तृणमूल कांग्रेस में बड़ा तख्तापलट: ममता बनर्जी अध्यक्ष पद से बेदखल, अरूप रॉय बने नए चेयरमैन; अभिषेक सस्पेंड

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस पूरी तरह बिखर गई है. बागी विधायकों ने ममता बनर्जी को हटाकर अरूप रॉय को नया अध्यक्ष नियुक्त किया और अभिषेक बनर्जी को सस्पेंड कर दिया है.

TMC Split: ममता बनर्जी अध्यक्ष पद से हटीं, अरूप रॉय बने नए चीफ
अंतिम अपडेटJun 22, 2026, 10:22:31 PM
1 सप्ताह पहले
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पश्चिम बंगाल में लगातार 15 सालों तक सत्ता में रहने वाली ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) सोमवार को ताश के पत्तों की तरह बिखर गई. कोलकाता के न्यू टाउन स्थित एक होटल में जुटे बागी नेताओं ने एक अभूतपूर्व तख्तापलट करते हुए पार्टी संस्थापक ममता बनर्जी को अध्यक्ष पद से बेदखल कर दिया और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी को पार्टी से सस्पेंड कर दिया है. बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद उपजा यह अंतर्विरोध अब पार्टी के संगठनात्मक ढांचे पर पूरी तरह हावी हो चुका है.

ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में बागी गुट की बैठक
न्यू टाउन के होटल में नई संगठनात्मक समिति का गठन करते बागी नेता — AajTak

ऐसे बदला घटनाक्रम

सोमवार को विधानसभा में बजट सत्र की समाप्ति के ठीक बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई. विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल के 60 विधायकों और कोलकाता नगर निगम (KMC) समेत तीन जिलों के 70 पूर्व पार्षदों ने न्यू टाउन के एक होटल में बंद कमरे में विशेष सत्र आयोजित किया. इस बैठक में करीब 500 नेता शामिल हुए, जिनमें 16 जिला अध्यक्ष भी मौजूद थे. बैठक में तृणमूल के संविधान की धारा-20 का हवाला देते हुए पुरानी राष्ट्रीय कार्यसमिति को अवैध घोषित कर दिया गया, क्योंकि फरवरी 2022 के बाद से इसकी कोई बैठक नहीं बुलाई गई थी.

इस विशेष सत्र में सर्वसम्मति से हावड़ा मध्य के विधायक अरूप रॉय को ममता बनर्जी की जगह पार्टी का नया चेयरपर्सन नियुक्त किया गया. इसके साथ ही 30 सदस्यीय नई राष्ट्रीय कार्यसमिति का गठन किया गया, जिसमें पूर्व मंत्री अरूप विश्वास, फिरहाद हकीम, रथिन घोष और सबीना यास्मीन को उपाध्यक्ष बनाया गया है. ऋतब्रत बनर्जी, जावेद खान और संदीपन साहा को महासचिव नियुक्त किया गया, जबकि रघुनाथगंज के विधायक अखरुज्जमान अंसारी को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है.

इस बगावत का सबसे दिलचस्प पहलू यह था कि बैठक के मंच पर महात्मा गांधी, रवींद्रनाथ टैगोर, काजी नजरुल इस्लाम और बीआर अंबेडकर की तस्वीरें तो थीं, लेकिन पार्टी का मुख्य चेहरा रहीं ममता बनर्जी की तस्वीर पूरी तरह गायब थी. ऋतब्रत बनर्जी ने पत्रकारों से कहा कि यह असली या नकली का सवाल नहीं है, बल्कि हम ही असली तृणमूल कांग्रेस हैं और इस पूरी कार्यवाही का विवरण निर्वाचन आयोग को भेजा जाएगा.

जड़ों में छिपा राजनीतिक संकट

पार्टी के इस तरह अचानक ढहने के पीछे केवल चुनावी हार नहीं, बल्कि सालों से पनप रहा वैचारिक शून्य और सत्ता केंद्रित राजनीति है. विश्लेषकों का मानना है कि 1998 में कांग्रेस से अलग होकर बनी इस पार्टी का कोई निश्चित वैचारिक आधार नहीं था. ममता बनर्जी की राजनीति मुख्य रूप से लोकप्रिय घोषणाओं जैसे सबुज साथी, कन्याश्री और लक्ष्मी भंडार जैसी योजनाओं पर टिकी थी. चुनाव हारते ही नेताओं को लगा कि अब जनता से जुड़ाव का कोई आधार नहीं बचा है, जिससे यह ढांचा बिखर गया.

इसके अलावा, ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी द्वारा पार्टी को कॉर्पोरेट स्टाइल में चलाने और आई-पैक जैसी बाहरी परामर्श कंपनियों को निर्णय प्रक्रिया में शामिल करने से जमीनी कार्यकर्ताओं में तीखी नाराजगी थी. बागी नेताओं का आरोप है कि अभिषेक बनर्जी ने एक बंद आंतरिक मंडली बना ली थी, जिससे संवाद पूरी तरह असंभव हो गया था.

तृणमूल के तीन धड़ों के नेता
ममता बनर्जी और उनके सहयोगी जो अब अलग-अलग गुटों में बंट चुके हैं — BBC

आधिकारिक बयान और प्रतिक्रियाएं

इस तख्तापलट पर ममता बनर्जी के वफादार खेमे ने बेहद सख्त रुख अपनाया है. तृणमूल विधायक कुणाल घोष ने इस पूरे घटनाक्रम को खारिज करते हुए कहा:

यह एक कॉमेडी शो है. टीएमसी से निकाले गए एक व्यक्ति ने एक विशेष सत्र बुलाया है. मामला कोर्ट में है और हमें यकीन है कि न्याय होगा. हम ऐसी हास्यास्पद हरकतों को कोई महत्व नहीं देते. टीएमसी का मतलब ममता बनर्जी है. बाकी सब सर्कस है.

कुणाल घोष, टीएमसी विधायक

दूसरी ओर, ममता बनर्जी की आधिकारिक टीएमसी ने अनुशासन समिति के माध्यम से बागी खेमे में शामिल होने वाले वरिष्ठ नेताओं फिरहाद हकीम, अरूप विश्वास, अरूप रॉय, जावेद खान, रथिन घोष और बिप्लब मित्रा को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. वहीं, लोकसभा में वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय ने चार अन्य सांसदों के साथ स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात कर संसद में बगावत करने वाले सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग की है.

भविष्य के समीकरण और परिणाम

इस नाटकीय मोड़ के बाद तृणमूल कांग्रेस अब स्पष्ट रूप से तीन धड़ों में बंट चुकी है:

  • कालीघाट तृणमूल: ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट, जो कानूनी और राजनीतिक अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है.
  • विधायक गुट (ऋतब्रत गुट): जो बंगाल विधानसभा में विपक्ष की भूमिका निभा रहा है और खुद को असली संगठनात्मक नेतृत्व बता रहा है.
  • सांसद गुट (काकोली घोष दस्तीदार गुट): 20 लोकसभा सांसदों का समूह जिसने नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय कर केंद्र में बीजेपी नीत एनडीए को समर्थन दिया है.

पार्टी की राजनीतिक लड़ाई अब वित्तीय नियंत्रण पर आकर टिक गई है. बागी विधायकों की शिकायत के बाद पुलिस ने तृणमूल कांग्रेस के तीन बैंक खातों में जमा करीब 440 करोड़ रुपये के फंड पर डेबिट फ्रीज लगा दिया है, जिससे कोई भी बाहरी लेन-देन नहीं हो सकेगा. बागी गुट अब पार्टी के नाम, सिंबल और करीब 1,100 करोड़ रुपये के कुल फंड पर दावा ठोकने के लिए कानूनी रास्ते तलाश रहा है.

आगे क्या होगा?

बागी गुट ने घोषणा की है कि वे अगले 21 दिनों के भीतर सभी फ्रंटल संगठनों और जिला कमेटियों का पुनर्गठन करेंगे. पार्टी के नाम और 'दो फूलों वाले' चुनाव चिह्न पर मालिकाना हक की जंग अब सीधे निर्वाचन आयोग और सुप्रीम कोर्ट की चौखट पर तय होगी. ममता बनर्जी ने भवानीपुर सीट पर अपनी हार को अदालत में चुनौती दी है और वह इस्तीफा न देने पर अड़ी हुई हैं.


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1: तृणमूल कांग्रेस का नया अध्यक्ष किसे चुना गया है?
उत्तर: बागी गुट ने सर्वसम्मति से हावड़ा मध्य के विधायक अरूप रॉय को तृणमूल कांग्रेस का नया अध्यक्ष (चेयरपर्सन) नियुक्त किया है.

प्रश्न 2: क्या ममता बनर्जी को पार्टी से निकाल दिया गया है?
उत्तर: बागी गुट ने ममता बनर्जी को अध्यक्ष पद से हटा दिया है, हालांकि उन्होंने प्रस्ताव दिया है कि यदि ममता बनर्जी चाहें तो वे नए गुट की मुख्य सलाहकार बन सकती हैं.

प्रश्न 3: अभिषेक बनर्जी के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है?
उत्तर: ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट ने अभिषेक बनर्जी को ऑल इंडिया जनरल सेक्रेटरी के पद से हटाते हुए पार्टी से सस्पेंड कर दिया है.

प्रश्न 4: तृणमूल कांग्रेस के कितने गुट हो गए हैं?
उत्तर: तृणमूल कांग्रेस अब तीन हिस्सों में बंट गई है - ममता बनर्जी की कालीघाट तृणमूल, ऋतब्रत बनर्जी का विधायक गुट और काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व वाला सांसदों का गुट जो एनडीए के साथ है.

प्रश्न 5: टीएमसी के बैंक खातों पर क्या कार्रवाई हुई है?
उत्तर: बागी विधायकों की साइबर क्राइम थाने में शिकायत के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए टीएमसी के तीन बैंक खातों में मौजूद करीब 440 करोड़ रुपये के फंड को फ्रीज कर दिया है.

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लेखक

Ahmed Sezer

वरिष्ठ संपादक

राजनीति, सरकार और सामान्य जनहित के विषयों में विशेषज्ञ।

यह लेख AI-सहायता प्राप्त संपादकीय टूल की मदद से तैयार किया गया और प्रकाशन से पहले Trend Digest के संपादकीय मानकों के तहत समीक्षा की गई।

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