ट्रंप की मांग खारिज: इजरायल ने सीरिया और लेबनान से सेना हटाने से किया साफ इनकार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दक्षिणी सीरिया और लेबनान से इजरायली सेना को हटाने की मांग को इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सुरक्षा कारणों का हवाला देकर पूरी तरह ठुकरा दिया है।

ट्रंप की सलाह पर इजरायल की रोक, सीरिया-लेबनान से सेना हटाने से इनकार
अंतिम अपडेटJul 16, 2026, 11:35:03 AM
1 घंटा पहले
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सीरिया और लेबनान से सेना हटाने की अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की मांग इजरायल ने ठुकराई

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच हुई बेहद अहम टेलीफोन बातचीत में मध्य पूर्व के सुरक्षा समीकरणों को लेकर गंभीर मतभेद सामने आए हैं। ट्रंप ने सीधे तौर पर नेतन्याहू को दक्षिणी सीरिया और लेबनान से इजरायली सैनिकों की वापसी शुरू करने की हिदायत दी, जिसे इजरायली प्रधानमंत्री ने सुरक्षा कारणों का हवाला देकर पूरी तरह खारिज कर दिया। यह टकराव ऐसे समय में आया है जब हाल ही में तुर्की में नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रंप की सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शरा के साथ बेहद महत्वपूर्ण बैठक हुई थी।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू
फोन वार्ता के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने नेतन्याहू को दी सैनिकों को पीछे हटाने की नसीहत। — Jagran

क्या है पूरा मामला और अमेरिकी रुख

अमेरिकी और इजरायली अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, पिछले सप्ताह दोनों नेताओं के बीच एक बेहद गोपनीय फोन कॉल पर बातचीत हुई। अमेरिकी न्यूज वेबसाइट एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने सीधे शब्दों में नेतन्याहू से कहा कि सीरियाई क्षेत्र में इजरायली सेना की मौजूदगी से वहां तनाव भड़क रहा है जो एक बड़े युद्ध में बदल सकता है। ट्रंप ने पर्दे के पीछे से अपनी बात स्पष्ट करते हुए कहा, "वे नहीं चाहते कि आप वहां रहें, आपको पीछे हटना चाहिए और अपनी सेना को कहीं और तैनात करना चाहिए।"

दरअसल, दिसंबर 2024 में असद शासन के पतन के बाद से कब्जे में लिए गए सीरियाई क्षेत्रों से इजरायली सेना की धीरे-धीरे वापसी को लेकर अमेरिकी प्रशासन लगातार कोशिशें कर रहा है। व्हाइट हाउस इस दिशा में इजरायल और सीरिया के बीच एक नया सुरक्षा समझौता भी कराना चाहता है। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि नेतन्याहू वह रियायतें देने के लिए कतई तैयार नहीं हैं जो अमेरिका इस क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए चाहता है।

इजरायली सेना की तैनाती
दक्षिणी लेबनान और सीरियाई सीमाओं पर रणनीतिक तैनाती बनाए रखना चाहता है इजरायल। — Vietnam.vn

बेंजामिन नेतन्याहू का रुख और इजरायल की सुरक्षा दलील

ट्रंप के इस कड़े रुख के जवाब में इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक आधिकारिक बयान जारी कर सीमा पर 'सुरक्षा क्षेत्र' बनाए रखने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। नेतन्याहू ने ट्रंप से साफ कहा कि इजरायल की सीमाओं पर रणनीतिक सैन्य मौजूदगी देश की हिफाजत के लिए बेहद जरूरी है। इजरायली सरकार का तर्क है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में ईरान समर्थित समूहों और हिजबुल्लाह की गतिविधियां आज भी देश के लिए एक बड़ा खतरा बनी हुई हैं, इसलिए सेना को आनन-फानन में वापस बुलाना मुमकिन नहीं है।

इसके साथ ही, इजरायल में अगले तीन महीनों में आम चुनाव होने वाले हैं, जो नेतन्याहू के राजनीतिक भविष्य के लिए बेहद निर्णायक माने जा रहे हैं। घरेलू राजनीतिक दबाव और सुरक्षा चिंताओं के कारण इस बात की उम्मीद बेहद कम है कि वह अपने पैर पीछे खींचने का कोई भी कदम उठाएंगे। वहीं दूसरी तरफ, इजरायल द्वारा दक्षिणी लेबनान के हददह और बिन्ट जेबेल जैसे शहरों में घरों को नष्ट करने और जलाने की लगातार आ रही खबरों ने तनाव को और बढ़ा दिया है, जिसे लेबनान ने समझौते का खुला उल्लंघन बताया है।

सीरिया और लेबनान के मोर्चे पर वार्ता की स्थिति

इस भारी राजनीतिक तनाव के बावजूद, रोम में अमेरिकी मध्यस्थता के तहत इजरायल और लेबनान के बीच छठे दौर की वार्ता संपन्न हुई है। दोनों पक्ष दो प्रायोगिक क्षेत्रों (पायलट प्रोजेक्ट) को लागू करने की रूपरेखा पर सहमत हुए हैं, जिसके तहत दक्षिणी लेबनान के कुछ इलाकों का नियंत्रण इजरायली सेना से हटाकर लेबनानी सशस्त्र बलों (एलएएफ) को सौंपा जाना है। इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने पुष्टि की है कि देश इस प्रक्रिया के लिए तैयार है, लेकिन उन्होंने साफ किया कि हिजबुल्लाह के पूरी तरह निरस्त्रीकरण तक इजरायली सेना सीमा के 10 किलोमीटर भीतर सुरक्षा क्षेत्र में जमी रहेगी।

वहीं, लेबनान के पर्यावरण मंत्रालय ने खुलासा किया है कि 2023 से चल रहे इस सीमा पार संघर्ष के कारण देश के दक्षिणी हिस्से में 7,000 हेक्टेयर से अधिक वन क्षेत्र जलकर खाक हो चुके हैं और अब तक कुल पर्यावरणीय क्षति 51 करोड़ 20 लाख अमेरिकी डॉलर से अधिक हो चुकी है।

भारतीय दृष्टिकोण से इसके मायने

मध्य पूर्व में बढ़ता यह राजनीतिक और सैन्य गतिरोध वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों और सुरक्षा समीकरणों को सीधे तौर पर प्रभावित करता है। भारत के इस क्षेत्र के सभी देशों के साथ मजबूत कूटनीतिक और आर्थिक संबंध हैं। इस क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ने से खाड़ी देशों में रहने वाले लाखों प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा के साथ-साथ भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर भी सीधा असर पड़ता है। अमेरिका और इजरायल जैसी दो बड़ी महाशक्तियों के बीच इस तरह के खुले मतभेद आने वाले समय में वैश्विक कूटनीति के लिए एक नया मोड़ साबित हो सकते हैं।

घटनाक्रम पर एक नजर

  • अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बेंजामिन नेतन्याहू से दक्षिणी सीरिया और लेबनान से इजरायली सैनिक हटाने को कहा।
  • इजरायली पीएम नेतन्याहू ने सीमा सुरक्षा का हवाला देते हुए ट्रंप की इस मांग को साफ तौर पर ठुकरा दिया।
  • रोम में अमेरिकी मध्यस्थता में इजरायल और लेबनान के बीच छठे दौर की वार्ता पूरी हुई, जहां प्रायोगिक सैन्य वापसी पर चर्चा हुई।
  • संघर्ष के कारण लेबनान में 7,000 हेक्टेयर से अधिक वन नष्ट हो चुके हैं और आर्थिक नुकसान 11 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।
  • इजरायल में तीन महीने बाद होने वाले आम चुनाव के कारण नेतन्याहू द्वारा कोई भी बड़ा रक्षा समझौता करने की संभावना बेहद कम है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या इजरायल दक्षिणी सीरिया से अपनी सेना पूरी तरह हटा रहा है?

नहीं, इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की इस मांग को साफ तौर पर खारिज कर दिया है। इजरायल का मानना है कि देश की सुरक्षा और ईरान समर्थित तत्वों से रक्षा के लिए सीमा पर सेना की तैनाती आवश्यक है।

रोम में हुई इजरायल-लेबनान वार्ता का क्या नतीजा निकला?

रोम में संपन्न हुई छठे दौर की वार्ता में दोनों पक्ष प्रायोगिक क्षेत्रों (पायलट जोन) से इजरायली सैनिकों की वापसी की रूपरेखा तय करने पर सहमत हुए हैं। हालांकि, इजरायल का कहना है कि जब तक हिजबुल्लाह का खतरा समाप्त नहीं होता, सुरक्षा क्षेत्र में उसकी सेना मौजूद रहेगी।

ट्रंप ने सीरिया को लेकर क्या चिंता जताई है?

ट्रंप का मानना है कि दक्षिणी सीरिया में इजरायली सेना की मौजूदगी से पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ रहा है, जिससे आने वाले समय में एक बड़ा और घातक युद्ध भड़क सकता है।

इस युद्ध से लेबनान को कितना नुकसान हुआ है?

लेबनान के पर्यावरण मंत्रालय के अनुसार, दक्षिणी हिस्से में जारी आग के कारण 7,000 हेक्टेयर से अधिक वन क्षेत्र नष्ट हो चुका है, जिससे पर्यावरण को 51 करोड़ 20 लाख डॉलर का नुकसान पहुंचा है। वहीं कुल प्रत्यक्ष आर्थिक नुकसान करीब 11 अरब अमेरिकी डॉलर आंका गया है।

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लेखक

Ahmed Sezer

वरिष्ठ संपादक

राजनीति, सरकार और सामान्य जनहित के विषयों में विशेषज्ञ।

यह लेख AI-सहायता प्राप्त संपादकीय टूल की मदद से तैयार किया गया और प्रकाशन से पहले Trend Digest के संपादकीय मानकों के तहत समीक्षा की गई।

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