अरविंद केजरीवाल का बड़ा कदम: जस्टिस स्वर्णकांता की अदालत का किया बहिष्कार, अब करेंगे सत्याग्रह

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शराब नीति मामले में जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की अदालत की कार्यवाही से खुद को अलग कर लिया है। उन्होंने न्याय न मिलने का आरोप लगाते हुए सत्याग्रह शुरू करने का फैसला किया है।

अरविंद केजरीवाल का जस्टिस स्वर्णकांता की कोर्ट का बहिष्कार
Last UpdateApr 27, 2026, 3:22:21 PM
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Last updated: 27 अप्रैल 2026, 03:21 PM

अरविंद केजरीवाल का बड़ा फैसला: जस्टिस स्वर्णकांता की अदालत का किया बहिष्कार, 'सत्याग्रह' का ऐलान

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शराब नीति मामले में दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की अदालत की कार्यवाही में शामिल होने से इनकार कर दिया है। मुख्यमंत्री ने एक भावुक पत्र और वीडियो संदेश जारी कर अदालत की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए हैं और अब कानूनी लड़ाई के बजाय 'सत्याग्रह' का रास्ता चुनने की बात कही है।

अरविंद केजरीवाल और दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अदालत की कार्यवाही से खुद को अलग करने का निर्णय लिया है।

पूरी कहानी: अदालती कार्यवाही से सीधे टकराव तक

सोमवार को दिल्ली की राजनीति में उस वक्त हड़कंप मच गया जब अरविंद केजरीवाल ने साफ कर दिया कि न तो वे और न ही उनके वकील जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की अदालत में पेश होंगे। केजरीवाल ने आरोप लगाया है कि उन्हें इस विशेष अदालत से न्याय मिलने की उम्मीद खत्म हो गई है। उन्होंने अपनी अंतरात्मा की आवाज का हवाला देते हुए इस कानूनी प्रक्रिया से दूरी बना ली है।

केजरीवाल ने 9 मिनट 39 सेकंड का एक वीडियो संदेश भी जारी किया है, जिसमें उन्होंने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के खिलाफ अपनी शिकायतों की एक लंबी सूची साझा की है। उनका कहना है कि पिछली सुनवाइयों के दौरान उनके पक्ष को नजरअंदाज किया गया, जिससे उनकी निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार का उल्लंघन हुआ है। 'जाको राखे साइयां मार सके न कोय' की तर्ज पर उन्होंने अब जनता की अदालत और सत्याग्रह पर भरोसा जताया है।

यह विवाद तब और गहरा गया जब सीबीआई (CBI) से जुड़े शराब नीति मामले की सुनवाई होनी थी। केजरीवाल ने पत्र में लिखा है कि उन्होंने बहुत धैर्य के साथ कार्यवाही का इंतजार किया, लेकिन अब उन्हें लगता है कि प्रक्रिया केवल एक औपचारिकता बनकर रह गई है।

जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा और केजरीवाल विवाद
जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की कोर्ट में अब केजरीवाल का कोई प्रतिनिधि मौजूद नहीं रहेगा।

मुख्य किरदार और उनकी भूमिका

  • अरविंद केजरीवाल: दिल्ली के मुख्यमंत्री, जिन्होंने न्यायिक प्रक्रिया के एक हिस्से का बहिष्कार करने का अभूतपूर्व कदम उठाया है।
  • जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा: दिल्ली हाईकोर्ट की न्यायाधीश, जिनकी निष्पक्षता पर केजरीवाल ने सवाल उठाए हैं और जिनके सामने पेश होने से इनकार किया है।
  • सीबीआई (CBI): केंद्रीय जांच एजेंसी, जो दिल्ली शराब नीति मामले की जांच कर रही है और जिसकी दलीलों पर इस कोर्ट में सुनवाई चल रही है।

क्या है इस फैसले का असली मतलब?

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि किसी मौजूदा सुनवाई का इस तरह बहिष्कार करना एक 'हाई-रिस्क' कदम है। इसका सीधा मतलब यह है कि अब अदालत केजरीवाल के पक्ष को सुने बिना ही एकतरफा फैसला सुना सकती है। केजरीवाल की रणनीति अब कानूनी बचाव से हटकर राजनीतिक विमर्श की ओर मुड़ गई है। वह जनता के बीच यह संदेश देना चाहते हैं कि उन्हें व्यवस्था द्वारा निशाना बनाया जा रहा है।

अंतरात्मा की आवाज सुनकर मैंने यह फैसला लिया है। जब न्याय की उम्मीद ही खत्म हो जाए, तो सत्याग्रह ही एकमात्र रास्ता बचता है।

अरविंद केजरीवाल, मुख्यमंत्री, दिल्ली

दिल्ली के आम नागरिकों के लिए इसका मतलब है कि आने वाले दिनों में सड़क पर विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक गहमागहमी और बढ़ेगी। शासन और प्रशासन के बीच का यह तनाव दिल्ली के विकास कार्यों और नीतिगत फैसलों को भी प्रभावित कर सकता है।

दिल्ली हाईकोर्ट परिसर
न्यायिक बहिष्कार के बाद अब सबकी नजरें हाईकोर्ट के अगले कदम पर टिकी हैं।

आगे क्या होने वाला है?

कानूनी प्रक्रिया के मुताबिक, यदि कोई पक्षकार अदालत में पेश नहीं होता है, तो जज उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर कार्यवाही को आगे बढ़ा सकते हैं। जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए अवमानना की कार्यवाही शुरू कर सकती हैं या फिर केजरीवाल की अनुपस्थिति में ही आदेश पारित कर सकती हैं। वहीं, आम आदमी पार्टी ने संकेत दिए हैं कि वे इस मुद्दे को लेकर जनता के बीच जाएंगे और बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न: अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता की कोर्ट का बहिष्कार क्यों किया?
उत्तर: केजरीवाल का आरोप है कि उन्हें इस अदालत से निष्पक्ष न्याय की उम्मीद नहीं है। उन्होंने पिछली कार्यवाहियों का हवाला देते हुए पक्षपात का दावा किया है।

प्रश्न: क्या मुख्यमंत्री का वकील अदालत में पेश होगा?
उत्तर: नहीं, केजरीवाल ने स्पष्ट किया है कि न तो वे व्यक्तिगत रूप से और न ही उनका कोई कानूनी प्रतिनिधि इस कोर्ट की सुनवाई में भाग लेगा।

प्रश्न: अब इस मामले में कानूनी रूप से क्या हो सकता है?
उत्तर: अदालत 'एक्स-पार्टी' (एकतरफा) सुनवाई कर सकती है और केजरीवाल के खिलाफ प्रतिकूल आदेश या कोर्ट की अवमानना का नोटिस जारी कर सकती है।

प्रश्न: क्या यह शराब नीति मामले की पूरी सुनवाई का बहिष्कार है?
उत्तर: यह विशेष रूप से जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की अदालत में चल रही कार्यवाही का बहिष्कार है, न कि पूरी न्यायिक प्रणाली का।

प्रश्न: केजरीवाल द्वारा घोषित 'सत्याग्रह' क्या है?
उत्तर: इसका अर्थ है कि वे अब कोर्ट रूम की लड़ाई के बजाय सार्वजनिक रूप से राजनीतिक विरोध और अनशन जैसे शांतिपूर्ण तरीकों से अपनी बात रखेंगे।

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लेखक

अहमद सेज़र

वरिष्ठ संपादक

राजनीति, सरकार और सामान्य जनहित के विषयों में विशेषज्ञ।

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