हरियाणा के पांच जिले एनसीआर में रहेंगे — चार नई नमो सिटी पर फैसला
हरियाणा के करनाल, पानीपत, जींद, महेंद्रगढ़ और भिवानी को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से बाहर करने की चर्चा के बीच बोर्ड ने सीमा में बदलाव नहीं करने का फैसला किया है। दिल्ली में हुई राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड की 42वीं बैठक में चार नई ग्रीनफील्ड नमो सिटी विकसित करने पर भी सहमति बनी। यह फैसला हरियाणा के उद्योगों, रियल एस्टेट और भविष्य की कनेक्टिविटी योजनाओं के लिए बड़ा संकेत है।

अब तक क्या साफ हुआ
विज्ञान भवन में हुई बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने की। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री ए.के. शर्मा और राजस्थान के शहरी स्थानीय निकाय मंत्री झाबर सिंह खर्रा इसमें शामिल हुए। बैठक में रीजनल प्लान-2041, शहरी नियोजन, पर्यावरण संरक्षण, बुनियादी ढांचे और टिकाऊ विकास पर चर्चा हुई।
सबसे बड़ा फैसला राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की सीमा से जुड़ा रहा। पहले प्रस्ताव था कि दिल्ली से 100 किलोमीटर के दायरे से बाहर के क्षेत्रों को मुख्य क्षेत्र से अलग किया जा सकता है। अगर ऐसा होता तो हरियाणा का राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र 25,327 वर्ग किलोमीटर से घटकर 10,546 वर्ग किलोमीटर तक रह सकता था। यानी करीब 60 प्रतिशत कटौती की आशंका थी।
हरियाणा के लिहाज से इसका असर सबसे अधिक करनाल, पानीपत, जींद, महेंद्रगढ़ और भिवानी पर पड़ता। करनाल दिल्ली से करीब 120-121 किलोमीटर, महेंद्रगढ़ 112-113 किलोमीटर और भिवानी करीब 107-108 किलोमीटर दूर बताया गया था। पानीपत सीमा रेखा पर था, जहां मुख्य शहर बच सकता था, लेकिन जिले का बड़ा हिस्सा 100 किलोमीटर से बाहर जा सकता था।

अब बोर्ड ने वर्तमान सीमा बनाए रखने का फैसला किया है। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बैठक के बाद कहा कि प्रदेश का पुराना क्षेत्र पहले की तरह रहेगा। अभी हरियाणा के कुल 23 में से 14 जिले राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में हैं। यह निर्णय उन जिलों के लिए राहत है जिन पर बाहर होने की चर्चा चल रही थी, लेकिन उद्योग जगत की चिंता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है क्योंकि प्रदूषण और ईंधन से जुड़े नियम अब भी कारोबार की लागत पर असर डालते हैं।
इसी बैठक में चार नई ग्रीनफील्ड नमो सिटी विकसित करने का निर्णय भी हुआ। दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में एक-एक शहर के लिए स्थान प्रस्तावित किए जाएंगे। नमो सिटी विकास के लिए अगले पांच वर्षों में 5,000 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रावधान बताया गया है। ये शहर आधुनिक, पर्यावरण-अनुकूल और आत्मनिर्भर शहरी केंद्र के रूप में विकसित किए जाने हैं।
लोग क्या कह रहे हैं
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बैठक में प्रदूषण को पूरे क्षेत्र की साझा समस्या बताया और चारों राज्यों के समन्वय पर जोर दिया। उनका पक्ष इसलिए अहम है क्योंकि दिल्ली पर जनसंख्या, यातायात और प्रदूषण का दबाव सीधे आसपास के राज्यों की नीतियों से जुड़ता है।
प्रदूषण एक गंभीर और साझा चुनौती है, जिससे प्रभावी ढंग से निपटने के लिए चारों राज्यों को मिलकर दीर्घकालिक और ठोस प्रयास करने होंगे। यदि सभी राज्य प्रदूषण नियंत्रण के लिए समान नीति, आधुनिक तकनीक और उपयुक्त संसाधनों का समन्वित उपयोग करें तो इस समस्या पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। यह मुद्दा केवल वर्तमान पीढ़ी ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य और भविष्य से भी जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है।
हरियाणा सरकार ने भी क्षेत्रीय विकास को प्राथमिकता बताई है। सैनी ने कहा कि ग्रीनफील्ड शहरों और आरआरटीएस परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा। उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह ने अलग से केएमपी एक्सप्रेसवे के दोनों ओर पांच नए शहरों की योजना को हरियाणा के भविष्य के विकास का केंद्र बताया है।
आप पर इसका असर
हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले लोगों के लिए यह फैसला रोजमर्रा के जीवन, रोजगार और संपत्ति बाजार से जुड़ा है। अगर जिले बाहर चले जाते, तो कुछ क्षेत्रों को प्रदूषण नियंत्रण नियमों से राहत मिल सकती थी, लेकिन राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की ब्रांडिंग, निवेश और भविष्य की परिवहन परियोजनाओं पर असर पड़ता। अब सीमा बनी रहने से विकास योजनाओं में निरंतरता रहेगी।

पानीपत जैसे औद्योगिक शहरों में उद्यमी लंबे समय से सख्त प्रदूषण नियमों, ग्रैप के तहत फैक्ट्री प्रतिबंध और पीएनजी पर शिफ्ट की लागत का मुद्दा उठाते रहे हैं। इसलिए सीमा न बदलने का मतलब है कि कारोबारी समुदाय को राहत के लिए अब नियमों के क्षेत्रवार लागू होने वाली व्यवस्था पर नजर रखनी होगी। बैठक में कोर, सेंट्रल और पूरे क्षेत्र के लिए अलग-अलग प्रतिबंधों के विचार पर भी चर्चा हुई है।
यात्रियों के लिए 30 मिनट वाले क्षेत्रीय परिवहन विचार का असर बड़ा हो सकता है। प्रस्ताव के मुताबिक प्रमुख शहरों के बीच हाई-स्पीड रेल नेटवर्क, नमो भारत कॉरिडोर, ऑर्बिटल रेल और बेहतर सड़क संपर्क पर काम होगा। गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, पानीपत, करनाल और अलवर जैसे शहरों की कनेक्टिविटी तेज होने से रोजगार के लिए दिल्ली पर निर्भरता घट सकती है।
आगे क्या होगा
रीजनल प्लान-2041 को अंतिम रूप देने के लिए केंद्र और संबंधित राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों की सब-कमेटी बनाई गई है। यह समिति 15 अगस्त 2026 तक अपनी अंतिम रिपोर्ट बोर्ड को सौंपेगी। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड की अगली बैठक दिसंबर 2026 में गुरुग्राम में प्रस्तावित है।
चार नमो सिटी के लिए राज्य अपनी-अपनी लोकेशन भेजेंगे। दिल्ली में नरेला-बवाना, द्वारका फेज-2 और अलीपुर-बुराड़ी जैसे विकल्पों का उल्लेख हुआ है। हरियाणा में केएमपी एक्सप्रेसवे के आसपास विकास की दिशा मजबूत दिख रही है, क्योंकि राज्य सरकार पंचग्राम विकास प्राधिकरण के गठन के जरिये 135 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर को नए शहरी और औद्योगिक केंद्र के रूप में आगे बढ़ाना चाहती है।
एक नजर में
- राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की मौजूदा सीमा में अभी कोई बदलाव नहीं होगा।
- हरियाणा के करनाल, पानीपत, जींद, महेंद्रगढ़ और भिवानी बाहर नहीं होंगे।
- दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में एक-एक नमो सिटी विकसित करने की योजना है।
- रीजनल प्लान-2041 पर अंतिम रिपोर्ट 15 अगस्त 2026 तक दी जाएगी।
- अगली बोर्ड बैठक दिसंबर 2026 में गुरुग्राम में प्रस्तावित है।
- हरियाणा में केएमपी एक्सप्रेसवे के दोनों ओर पांच नए शहर विकसित करने की तैयारी है।
सवाल-जवाब
क्या हरियाणा के पांच जिले राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से बाहर होंगे?
नहीं। बोर्ड की बैठक के बाद बताया गया कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की मौजूदा सीमा में बदलाव नहीं होगा। इसलिए करनाल, पानीपत, जींद, महेंद्रगढ़ और भिवानी अभी बाहर नहीं होंगे।
नमो सिटी क्या होगी?
नमो सिटी प्रस्तावित ग्रीनफील्ड स्मार्ट शहर होंगे, जहां हरियाली, आधुनिक नागरिक सुविधाएं, बेहतर कचरा प्रबंधन और प्रदूषण कम करने वाले परिवहन पर जोर रहेगा। चार राज्यों में एक-एक शहर विकसित करने की योजना है।
रीजनल प्लान-2041 में हरियाणा के लिए क्या मायने हैं?
हरियाणा के लिए इसका मतलब है कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से जुड़ी कनेक्टिविटी, औद्योगिक विकास, शहरी नियोजन और पर्यावरण नियमों पर राज्य की भूमिका बनी रहेगी। केएमपी कॉरिडोर भी नए विकास केंद्र के रूप में आगे बढ़ सकता है।
उद्योगों पर इस फैसले का क्या असर पड़ेगा?
सीमा नहीं बदलने से उद्योग राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के ढांचे में बने रहेंगे। इससे निवेश और ब्रांडिंग को मदद मिल सकती है, लेकिन प्रदूषण नियंत्रण, ईंधन बदलाव और ग्रैप से जुड़ी लागत की चिंता जारी रह सकती है।
अगला बड़ा फैसला कब आ सकता है?
रीजनल प्लान-2041 पर बनी सब-कमेटी 15 अगस्त 2026 तक रिपोर्ट देगी। इसके बाद दिसंबर 2026 में गुरुग्राम में होने वाली अगली बैठक में आगे की दिशा साफ हो सकती है।
संसाधन
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