सिद्धिविनायक मंदिर दान विवाद: राज ठाकरे के आरोपों के बाद 5 साल के ऑडिट का आदेश
मुंबई के मशहूर सिद्धिविनायक मंदिर में चढ़ावे और दान राशि में कथित हेराफेरी का मामला महाराष्ट्र की राजनीति में गरमा गया है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) प्रमुख राज ठाकरे द्वारा मंदिर से सालाना 18 करोड़ रुपये चोरी होने का दावा किए जाने के बाद राज्य सरकार हरकत में आ गई है। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने पिछले पांच वर्षों के दौरान मंदिर में प्राप्त नकद दान, गहनों और कीमती सामानों के विशेष ऑडिट कराने के निर्देश जारी किए हैं। इस ऑडिट की जिम्मेदारी अतिरिक्त मुख्य सचिव असीम गुप्ता को सौंपी गई है।

मामले का संक्षेप: सिद्धिविनायक मंदिर विवाद
मुंबई के प्रभादेवी स्थित लगभग 300 साल पुराने सिद्धिविनायक मंदिर में रोजाना औसतन 25 हजार से अधिक श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। मंदिर ट्रस्ट के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022-23 में मंदिर को 106 करोड़ रुपये का दान मिला था, जो 2025-26 में बढ़कर 182 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। मनसे प्रमुख राज ठाकरे का आरोप है कि उप मुख्यमंत्री को भेजे गए एक पत्र में दान पेटी से सालाना 18 करोड़ रुपये गबन की बात कही गई थी। वहीं, मंदिर ट्रस्ट ने चोरी के दावों को स्वीकार करते हुए यह स्पष्ट किया है कि अनियमितताओं का खुलासा खुद ट्रस्ट की चौकसी के कारण हुआ है।
विवाद की शुरुआत और घटनाक्रम
यह पूरा मामला तब सामने आया जब मंदिर प्रशासन को श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के बावजूद दान राशि में अपेक्षित बढ़ोतरी न होने का संदेह हुआ। जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए, जिसमें एक कैमरा ब्लॉक पाया गया। मार्च 2026 में मंदिर के एक कर्मचारी राजेंद्र पेंडुरकर को दान पेटी से नकदी निकालते हुए पकड़ा गया था। इसके अलावा कुछ कर्मचारियों पर श्रद्धालुओं से पैसे लेकर बिना टिकट वीआईपी दर्शन कराने के आरोप भी लगे।

दादर पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए आठ से नौ लोगों को गिरफ्तार किया और उनसे करीब 80 हजार रुपये बरामद किए। पुलिस जांच के अनुसार, आरोपी सीसीटीवी से बचते हुए छोटी दान पेटियों से नकदी निकाला करते थे। फिलहाल सभी गिरफ्तार आरोपी अदालत से जमानत पर बाहर हैं और पुलिस चार्जशीट दाखिल कर चुकी है।
मुख्य चेहरे और कार्रवाई की विवरण
सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष सदा सरवणकर ने बताया कि गबन की आशंका के बाद उन्होंने स्वयं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) और पुलिस अधिकारियों से संपर्क किया था। ट्रस्ट प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई करते हुए अनियमितताओं और दर्शन व्यवस्था में गड़बड़ी के आरोपी 45 कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है।

ट्रस्ट के अनुसार, सुधारात्मक उपाय लागू करने के बाद दान की साप्ताहिक प्राप्ति 50 लाख रुपये से बढ़कर लगभग 1.5 करोड़ रुपये प्रति सप्ताह हो गई है। सदा सरवणकर ने दावा किया कि गिरफ्तार आरोपियों में से कुछ पूर्ववर्ती शासन काल में नियुक्त किए गए थे और उनके तार राजनीतिक नेताओं से जुड़े हुए थे।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और आरोप-प्रत्यारोप
राज ठाकरे के बयानों के बाद महाराष्ट्र में राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी के नेता राम कदम ने कहा कि राज ठाकरे को बिना पुख्ता सबूतों के ऐसे दावे करके श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस नहीं पहुंचानी चाहिए। वहीं शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी (एससीपी) के नेताओं ने सरकार पर निशाना साधते हुए मामले की विशेष जांच दल (एसआईटी) से जांच कराने की मांग की है। विपक्षी नेताओं ने धर्मस्थलों के प्रबंधन और पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं।
आगे की स्थिति: जांच और ऑडिट पर नजर
महाराष्ट्र सरकार द्वारा आदेशित पांच वर्षों का विशेष ऑडिट मंदिर के पूर्व अध्यक्षों के कार्यकाल को भी दायरे में लेगा। राज्य का कानून एवं न्याय विभाग ट्रस्ट द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट और वित्तीय रिकॉर्ड्स की समीक्षा कर रहा है। असीम गुप्ता द्वारा तैयार की जाने वाली रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार आगे की विधिक व प्रशासनिक कार्रवाई तय करेगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
सिद्धिविनायक मंदिर दान विवाद क्या है?
एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे ने सिद्धिविनायक मंदिर की दान पेटी से सालाना 18 करोड़ रुपये चोरी होने का आरोप लगाया है, जिसके बाद मंदिर के चढ़ावे और वीआईपी दर्शन में अनियमितताओं पर बहस छिड़ गई है।
सरकार ने क्या कदम उठाया है?
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मंदिर के पिछले 5 वर्षों के नकद, गहनों और कीमती सामानों का विशेष ऑडिट कराने का आदेश दिया है।
क्या इस मामले में गिरफ्तारियां हुई हैं?
हां, पुलिस ने दान पेटी से नकदी चुराने के मामले में कर्मचारी राजेंद्र पेंडुरकर सहित आठ लोगों को गिरफ्तार किया था और करीब 45 कर्मचारियों को सस्पेंड किया गया है।
मंदिर ट्रस्ट का इस पूरे मामले पर क्या रुख है?
मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष सदा सरवणकर का कहना है कि गड़बड़ी का पता खुद ट्रस्ट की सतर्कता से चला और उन्होंने ही एंटी करप्शन ब्यूरो और पुलिस से शिकायत की थी।
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