धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफे पर चुप्पी क्यों तोड़ी, युवाओं पर क्या कहा?

धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद छोड़ने के बाद पहली सार्वजनिक प्रतिक्रिया में कहा कि युवाओं की आकांक्षाएं उनके लिए पद से बड़ी थीं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत के बाद इस्तीफा देने की बात भी कही।

धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफे पर पहली बार क्या कहा?
📢विज्ञापन

धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफे पर चुप्पी क्यों तोड़ी, युवाओं पर क्या कहा?

नीट पेपर लीक को लेकर छात्र विरोध और केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद उनका पहला सार्वजनिक बयान इस पूरे घटनाक्रम को फिर चर्चा में ले आया है। संबलपुर से भाजपा सांसद प्रधान ने भुवनेश्वर की जीएम यूनिवर्सिटी में छात्रों और शिक्षकों के बीच कहा कि युवा पीढ़ी की आकांक्षाएं उनके लिए मंत्री पद से बड़ी थीं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विरोध के दौरान युवाओं को गुमराह करने की कोशिश हुई और बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत के बाद उन्होंने पद छोड़ा था।

धर्मेंद्र प्रधान
इस्तीफे के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने पहली बार सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखी — AajTak

क्या हो रहा है?

धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दिया था। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक यह कदम नीट पेपर लीक को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र विरोध के बाद आया। करीब दो सप्ताह बाद उन्होंने जीएम यूनिवर्सिटी में अपने फैसले के बारे में विस्तार से बात की।

प्रधान ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संपर्क कर इस्तीफे की पेशकश की थी। उनका जोर इस बात पर था कि युवाओं के संकल्प और उनकी उम्मीदों के सामने मंत्री की जिम्मेदारी छोटी है। उनके सार्वजनिक बयान में इस्तीफे के साथ युवाओं के प्रति उनके नजरिए का भी जिक्र है।

जेन Z हमारे बच्चे हैं। कुछ लोगों ने उन्हें गुमराह करने की कोशिश की। तब मेरा कोई निजी मसला नहीं था। भारत में हर साल कम से कम दो करोड़ बच्चे पैदा होते हैं। पिछले 10 सालों में 20 करोड़ बच्चे पैदा हुए। उनकी अपनी उम्मीदें हैं और वे भारत को 'विश्व गुरु' बनाएंगे। मेरे लिए पद महत्वपूर्ण नहीं था.

धर्मेंद्र प्रधान, संबलपुर सांसद

इस घटनाक्रम की पृष्ठभूमि

इस बयान की पृष्ठभूमि नीट पेपर लीक को लेकर हुआ विरोध है। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के 35 दिन बाद प्रधान ने 25 जुलाई को पद छोड़ा। उसी रिपोर्ट में 1997 की एक घटना का भी उल्लेख है, जब ओडिशा में पेपर लीक के खिलाफ लगभग 1,500 छात्रों के प्रदर्शन में प्रधान शामिल हुए थे और पुलिस लाठीचार्ज में घायल हुए थे। यह पुराना प्रसंग मौजूदा विवाद में इसलिए प्रासंगिक है क्योंकि इस बार वह परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाने वाले प्रदर्शनकारियों के सामने मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

जीएम यूनिवर्सिटी कार्यक्रम में धर्मेंद्र प्रधान
भुवनेश्वर की जीएम यूनिवर्सिटी के कार्यक्रम में धर्मेंद्र प्रधान — Dainik Bhaskar

प्रधान ने नई पीढ़ी का विरोध करने के बजाय उसे समझने की बात कही। उन्होंने माता-पिता, शिक्षकों और समाज की जिम्मेदारी पर भी जोर दिया कि युवाओं को अच्छे अवसरों और गुमराह करने वाली चीजों के बीच अंतर समझाने में मदद की जाए।

अब नया क्या सामने आया?

नई बात इस्तीफे के कारण पर प्रधान का प्रत्यक्ष सार्वजनिक पक्ष है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री से बातचीत हुई, प्रदर्शनकारियों की मांगों पर चर्चा की गई और उसके बाद उन्होंने इस्तीफा दिया। उन्होंने युवाओं की संख्या का संदर्भ देते हुए कहा कि भारत में हर साल कम से कम दो करोड़ बच्चे जन्म लेते हैं और दस वर्षों में यह संख्या करीब 20 करोड़ होती है। यह आंकड़ा उन्होंने युवा पीढ़ी की आकांक्षाओं के पैमाने को समझाने के लिए इस्तेमाल किया।

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफे पर बयान
प्रधान ने युवाओं और अपने इस्तीफे पर पहली बार विस्तार से प्रतिक्रिया दी — ABP News

इसी दौरान ओडिशा की राजनीति भी बयान का हिस्सा बनी। रायराखोल में प्रधान ने बीजू जनता दल के कार्यकर्ताओं की नारेबाजी का जवाब दिया और पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक पर युवाओं को उनके खिलाफ प्रदर्शन में शामिल करने का आरोप लगाया।

इसका क्या मतलब है?

प्रधान का बयान राजनीतिक जवाबदेही और छात्र आंदोलनों के रिश्ते को सामने रखता है। मंत्री पद छोड़ने के बाद उन्होंने विरोध करने वाले युवाओं को पूरी तरह खारिज करने के बजाय उनकी आकांक्षाओं को महत्वपूर्ण बताया, हालांकि साथ ही उन्हें गुमराह किए जाने का आरोप भी लगाया। इससे दो अलग सवाल सामने आते हैं—परीक्षा व्यवस्था पर छात्रों की शिकायतें और उन प्रदर्शनों की राजनीतिक व्याख्या।

छात्रों और अभिभावकों के लिए इस घटनाक्रम का सीधा महत्व परीक्षा व्यवस्था में भरोसे से जुड़ा है। उपलब्ध स्रोत यह बताते हैं कि विरोध के बाद मंत्री का इस्तीफा हुआ और प्रधान ने अब अपने फैसले का पक्ष रखा है। दैनिक भास्कर के अनुसार उनके इस्तीफे के बाद प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया।

क्या अब भी स्पष्ट नहीं है?

प्रधान ने युवाओं को गुमराह करने की कोशिश का आरोप लगाया, लेकिन उपलब्ध सामग्री में उन्होंने उन लोगों की स्पष्ट पहचान नहीं बताई जिन्हें इस कोशिश के लिए जिम्मेदार ठहराया गया। इसी तरह इन स्रोतों में नीट पेपर लीक विवाद की जांच के निष्कर्ष या परीक्षा व्यवस्था में आगे किए जाने वाले सुधारों का विस्तृत ब्यौरा नहीं दिया गया है। इसलिए उनके बयान से इस्तीफे पर उनका पक्ष स्पष्ट होता है, लेकिन मूल परीक्षा विवाद से जुड़े सभी प्रश्नों का उत्तर नहीं मिलता।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से कब इस्तीफा दिया?

उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने 25 जुलाई 2026 को केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दिया।

धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा क्यों दिया?

प्रधान के मुताबिक नीट पेपर लीक को लेकर हुए छात्र विरोध के बीच उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत की और पद छोड़ने की पेशकश की।

इस्तीफे के बाद उन्होंने पहली बार कहां बयान दिया?

उन्होंने भुवनेश्वर की जीएम यूनिवर्सिटी में छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए इस्तीफे पर पहली सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी।

उन्होंने युवा पीढ़ी के बारे में क्या कहा?

प्रधान ने कहा कि युवा पीढ़ी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और उनकी आकांक्षाओं के सामने मंत्री पद उनके लिए महत्वपूर्ण नहीं था।

क्या धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री मोदी से बात की थी?

हां। प्रधान ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संपर्क किया और इस्तीफे की पेशकश की थी।

ओडिशा में धर्मेंद्र प्रधान का विरोध क्यों चर्चा में है?

बीजू जनता दल के युवा और छात्र कार्यकर्ताओं ने उनके खिलाफ नारे लगाए। प्रधान ने इसके जवाब में कहा कि विरोध के बावजूद वह वापस आते रहेंगे।

Ahmed Sezer profile photo

लेखक

Ahmed Sezer

वरिष्ठ संपादक

राजनीति, सरकार और सामान्य जनहित के विषयों में विशेषज्ञ।

यह लेख AI-सहायता प्राप्त संपादकीय टूल की मदद से तैयार किया गया और प्रकाशन से पहले Trend Digest के संपादकीय मानकों के तहत समीक्षा की गई।

हमारी कार्यप्रणाली के बारे में जानें
राजनीतिसार्वजनिक नीतिसामान्य ट्रेंड

📚संसाधन

इस लेख में उद्धृत स्रोत और संदर्भ।