तमिलनाडु सरकार पर आज बड़ा मोड़: विजय और डीएमके आमने-सामने

तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर राजनीतिक तनाव बढ़ गया है। विजय की टीवीके, डीएमके और राज्यपाल की भूमिका पर बहस तेज हो गई है।

तमिलनाडु में विजय की टीवीके और डीएमके में टकराव
Last UpdateMay 8, 2026, 1:58:28 AM
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तमिलनाडु सरकार पर आज बड़ा मोड़: विजय की टीवीके और डीएमके के बीच बढ़ा टकराव

Last updated: 7 मई 2026

तमिलनाडु की राजनीति में इस वक्त सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर सरकार कौन बनाएगा और कब। अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी टीवीके ने जिस आक्रामक अंदाज़ में सरकार बनाने का दावा पेश किया है, उसने पूरे राज्य की राजनीति का तापमान बढ़ा दिया है। मामला सिर्फ सत्ता का नहीं रह गया, बल्कि राज्यपाल की भूमिका, गठबंधन राजनीति और क्षेत्रीय दलों की ताकत पर भी बहस तेज हो गई है।

दिलचस्प बात यह है कि जिन विजय को कुछ साल पहले तक सिर्फ सिनेमा के पर्दे का सुपरस्टार माना जाता था, वही अब तमिलनाडु की सत्ता के सबसे बड़े दावेदार बनकर उभरे हैं। दक्षिण की राजनीति में हवा कब करवट ले ले, कोई नहीं जानता — फिलहाल यही कहावत सबसे ज़्यादा फिट बैठ रही है।

विजय की सरकार गठन पर चर्चा
सरकार गठन को लेकर चेन्नई में राजनीतिक हलचल लगातार तेज हो रही है।

अब तक क्या सामने आया है

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद किसी भी दल को साफ बहुमत नहीं मिलने से स्थिति उलझ गई। विजय की टीवीके ने दावा किया कि जनता ने बदलाव के लिए वोट दिया है और ऐसे में सरकार बनाने का पहला अधिकार उसी का बनता है। लेकिन राज्यपाल से मुलाकात और शपथ ग्रहण की तारीख को लेकर कई दिनों तक असमंजस बना रहा।

इसी बीच टीवीके के नेताओं ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि अगर डीएमके और एआईएडीएमके मिलकर सत्ता बनाने की कोशिश करते हैं, तो पार्टी के सभी विधायक इस्तीफा देने को तैयार हैं। यह बयान सीधे तौर पर दबाव बनाने की रणनीति माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि टीवीके अपने समर्थकों को यह संदेश देना चाहती है कि वह समझौते की राजनीति नहीं करेगी।

विजय ने एनडीए से समर्थन लेने से भी इनकार कर दिया। इसके बजाय उन्होंने वामपंथी दलों और कुछ क्षेत्रीय सहयोगियों से संपर्क बढ़ाया। इससे साफ संकेत मिला कि टीवीके अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाए रखना चाहती है। अगर आप दक्षिण भारतीय राजनीति को करीब से देख रहे हैं, तो आपको पता होगा कि तमिलनाडु में वैचारिक दूरी अक्सर चुनावी समीकरण तय करती है।

विजय और राज्यपाल विवाद
राजभवन और टीवीके के बीच बढ़ते तनाव ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया।

एक और दिलचस्प घटना तब सामने आई जब टीवीके का एक उम्मीदवार सिर्फ एक वोट से चुनाव जीत गया। इस नतीजे को पार्टी कार्यकर्ता जनता के मूड का संकेत बता रहे हैं। वहीं विरोधी दल इसे राजनीतिक लहर नहीं, बल्कि अस्थायी उत्साह करार दे रहे हैं।

डीएमके के विस्तार और उसके सामाजिक समीकरणों को लेकर भी चर्चा तेज है। लंबे समय से द्रविड़ राजनीति पर आधारित तमिलनाडु में अब फिल्मी लोकप्रियता और युवा वोट बैंक नए समीकरण बना रहे हैं।

टीवीके
विजय की राजनीतिक पार्टी, जिसने हालिया चुनाव में पहली बार बड़े स्तर पर चुनौती पेश की।
डीएमके
तमिलनाडु की प्रमुख द्रविड़ पार्टी, जिसने दशकों से राज्य की राजनीति में मजबूत पकड़ बनाए रखी है।
राज्यपाल
संवैधानिक पद, जो सरकार गठन की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाता है।

पक्ष और विपक्ष की प्रतिक्रियाएं

बीजेपी नेता खुशबू सुंदर ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अगर जनता ने विजय को चुना है तो उन्हें सरकार चलाने का मौका मिलना चाहिए। उनके बयान ने राष्ट्रीय राजनीति को भी इस बहस में खींच लिया।

जनता का फैसला सर्वोपरि होना चाहिए।

खुशबू सुंदर, भाजपा नेता

उधर अभिनेता और राजनेता कमल हासन ने भी विजय के समर्थन में आवाज उठाई। उन्होंने कहा कि सरकार बनाने से रोकना तमिलनाडु के जनादेश का अपमान माना जाएगा।

यह सिर्फ एक पार्टी का सवाल नहीं, बल्कि जनता के सम्मान का मुद्दा है।

कमल हासन, अभिनेता और नेता

टीवीके कार्यकर्ताओं का गुस्सा भी खुलकर सामने आया। Raj Bhavan से दो बार बैरंग लौटने के बाद पार्टी समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किए। कई जगहों पर नारेबाजी और प्रदर्शन की तस्वीरें सामने आईं।

इसका असर आम लोगों पर क्या पड़ेगा

तमिलनाडु देश के सबसे बड़े औद्योगिक और निवेश केंद्रों में गिना जाता है। ऐसे में राजनीतिक अस्थिरता का असर निवेश, सरकारी फैसलों और प्रशासनिक कामकाज पर पड़ सकता है। खासकर ऑटोमोबाइल, आईटी और बंदरगाह उद्योग से जुड़े कारोबारी अगले कदम पर नजर बनाए हुए हैं।

राजनीतिक खींचतान लंबी चली तो नई योजनाओं और बजट संबंधी फैसलों में देरी हो सकती है। छात्रों, सरकारी कर्मचारियों और छोटे कारोबारियों के बीच भी यही चिंता दिख रही है कि स्थिर सरकार कब बनेगी।

कमल हासन और विजय
कमल हासन समेत कई बड़े चेहरे विजय के समर्थन में खुलकर सामने आए हैं।

राजनीति में दोस्ती और दूरी दोनों मौसम की तरह बदलती हैं। यही वजह है कि अगले कुछ दिन तमिलनाडु के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं।

आगे क्या हो सकता है

राज्यपाल की ओर से सरकार गठन को लेकर अंतिम फैसला जल्द सामने आ सकता है। अगर टीवीके बहुमत साबित करने में सफल रहती है, तो विजय पहली बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं।

दूसरी तरफ डीएमके और एआईएडीएमके भी अपने विकल्प खुले रखे हुए हैं। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि छोटे दलों और निर्दलीय विधायकों की भूमिका निर्णायक बन सकती है।

चेन्नई में अगले कुछ दिनों तक बैठकों और रणनीतिक बातचीत का दौर जारी रहने वाला है।

एक नजर में

  • विजय की टीवीके ने सरकार बनाने का दावा मजबूत किया।
  • राज्यपाल की भूमिका को लेकर विवाद बढ़ा।
  • टीवीके ने एनडीए से समर्थन लेने से इनकार किया।
  • कमल हासन और खुशबू सुंदर ने विजय का समर्थन किया।
  • टीवीके विधायकों ने सामूहिक इस्तीफे की चेतावनी दी।
  • तमिलनाडु में राजनीतिक अस्थिरता की चर्चा तेज हुई।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या विजय तमिलनाडु के अगले मुख्यमंत्री बन सकते हैं?

अगर टीवीके बहुमत साबित कर देती है और राज्यपाल सरकार गठन का न्योता देते हैं, तो विजय मुख्यमंत्री बन सकते हैं। फिलहाल राजनीतिक बातचीत जारी है।

टीवीके ने एनडीए का समर्थन क्यों नहीं लिया?

पार्टी ने कहा है कि वह अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान बनाए रखना चाहती है। इसी वजह से उसने वैकल्पिक सहयोगियों से संपर्क किया।

तमिलनाडु में सरकार गठन में देरी क्यों हो रही है?

किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने और गठबंधन समीकरणों के उलझने की वजह से प्रक्रिया लंबी खिंच रही है।

कमल हासन ने विजय के समर्थन में क्या कहा?

कमल हासन ने कहा कि जनता के जनादेश का सम्मान होना चाहिए और विजय को सरकार बनाने का अवसर मिलना चाहिए।

क्या इस राजनीतिक संकट का असर कारोबार पर पड़ेगा?

अगर अस्थिरता लंबी चली तो निवेश और प्रशासनिक फैसलों में देरी हो सकती है। उद्योग जगत फिलहाल स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

Ahmed Sezer profile photo

लेखक

अहमद सेज़र

वरिष्ठ संपादक

राजनीति, सरकार और सामान्य जनहित के विषयों में विशेषज्ञ।

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