महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में ताडोबा-अंधारी बाघ परियोजना के बफर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पलसगांव वन परिक्षेत्र में एक बेहद दर्दनाक और सनसनीखेज घटना सामने आई है, जहां खेत में काम कर रही 45 वर्षीय महिला उषा अंकुश गुरुनुले पर घात लगाए बैठे बाघ ने अचानक हमला कर दिया और उन्हें अपनी जान गंवानी पड़ी। सबसे मर्मस्पर्शी और दहला देने वाली बात यह रही कि यह खौफनाक हमला महिला के पति के ठीक सामने हुआ, जो पानी के इंजन के पास मौजूद थे और चाहकर भी अपनी पत्नी की जान नहीं बचा सके। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है और स्थानीय ग्रामीणों तथा किसानों में भारी आक्रोश एवं डर व्याप्त है।

घटना की पूरी पृष्ठभूमि और विवरण
यह दुखद घटना चिमूर तहसील के पलसगांव वन क्षेत्र के कक्ष क्रमांक 559, पीएफ 1000 परिसर में हुई। मृतका उषा अंकुश गुरुनुले सोयाबीन की कटाई का काम पूरा करने के बाद अपने पति अंकुश गुरुनुले के साथ जंगल से सटे खेत में धान की फसल की सिंचाई करने गई थीं। पति खेत में डीजल इंजन के पास पानी की व्यवस्था संभाल रहे थे, जबकि उषा खेत में निराई और खरपतवार निकालने के कार्य में जुटी हुई थीं। इसी दौरान झाड़ियों में घात लगाए बैठे बाघ ने उन पर अप्रत्याशित हमला कर दिया और उनकी गर्दन को अपने जबड़े में दबोचते हुए पास के घने जंगल की तरफ खींच ले गया। पति ने शोर मचाकर और आवाज देकर बचाने का पूरा प्रयास किया, लेकिन आसपास कोई अन्य किसान या मजदूर मौजूद न होने के कारण वे बेबस नजर आए और उषा की मौके पर ही मौत हो गई।
किन क्षेत्रों और लोगों पर सबसे ज्यादा खतरा है?
ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व के बफर जोन और उससे लगे ग्रामीण इलाकों में वन्यजीवों की आवाजाही लंबे समय से गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। चंद्रपुर जिले के पलसगांव, भेंडारा, पळसगाव जाट, खातगांव और देसाईगंज तहसील के रावणवाड़ी टोली जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में पिछले कुछ दिनों से बाघ और तेंदुओं की गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। विशेष रूप से जंगल के करीब अपने खेतों में काम करने वाले किसान, खेत मजदूर, और ग्रामीण इस समय सबसे अधिक जोखिम में हैं। धान और सोयाबीन की कटाई तथा सिंचाई के मौजूदा कृषि सीजन के कारण किसानों का खेतों में जाना अनिवार्य हो गया है, जिससे इंसानों और वन्यजीवों का आमना-सामना होने की आशंका अत्यधिक बढ़ गई है।

वन्यजीवों की गतिविधियां और चेतावनी
हालिया 24 घंटों के भीतर चंद्रपुर क्षेत्र में इस प्रकार की दो दर्दनाक घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें एक अन्य मामले में आंगनवाड़ी सेविका प्रमिला महाडोरे की भी बाघ के हमले में जान चली गई। ग्रामीणों और पशुपालकों का कहना है कि पिछले कई दिनों से खेतों के आसपास बाघ के पैरों के निशान साफ देखे जा रहे थे। इसके अलावा, रावणवाड़ी टोली जैसे इलाकों में हिंसक वन्यजीवों द्वारा रात के समय गांव के समीप आकर पालतू मवेशियों को अपना शिकार बनाए जाने की घटनाएं भी लगातार सामने आ रही हैं। शाम ढलते ही इन गांवों में सन्नाटा पसर जाता है और लोग अपने घरों से बाहर निकलने में भी बुरी तरह डरने लगे हैं। इन आंकड़ों और लगातार हो रहे हमलों से यह स्पष्ट होता है कि वन्यजीवों के प्राकृतिक गलियारों और मानवीय बस्तियों के बीच का टकराव खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है।

ग्रामीणों और किसानों के लिए सुरक्षा के उपाय
इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद स्थानीय नागरिकों और किसानों ने प्रशासन तथा वन विभाग के सामने कड़े सुरक्षा उपायों की जोरदार मांग उठाई है। वन विभाग और पुलिस दल ने तुरंत मौके पर पहुंचकर पंचनामा किया तथा शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया, साथ ही पीड़ित परिवार को शुरुआती तौर पर 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता भी प्रदान की है। हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल आर्थिक सहायता पर्याप्त नहीं है। ग्रामीणों ने मांग की है कि जंगल से सटे सभी संवेदनशील कृषि क्षेत्रों में वन विभाग द्वारा नियमित गश्त बढ़ाई जाए, थर्मल या नाइट-विज़न कैमरों से निगरानी रखी जाए, और किसानों को समय-समय पर वन्यजीवों की मौजूदगी के बारे में सतर्क किया जाए ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोका जा सके।
ताजा प्रशासनिक कार्रवाई और अपडेट
घटना की सूचना मिलने के बाद वन परिक्षेत्र अधिकारी सागर बारसागड़े, वनपाल चंद्रकांत रासेकर और चिमूर पुलिस विभाग के अधिकारी तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। वन विभाग की विशेष टीमों ने प्रभावित इलाकों में बाघ की मूवमेंट पर पैनी नजर रखनी शुरू कर दी है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि किसानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए गश्त दलों की संख्या बढ़ाई जाएगी और संवेदनशील रास्तों पर आवाजाही के लिए विशेष दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे ताकि ग्रामीण सुरक्षित रूप से अपने कृषि कार्य पूरे कर सकें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. चंद्रपुर में यह बाघ का हमला किस जगह पर हुआ?
यह घटना महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले के चिमूर तालुका में ताडोबा-अंधारी बाघ परियोजना के बफर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पलसगांव वन परिक्षेत्र के कक्ष क्रमांक 559 में हुई।
2. मृत महिला का क्या नाम था और घटना के समय वह क्या कर रही थीं?
मृतका का नाम उषा अंकुश गुरुनुले (45) था, जो अपने पति के साथ जंगल से सटे खेत में धान की फसल को पानी देने गई थीं और वहां काम कर रही थीं।
3. क्या इस घटना के बाद वन विभाग ने कोई सहायता प्रदान की है?
हाँ, वन विभाग की टीम ने तुरंत मौके पर पहुंचकर पंचनामा किया और पीड़ित परिवार को 50 हजार रुपये की तत्काल आर्थिक सहायता दी है।
4. ग्रामीणों द्वारा प्रशासन से क्या मुख्य मांगें की जा रही हैं?
ग्रामीणों ने जंगल से सटे खेतों में वन विभाग की नियमित गश्त बढ़ाने, बाघ की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखने और किसानों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।