सीजेआई सूर्यकांत की वकीलों को दो-टूक: एआई से काम न कराएं आउटसोर्स, ड्राफ्टिंग खुद करें
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने नए 'एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड' (AoR) को चेतावनी देते हुए कहा है कि कानूनी ड्राफ्टिंग और याचिकाओं के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर निर्भरता खतरनाक हो सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई एक सहायक उपकरण तो हो सकता है, लेकिन यह मानवीय बुद्धिमत्ता और कानूनी बारीकियों का विकल्प कभी नहीं बन सकता।

पूरी कहानी: तकनीक बनाम मानवीय विवेक
बेंगलुरु और नई दिल्ली में आयोजित हालिया कार्यक्रमों के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कानूनी बिरादरी, विशेषकर नए वकीलों को संबोधित किया। सीजेआई ने इस बात पर जोर दिया कि एआई का उपयोग शोध और डेटा विश्लेषण के लिए करना तो ठीक है, लेकिन वकीलों को अपनी याचिकाएं (Petitions) खुद तैयार करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि 'काम को आउटसोर्स करना पेशे की गरिमा के खिलाफ है।'
यह मुद्दा तब उठा जब हाल के महीनों में कई ऐसे मामले सामने आए जहां एआई द्वारा तैयार किए गए कानूनी दस्तावेजों में काल्पनिक केस कानूनों का हवाला दिया गया था। सीजेआई ने वकीलों को याद दिलाया कि अदालत में जब वे खड़े होते हैं, तो वे केवल कागज नहीं पेश करते, बल्कि एक नागरिक के अधिकारों की रक्षा की जिम्मेदारी उठाते हैं। ऐसे में मशीनी बुद्धिमत्ता पर आंख मूंदकर भरोसा करना न्याय प्रक्रिया के लिए जोखिम भरा है।

उन्होंने आगे कहा कि एआई से डरने की जरूरत नहीं है, बल्कि इसे एक सहयोगी (Ally) के रूप में इस्तेमाल करना चाहिए। अगर वकील तकनीक के गुलाम बन जाएंगे, तो वे अपनी विश्लेषणात्मक शक्ति खो देंगे। सीजेआई ने नए एओआर से अपील की कि वे मुकदमों के तथ्यों को गहराई से समझें और खुद ड्राफ्टिंग करें ताकि उनकी कानूनी समझ विकसित हो सके।
कौन-कौन है इसमें शामिल
- CJI सूर्यकांत: भारत के मुख्य न्यायाधीश जिन्होंने यह महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश और चेतावनी जारी की।
- एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड (AoR): वकीलों का वह विशेष समूह जो सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर करने के लिए अधिकृत होता है।
- नई पीढ़ी के वकील: जिन्हें एआई के 'शॉर्टकट' से बचने की सलाह दी गई है।
- न्यायपालिका: जो अब तकनीक के इस्तेमाल और नैतिक सीमाओं के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है।
आखिर इसका मतलब क्या है?
सीजेआई का यह बयान भारतीय न्यायपालिका में तकनीक के प्रवेश को लेकर एक संतुलित दृष्टिकोण पेश करता है। भारत जैसे देश में जहां कानूनी भाषा और स्थानीय संदर्भ बहुत मायने रखते हैं, वहां एआई की गलतियां गंभीर परिणाम दे सकती हैं। 100% मशीनी निर्भरता से वकीलों की मौलिकता खत्म हो सकती है। यह संदेश साफ है: तकनीक आपके हाथ में एक औजार है, लेकिन दिमाग आपका अपना होना चाहिए। 'सावधानी हटी, दुर्घटना घटी' वाली बात यहां कानूनी ड्राफ्टिंग पर सटीक बैठती है।

आगे क्या होगा?
आने वाले समय में बार काउंसिल और सुप्रीम कोर्ट कानूनी काम में एआई के उपयोग को लेकर विस्तृत दिशानिर्देश (Guidelines) जारी कर सकते हैं। नए वकीलों के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में अब 'एआई एथिक्स' यानी एआई के नैतिक उपयोग को शामिल किए जाने की संभावना है। अदालतें अब वकीलों से इस बात की पुष्टि भी मांग सकती हैं कि उनकी याचिकाएं मौलिक हैं या एआई जनित।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या वकील अब चैटजीपीटी (ChatGPT) का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे?
वकील शोध और संदर्भ के लिए एआई का उपयोग कर सकते हैं, लेकिन सीजेआई ने पूरी याचिका या कानूनी ड्राफ्टिंग को एआई के भरोसे छोड़ने से मना किया है। इसका उपयोग केवल सहायता के लिए होना चाहिए, विकल्प के तौर पर नहीं।
एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड (AoR) क्या होता है?
एओआर वह वकील होता है जिसने सुप्रीम कोर्ट की विशेष परीक्षा पास की होती है। सुप्रीम कोर्ट में किसी भी मुकदमों को आधिकारिक तौर पर दर्ज करने की अनुमति केवल इन्हीं के पास होती है।
सीजेआई ने एआई को लेकर क्या चेतावनी दी है?
उन्होंने चेतावनी दी है कि वकील कानूनी काम को एआई को आउटसोर्स न करें। इससे वकीलों की अपनी सोचने की क्षमता कम हो सकती है और गलत जानकारी अदालत में पेश होने का खतरा रहता है।
क्या एआई भविष्य में जजों की जगह ले लेगा?
सीजेआई सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि एआई कभी भी जजों या मानवीय विवेक का स्थान नहीं ले सकता। न्याय एक मानवीय प्रक्रिया है जिसमें संवेदना और नैतिकता की जरूरत होती है, जो मशीनों में संभव नहीं है।
संसाधन
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