जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा आज: राज्यसभा कार्यकाल खत्म होने के बाद मोदी मंत्रिपरिषद से हटे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट के इकलौते ईसाई चेहरे जॉर्ज कुरियन ने मंगलवार को केंद्रीय राज्य मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है, जिसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने तत्काल प्रभाव से मंजूर कर लिया है। मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद रहे कुरियन का कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो गया था, और भाजपा द्वारा उन्हें दोबारा उच्च सदन का टिकट न दिए जाने के बाद उनका यह कदम सामने आया है। इस हाई-प्रोफाइल इस्तीफे के साथ ही अब मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल के मंत्रिपरिषद में बड़े फेरबदल की सुगबुगाहट भी बेहद तेज हो गई है।

क्या है पूरा मामला और क्यों देना पड़ा इस्तीफा
65 वर्षीय भाजपा नेता जॉर्ज कुरियन मोदी सरकार 3.0 में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के साथ-साथ मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय में केंद्रीय राज्य मंत्री (MoS) की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उन्होंने 9 जून 2024 को मंत्री पद की शपथ ली थी और अगस्त 2024 में वे मध्य प्रदेश से राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुने गए थे। यह सीट केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के लोकसभा सदस्य चुने जाने के बाद खाली हुई थी। कुरियन का यह कार्यकाल 21 जून 2026 को समाप्त हो गया, जिसके ठीक दो दिन बाद उन्होंने मंत्रिपरिषद छोड़ दिया।राष्ट्रपति भवन द्वारा जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर संविधान के अनुच्छेद 75 के खंड (2) के तहत जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है। भाजपा ने 18 जून को 12 राज्यों की 26 राज्यसभा सीटों पर हुए चुनावों के लिए जब 4 जून को अपने उम्मीदवारों की सूची जारी की थी, तभी कुरियन का टिकट काट दिया गया था। संसद के किसी भी सदन का सदस्य न रहने के कारण तकनीकी और संवैधानिक नियमों के तहत उन्हें पद छोड़ना पड़ा।
राजनीतिक हलकों में यह चर्चा आम है कि मई 2026 में हुए केरल विधानसभा चुनावों में भाजपा के उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन न करने की वजह से कुरियन को दोबारा मौका नहीं मिला। केरल की 140 विधानसभा सीटों में से भाजपा केवल 3 सीटों पर ही जीत हासिल कर सकी थी। इस खराब प्रदर्शन के बाद शीर्ष नेतृत्व अब कुरियन को वापस संगठन या केरल की प्रांतीय राजनीति में सक्रिय करने की तैयारी कर रहा है।

राजनीतिक गलियारों में प्रतिक्रिया और समीकरण
जॉर्ज कुरियन केरल के प्रमुख ईसाई संप्रदाय 'सीरो-मालाबार कैथोलिक चर्च' से आते हैं। साल 2024 में उन्हें कैबिनेट में शामिल करना भाजपा की केरल के लगभग 17% ईसाई समुदाय के बीच पैठ मजबूत करने की एक सोची-समझी रणनीति थी। लोकसभा चुनाव में त्रिशूर सीट से सुरेश गोपी की 74,000 से अधिक वोटों की जीत में ईसाई मतदाताओं की बड़ी भूमिका मानी गई थी, जिसके पुरस्कार स्वरूप कुरियन को दिल्ली लाया गया था।
कुरियन के साथ-साथ एक अन्य केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू का भी राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हो चुका है और उन्हें भी दोबारा टिकट नहीं मिला था। हालांकि, बिट्टू ने अभी इस्तीफा नहीं दिया है और वे पद पर बने हुए हैं। इन दोनों मंत्रियों के टिकट कटने के बाद से ही मोदी मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल और कुछ मंत्रियों को संगठन में वापस भेजने की अटकलें लगाई जा रही हैं। इससे पहले पूर्व अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने भी जुलाई 2022 में अपना राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने पर इसी तरह इस्तीफा दिया था।
केरल और दक्षिण भारत की राजनीति पर असर
जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा दक्षिण भारत में भाजपा के लिए एक बड़े सांगठनिक बदलाव के दौर में आया है। इससे पहले तमिलनाडु भाजपा के प्रमुख चेहरा रहे पूर्व आईपीएस अधिकारी के. अन्नामलाई ने भी 2 जून को पार्टी से इस्तीफा दे दिया था और अपनी नई राजनीतिक पार्टी बनाने का ऐलान कर दिया है। कुरियन के सरकार से बाहर होने के बाद केंद्र सरकार में ईसाई समुदाय का प्रतिनिधित्व फिलहाल खत्म हो गया है।
कुरियन का भाजपा से नाता बेहद पुराना है। 20 सितंबर 1960 को केरल के कोट्टायम में जन्मे कुरियन सुप्रीम कोर्ट में वकील रहे हैं और 1980 में पार्टी की स्थापना के समय से ही इसके समर्पित कार्यकर्ता रहे हैं। वे राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष और वाजपेयी सरकार में रेल राज्य मंत्री ओ. राजगोपाल के ओएसडी भी रह चुके हैं। केरल दौरों के समय वे अक्सर पीएम मोदी और अमित शाह के भाषणों का मलयालम में अनुवाद करते नजर आते थे।
घटनाक्रम पर एक नज़र
- 9 जून 2024: जॉर्ज कुरियन ने मोदी सरकार 3.0 में केंद्रीय राज्य मंत्री के रूप में शपथ ली।
- अगस्त 2024: मध्य प्रदेश से राज्यसभा सदस्य के रूप में निर्विरोध चुने गए।
- 4 जून 2026: भाजपा ने राज्यसभा चुनाव के उम्मीदवारों की लिस्ट में कुरियन का नाम शामिल नहीं किया।
- 21 जून 2026: राज्यसभा सांसद के तौर पर छह साल (सिंधिया के बचे कार्यकाल) का समय पूरा हुआ।
- 23 जून 2026: केंद्रीय मंत्रिपरिषद से आधिकारिक इस्तीफा, राष्ट्रपति द्वारा मंजूर।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
जॉर्ज कुरियन ने केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा क्यों दिया?
जॉर्ज कुरियन का राज्यसभा सदस्य के तौर पर कार्यकाल 21 जून 2026 को समाप्त हो गया था। भाजपा ने उन्हें दोबारा राज्यसभा का टिकट नहीं दिया, जिसके कारण संसद सदस्य न रहने पर उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया।
जॉर्ज कुरियन मोदी सरकार में किस पद पर तैनात थे?
वे मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय और मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय में राज्य मंत्री (MoS) की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
क्या राज्यसभा कार्यकाल खत्म होते ही मंत्री पद छोड़ना अनिवार्य है?
संवैधानिक नियमों के अनुसार कोई भी व्यक्ति बिना संसद सदस्य (लोकसभा या राज्यसभा) रहे अधिकतम 6 महीने तक ही मंत्री रह सकता है। हालांकि, कुरियन ने कार्यकाल खत्म होने के दूसरे ही दिन इस्तीफा दे दिया क्योंकि पार्टी उन्हें अब सांगठनिक भूमिका में भेजने पर विचार कर रही है।
जॉर्ज कुरियन का केरल की राजनीति में क्या महत्व है?
कुरियन केरल के सीरो-मालाबार कैथोलिक चर्च ईसाई समुदाय से आते हैं। वे 1980 से भाजपा कार्यकर्ता हैं और केरल में ईसाई वोट बैंक को पार्टी से जोड़ने के लिए भाजपा का सबसे प्रमुख चेहरा रहे हैं।
क्या मोदी कैबिनेट में फेरबदल होने वाला है?
जॉर्ज कुरियन के इस्तीफे और रवनीत सिंह बिट्टू को दोबारा राज्यसभा न भेजे जाने के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल में बड़े फेरबदल की अटकलें तेज हैं, हालांकि भाजपा ने अभी इस पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
संसाधन
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