पश्चिम एशिया में तनाव इस कदर बढ़ चुका है कि युद्ध की लपटें अब काबू से बाहर होती दिख रही हैं। जॉर्डन में एक अमेरिकी सैन्य बेस पर हुए ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमले में 2 अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं, जबकि एक सैनिक अभी भी लापता है। इस घटना के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर अमेरिकी वायुसेना ने ईरान के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए लगातार आठवीं रात भीषण बमबारी की है।

मुख्य घटनाक्रम और बड़े तथ्य
- 2 सैनिकों की मौत: जॉर्डन के अल-अजराक अमेरिकी बेस पर ईरानी हमले में दो अमेरिकी सैनिकों की जान गई और चार घायल हुए। 28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक 16 अमेरिकी सैनिक मारे जा चुके हैं।
- लगातार 8वीं रात हमला: यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने रविवार को ईरान के अर्धसैनिक संगठन ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड’ (IRGC) के हवाई रक्षा प्रतिष्ठानों, तटीय निगरानी केंद्रों और मिसाइल-ड्रोन भंडारण स्थलों पर भारी हमले किए।
- 50,000 सैनिक अलर्ट पर: पश्चिम एशिया क्षेत्र में तैनात 50,000 से अधिक अमेरिकी सैनिकों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। साथ ही जर्मनी और ब्रिटेन से F-16 और F-35 स्टील्थ फाइटर जेट इजरायल भेजे जा रहे हैं।
- परमाणु संयंत्र पर हमला: ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन ने पुष्टि की है कि दक्षिण-पश्चिमी ईरान के खुजेस्तान प्रांत में स्थित डार्कहोविन परमाणु ऊर्जा संयंत्र के निर्माण स्थल पर भी अमेरिकी हमले हुए हैं।
- होर्मुज का विवाद: 17 जून को ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच हुआ 14-सूत्रीय अस्थायी समझौता (MOU) महज एक महीने में 8 जुलाई को टूट गया, जिससे व्यापारिक मार्ग होर्मुज पर नियंत्रण की जंग दोबारा शुरू हो गई।
घटनाक्रम का विस्तृत विश्लेषण
यूएस सेंट्रल कमांड के अनुसार, ताजा सैन्य कार्रवाई जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाए जाने के बाद त्वरित दंड देने के लिए की गई है। ईरान ने कुवैत और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाकर कई कामिकेज ड्रोन और क्रूज मिसाइलें दागी हैं। कुवैत में कैंप उडाइरी के गोला-बारूद डिपो और अली अल सलेम एयर बेस पर आईआरजीसी ने हमले का दावा किया है। दूसरी ओर, इजरायली और जॉर्डन की सेनाओं ने ईरान से अकाबा की ओर दागी गई कई मिसाइलों को बीच रास्ते में ही इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया है।
इसी बीच अमेरिकी व्हाइट हाउस के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ डैन स्काविनो का एक सोशल मीडिया पैटर्न फिर से चर्चा में आ गया है। स्काविनो ने सोशल मीडिया पर B-2 स्पिरिट स्टील्थ बॉम्बर और F-22 रैप्टर का एक वीडियो शेयर किया है। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि जब-जब स्काविनो ने बिना कैप्शन के इस महाविनाशक बॉम्बर का वीडियो पोस्ट किया है, उसके कुछ ही घंटों के भीतर ईरान पर बड़े हमले हुए हैं, जैसे फरवरी में 'ऑपरेशन मिडनाइट हैमर' के दौरान देखा गया था।

ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति के हस्ताक्षर बेकार हैं और वाशिंगटन को कभी न भूलने वाला सबक मिलेगा। वहीं आईआरजीसी ने देश के अहवाज क्षेत्र में अमेरिका के एक अत्याधुनिक एमक्यू-9 (MQ-9) रीपर ड्रोन को मार गिराने का भी दावा किया है। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि रूस और चीन से मिल रही सैटेलाइट इमेजरी और टारगेटिंग तकनीक के कारण ईरान की फतह-1 और फतह-2 जैसी हाइपरसोनिक मिसाइलें अब अमेरिकी मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए बड़ी चुनौती बन रही हैं।
इस टकराव का वैश्विक और क्षेत्रीय प्रभाव
इस जंग का केंद्र अब पूरी तरह से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) बन चुका है। शांतिकाल में दुनिया के कुल तेल और प्राकृतिक गैस व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा (20%) इसी संकरे जलमार्ग से होकर गुजरता है। पूर्व भारतीय राजदूत नवदीप सूरी ने कहा कि यह समझौता ज्ञापन जल्दबाजी में हुआ था, जो अब 'मेमोरेंडम ऑफ मिसअंडरस्टैंडिंग' बन चुका है। ईरान इस मार्ग पर टैक्स वसूलने या इसे ब्लॉक करने की कोशिश कर रहा है, जिससे वैश्विक ऊर्जा कीमतें बढ़ रही हैं और दुनिया भर की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है।
वरिष्ठ पत्रकार सीमा सिरोही के अनुसार, इस युद्ध से भारत के हित बहुत बड़े स्तर पर जुड़े हुए हैं। क्षेत्रीय समुद्री व्यापार और मर्चेंट नेवी में बड़ी संख्या में भारतीय नाविक और कर्मचारी कार्यरत हैं, जो इन हमलों की चपेट में आ रहे हैं। भारत की ऊर्जा सुरक्षा भी पूरी तरह खाड़ी क्षेत्र की स्थिरता पर निर्भर करती है। पूर्व राजनयिक सूरी का मानना है कि भारत सरकार ने ऊर्जा स्रोतों को डायवर्सिफाई करके स्थिति को परिपक्वता से संभाला है, लेकिन भारत को रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व को दो से तीन गुना बढ़ाना होगा।
आगे की राह और संभावित परिणाम
ईरान के वरिष्ठ कमांडर मेजर जनरल मोहसेन रेजाई ने साफ कर दिया है कि अगर अमेरिकी हमले जारी रहे, तो ईरान सिर्फ जवाबी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पूर्ण-स्तरीय आक्रामक अभियान शुरू करेगा। अमेरिकी प्रशासन पर भी घरेलू स्तर पर युद्ध को लेकर दबाव बढ़ रहा है क्योंकि नवंबर में वहां मध्यवर्ती चुनाव होने हैं। हालांकि दोनों पक्षों के मुख्य सलाहकार अब भी कूटनीतिक रास्ता खुला होने का संकेत दे रहे हैं, लेकिन फिलहाल युद्ध विराम की शर्तें तय होना बेहद मुश्किल नजर आ रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
जॉर्डन में कितने अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं?
जॉर्डन में हुए हालिया ईरानी ड्रोन और मिसाइल हमले में 2 अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं और 1 सैनिक अभी भी लापता है। 28 फरवरी से शुरू हुए इस संघर्ष में अब तक कुल 16 अमेरिकी सैनिक जान गंवा चुके हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य विवाद का मुख्य कारण क्या है?
17 जून को हुए एमओयू के पैरा 5 को लेकर दोनों देशों की व्याख्या अलग है। अमेरिका का कहना है कि यह मार्ग पूरी दुनिया के लिए खुला है, जबकि ईरान का दावा है कि इस जलमार्ग पर उसका संप्रभु अधिकार है और वह अपनी अनुमति के बिना जहाजों को नहीं जाने देगा।
क्या अमेरिका इस युद्ध में इजरायल की मदद ले रहा है?
इजरायल ने ईरान के खिलाफ इन हमलों में शामिल होने की पेशकश की थी, लेकिन अमेरिकी प्रशासन ने फिलहाल इजरायल को इस लड़ाई से दूर रहने के लिए कहा है ताकि क्षेत्रीय तनाव और ज्यादा न भड़के।
B-2 स्पिरिट बॉम्बर विमान की क्या खासियत है?
B-2 स्पिरिट अमेरिका का सबसे आधुनिक स्टील्थ स्ट्रैटेजिक बॉम्बर है। यह भारी सुरक्षा वाले राडार नेटवर्क को चकमा देकर भूमिगत बंकरों और परमाणु ठिकानों को नष्ट करने वाले 'बंकर बस्टर' बम गिराने में सक्षम है।
Resources
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