को 50,000 रुपये की तत्काल आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने भी प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये का मुआवजा देने का ऐलान किया है। लखनऊ के सांसद और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी मुख्यमंत्री से फोन पर बात कर राहत कार्यों की विस्तृत जानकारी ली है।
आगामी घटनाक्रम और जांच
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित दो सदस्यीय एसआईटी (SIT) ने अपनी जांच शुरू कर दी है। इस समिति में अपर मुख्य सचिव (पर्यटन) अमृत अभिजात और एडीजी (लखनऊ जोन) प्रवीण कुमार शामिल हैं। एसआईटी को आग लगने के कारणों, भवन के सुरक्षा मानकों, वैधानिक स्वीकृतियों और अधिकारियों की लापरवाही की जांच कर 7 दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट शासन को सौंपनी है। मुख्यमंत्री ने साफ किया है कि इस हादसे के लिए जिम्मेदार किसी भी व्यक्ति या संस्था को बख्शा नहीं जाएगा।
एक नजर में मुख्य तथ्य
- लखनऊ के अलीगंज स्थित तीन मंजिला व्यावसायिक भवन में भीषण आग से 15 लोगों की मौत और कई अन्य घायल।
- भवन के ग्राउंड फ्लोर पर पेट शॉप और ऊपरी मंजिलों पर 3D गेमिंग व एनिमेशन स्टूडियो 'हेक्सार स्टूडियो' संचालित था।
- शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगी; बायोमेट्रिक गेट लॉक होने और इमरजेंसी एग्जिट न होने से बढ़ी त्रासदी।
- बिल्डिंग मालिक वीरेंद्र शुक्ला और स्टूडियो फाउंडर तुषांक कृष्णा सहित 4 आरोपी गिरफ्तार, 4 सरकारी अफसर सस्पेंड।
- एसआईटी (SIT) को घटना के सभी पहलुओं की जांच कर 7 दिन में रिपोर्ट देने का आदेश।
- केंद्र सरकार द्वारा 2 लाख और राज्य सरकार द्वारा 5 लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
अलीगंज की इस बिल्डिंग में आग किस वजह से लगी थी?
शुरुआती जांच और दस्तावेजों के अनुसार, इस तीन मंजिला इमारत के बेसमेंट में लगे एयर कंडीशनर (AC) में शॉर्ट सर्किट होने के कारण आग लगी, जिसने देखते ही देखते पूरी बिल्डिंग को अपनी चपेट में ले लिया।
इतनी बड़ी संख्या में मौतें होने का मुख्य कारण क्या रहा?
इमारत में एंट्री और एग्जिट के लिए केवल एक ही संकरा रास्ता था और कोई आपातकालीन निकास (इमरजेंसी एग्जिट) नहीं था। इसके अलावा, आग लगते ही बिजली कटने से मुख्य बायोमेट्रिक दरवाजा ऑटोमैटिक लॉक हो गया, जिससे लोग अंदर ही फंस गए और दम घुटने से मौतें हुईं।
हादसे के जिम्मेदार लोगों पर प्रशासन ने क्या कार्रवाई की है?
पुलिस ने बिल्डिंग मालिक वीरेंद्र शुक्ला, एनिमेशन स्टूडियो के फाउंडर तुषांक कृष्णा जैसवाल, मैनेजर रामकृष्ण उपाध्याय और सुरेश कुमार शाहु को गिरफ्तार कर लिया है। साथ ही लापरवाही बरतने वाले चार अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया है।
घायलों का इलाज कहाँ चल रहा है और उनकी क्या स्थिति है?
हादसे में घायल हुए सभी 9 लोगों को किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है, जहाँ वरिष्ठ डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज किया जा रहा है।
इस मामले की जांच रिपोर्ट कब तक सामने आएगी?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश पर गठित दो सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) को घटना की गहन जांच कर सात दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट शासन को सौंपने का निर्देश दिया गया है।
संसाधन
इस लेख में उद्धृत स्रोत और संदर्भ।
