लखनऊ अग्निकांड आज: अलीगंज हादसे में 15 मौतों के बाद जांच का महाअभियान, कानपुर और प्रयागराज में 100 से अधिक कोचिंग सेंटर सील

लखनऊ के अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड में 15 लोगों की मौत के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने पूरे राज्य में अवैध और असुरक्षित कोचिंग सेंटरों के खिलाफ महाअभियान शुरू किया है। कानपुर, प्रयागराज और वाराणसी में बड़े पैमाने पर सीलिंग की कार्रवाई की गई है, जबकि जांच के दौरान प्रशासनिक लापरवाही और जवाबदेही से बचने की तस्वीरें भी सामने आई हैं।

लखनऊ अग्निकांड: अलीगंज हादसे के बाद यूपी में कोचिंग सेंटर सील
अंतिम अपडेटJun 24, 2026, 11:56:23 PM
1 सप्ताह पहले
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लखनऊ के अलीगंज में सोमवार दोपहर को उषा मेहता मार्ग पर स्थित एक तीन मंजिला व्यावसायिक इमारत अचानक धुएं के काले गुबार और चीख-पुकार के बीच घिर गई। ऊपरी मंजिल पर चल रहे एक एनीमेशन ट्रेनिंग सेंटर में मौजूद छात्र जान बचाने के लिए भागने लगे, लेकिन जहरीली गैसों ने उन्हें संभलने का मौका भी नहीं दिया। इस भीषण हादसे में कुल 15 लोगों की जान चली गई, जिनमें अधिकांश पढ़ाई करने आए छात्र थे। डॉक्टरों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि इन सभी मासूमों की मौत आग की लपटों से जलने के कारण नहीं, बल्कि बंद कमरों में दम घुटने (एस्फिक्सिया) से हुई है। इस हृदयविदारक घटना ने अब पूरे उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक महकमे में खलबली मचा दी है और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देश पर राज्यभर के कोचिंग संस्थानों के खिलाफ एक व्यापक महाअभियान शुरू हो गया है।

लखनऊ अलीगंज अग्निकांड घटनास्थल
हादसे के बाद राहत कार्य में जुटी टीमें — AajTak

ऐसे बदतर होते चले गए हालात

सोमवार को हुए इस हादसे के बाद जब जांच शुरू हुई, तो प्रशासनिक स्तर पर एक के बाद एक कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। विशेष रूप से विद्युत लोड को लेकर बिजली विभाग की भारी लापरवाही उजागर हुई है। विशेष जांच दल (SIT) की पड़ताल में यह तथ्य सामने आया है कि इस इमारत के उपभोक्ता वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला के कनेक्शन का लोड स्वीकृत क्षमता से कहीं अधिक था। वर्ष 2025 में ही डालीगंज खंड के तत्कालीन अधिशासी अभियंता (एक्सईएन) सुशील कुमार के कार्यकाल के दौरान सामान्य मौसम में भी लोड लगातार बढ़ा रहा। सितंबर 2025 में लोड 25.2 किलोवाट, अक्टूबर में 24.3 किलोवाट और नवंबर में 21.6 किलोवाट दर्ज किया गया था, जबकि स्वीकृत लोड महज 20 किलोवाट था। इसके बावजूद उपभोक्ता को कोई नोटिस जारी नहीं किया गया और न ही इसकी जानकारी किसी वरिष्ठ अफसर को दी गई। वर्तमान में सुशील कुमार 33 केवी के पद पर तैनात हैं और अब वे पूरी तरह एसआईटी जांच के घेरे में आ चुके हैं।

दूसरी ओर, अग्निशमन विभाग में भी आंतरिक कलह और जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने का दौर शुरू हो गया। घटना के सिलसिले में निलंबित किए गए दमकल केंद्र (द्वितीय) अधिकारी कमलेश कुमार सिंह ने पहले मुख्यमंत्री को संबोधित एक वीडियो जारी कर मुख्य अग्निशमन अधिकारी (सीएफओ) को जिम्मेदार ठहराया था। हालांकि, बुधवार को एक और वीडियो जारी कर उन्होंने अपने आरोप वापस ले लिए और सार्वजनिक माफी मांगते हुए कहा कि उन्हें गुमराह करके वह वीडियो रिकॉर्ड कराया गया था। सरकार ने इस मामले में लापरवाही के आरोप में सिंह सहित चार अधिकारियों को निलंबित किया है और अब तक चार गिरफ्तारियां की जा चुकी हैं।

प्रशासनिक तंत्र की जमीनी हकीकत

हादसे के बाद जब लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA), फायर और बिजली विभाग की संयुक्त टीमें अलीगंज में घटनास्थल से महज 400 मीटर दूर बने बेसमेंट कॉम्प्लेक्सों की जांच करने पहुंचीं, तो वहां जवाबदेही का भारी अभाव दिखा। मीडियाकर्मियों द्वारा नियमित जांच न होने के विषय में सवाल पूछे जाने पर अधिकारी और कर्मचारी कैमरों के सामने बोलने से कतराते रहे। कोई खुद को 'छोटा कर्मचारी' बताकर पल्ला झाड़ता दिखा तो कोई 'बयान देने के लिए अधिकृत न होने' की बात कहकर दुकानों के भीतर छिप गया। बिजली विभाग के कर्मचारियों ने रूटीन प्रोसेस का तर्क देते हुए कहा कि ओवरलोडिंग मिलने पर नोटिस जारी करने की प्रक्रिया में ही 3 से 4 महीने का समय लग जाता है। जमीनी निरीक्षण में यह स्पष्ट रूप से दिखाई दिया कि पूर्व में हुए चारबाग और लवाना जैसे बड़े हादसों से जिम्मेदार तंत्र ने कोई सबक नहीं लिया है और कार्रवाई केवल तात्कालिक निर्देशों तक ही सीमित दिखाई देती है।

प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा बेसमेंट की जांच
अलीगंज में बेसमेंट कॉम्प्लेक्स की जांच करती संयुक्त टीम — AajTak

क्या कह रहे हैं जिम्मेदार और डॉक्टर

पोस्टमार्टम प्रक्रिया से जुड़े डॉक्टरों की टीम ने स्पष्ट किया है कि मृतकों के शरीर पर गहरी बाहरी चोट या गंभीर जलन के निशान नहीं थे। नाक के भीतर कालिख और धुएं के कण जमा होने के कारण फेफड़ों तक ऑक्सीजन नहीं पहुंच सकी। प्लास्टिक और सिंथेटिक सामानों के जलने से निकली कार्बन मोनोऑक्साइड गैस ने बंद कमरों में बैठे छात्रों को संभलने का मौका ही नहीं दिया और वे बेहोश हो गए।

इस बीच, मुख्यमंत्री के कड़े रुख के बाद पूरे राज्य में जिला प्रशासन सक्रिय हुआ है। प्रयागराज के मुख्य अग्निशमन अधिकारी चंद्र मोहन शर्मा ने बताया कि नगर के 97 पंजीकृत संस्थानों में से केवल 15 कोचिंग संस्थानों के पास ही वैध एनओसी उपलब्ध थी। इसी के मद्देनजर फायर विभाग ने तत्काल 10 विशेष टीमों का गठन किया है जो लगातार हर ब्लॉक और मोहल्ले में चल रहे केंद्रों की पड़ताल कर रही हैं।

पूरे राज्य में पसर गया सन्नाटा

इस हादसे का सबसे बड़ा असर उत्तर प्रदेश के प्रमुख शैक्षणिक केंद्रों पर पड़ा है। पुलिस, प्रशासन और विकास प्राधिकरणों की संयुक्त कार्रवाई में पूरे प्रदेश में 100 से अधिक कोचिंग संस्थानों के खिलाफ सीलिंग की कार्रवाई की गई है। कानपुर के सबसे बड़े कोचिंग हब 'काकादेव' में मंगलवार शाम तक 30 से अधिक संस्थानों को सील कर दिया गया, जिसके बाद बुधवार को वहां की सड़कों पर पूरी तरह सन्नाटा पसरा रहा। काकादेव में 500 से अधिक कोचिंग केंद्र संचालित होते हैं, जहां विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए प्रदेशभर से बच्चे आते हैं। जांच टीमों को सबसे गंभीर उल्लंघन भवनों के बेसमेंट में मिला, जो मूल रूप से पार्किंग के लिए स्वीकृत थे लेकिन वहां अवैध रूप से क्लासरूम बनाकर सैकड़ों बच्चों को बैठाया जा रहा था।

कानपुर विकास प्राधिकरण (KDA) ने बेसमेंट में चल रहे कोचिंग, नर्सिंग होम और स्टोर्स सहित कुल 52 प्रतिष्ठानों को तत्काल प्रभाव से नोटिस जारी कर एक सप्ताह का अल्टीमेटम दिया है। यदि निर्धारित समय में बेसमेंट से व्यावसायिक गतिविधियां नहीं हटाई गईं, तो उन्हें पूरी तरह सील कर दिया जाएगा। इसी तरह प्रयागराज विकास प्राधिकरण ने सिविल लाइंस स्थित खान ग्लोबल स्टडीज कोचिंग को सील कर दिया है। इसके अलावा वाराणसी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष पुर्ण बोरा ने बताया कि बनारस में बिना मानचित्र स्वीकृति और तय मानकों के विपरीत चल रहे कई कोचिंग सेंटरों और लाइब्रेरियों पर भी सीलिंग की कार्रवाई की गई है। इस बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई के विरोध और सुरक्षा मानकों को दुरुस्त करने के लिए बिहार के अररिया जिले के जोकीहाट में यूथ स्टूडेंट्स यूनियन ने एक कैंडल मार्च भी निकाला और मृत बच्चों की आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी।

कानपुर काकादेव कोचिंग मंडी जांच
काकादेव में कोचिंग संस्थानों की जांच करते क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी — Jagran

अब आगे क्या होगा

राज्य सरकार ने मृत छात्रों के परिवारों के लिए मुआवजे की घोषणा की है, साथ ही उन सभी संस्थानों को सख्त हिदायत दी है जिनके दस्तावेजों या सुरक्षा उपकरणों में मामूली कमियां मिली हैं। क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी डा. राजेश प्रकाश के अनुसार, कानपुर के कालरा शुक्ला क्लासेज, फिजिक्सवाला लिमिटेड, ओमेगा करियर इंस्टीट्यूट और शीनिल अकादमी सहित 14 प्रमुख संस्थानों को नोटिस देकर 7 दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है। जिन संस्थानों में फायर सेफ्टी प्रमाण पत्र, भवन सुरक्षा प्रमाण पत्र या अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) नहीं मिलेंगे, उन्हें आगे कभी भी संचालित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। शासन स्तर पर गठित एसआईटी अब सीधे उन अधिकारियों को चिन्हित करने में जुटी है जिन्होंने वर्षों से नियमों की अनदेखी कर इन खतरनाक व्यावसायिक गतिविधियों को फलने-फूलने की हरी झंडी दी थी।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

लखनऊ के अलीगंज अग्निकांड में कुल कितने लोगों की मौत हुई है?
इस हादसे में कुल 15 लोगों की दुखद मौत हुई है, जिनमें से अधिकांश एनीमेशन ट्रेनिंग सेंटर में पढ़ने वाले छात्र थे।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का मुख्य कारण क्या सामने आया है?
डॉक्टरों के अनुसार, सभी 15 लोगों की मौत सीधे आग से जलने के कारण नहीं, बल्कि तीन मंजिला इमारत के भीतर फैले जहरीले धुएं के कारण दम घुटने (श्वासावरोध) से हुई है।
इस घटना के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने क्या बड़ी कार्रवाई की है?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर पूरे राज्य में अवैध कोचिंग सेंटरों के खिलाफ महाअभियान चलाया जा रहा है, जिसके तहत कानपुर, प्रयागराज और वाराणसी जैसे शहरों में 100 से अधिक कोचिंग संस्थान सील कर दिए गए हैं।
बिजली विभाग के कौन से अधिकारी इस मामले में जांच के दायरे में हैं?
तत्कालीन अधिशासी अभियंता (एक्सईएन) सुशील कुमार एसआईटी जांच के घेरे में हैं, जिन्होंने साल 2025 में कोचिंग सेंटर का विद्युत लोड स्वीकृत क्षमता से अधिक लगातार बढ़े होने के बावजूद उपभोक्ता को कोई नोटिस जारी नहीं किया था।
बेसमेंट में चल रहे कोचिंग संस्थानों को लेकर केडीए का क्या आदेश है?
कानपुर विकास प्राधिकरण (KDA) ने बेसमेंट में चल रहे 52 व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी कर एक हफ्ते का समय दिया है। सुधार न होने पर उन्हें पूरी तरह से सील कर दिया जाएगा।
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लेखक

Ahmed Sezer

वरिष्ठ संपादक

राजनीति, सरकार और सामान्य जनहित के विषयों में विशेषज्ञ।

यह लेख AI-सहायता प्राप्त संपादकीय टूल की मदद से तैयार किया गया और प्रकाशन से पहले Trend Digest के संपादकीय मानकों के तहत समीक्षा की गई।

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