अंतिम अद्यतन: 18 जुलाई 2026, शाम 4:34 बजे
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के पीछे क्यों तेज हुआ जंतर-मंतर आंदोलन?
21 दिन की भूख हड़ताल के बाद सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल ले जाए जाने के साथ ही शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की मांग वाला आंदोलन नए चरण में पहुंच गया है। प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, परीक्षा पेपर लीक पर जवाबदेही और परीक्षा व्यवस्था में संस्थागत सुधार की मांग कर रहे हैं। वांगचुक के अस्पताल पहुंचने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने की घोषणा की और 20 जुलाई को संसद की ओर प्रस्तावित मार्च जारी रखने की बात कही।

मुख्य बात
- सोनम वांगचुक 28 जून से जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे थे और 18 जुलाई को उनका अनशन 21वें दिन में पहुंच गया।
- दिल्ली पुलिस ने कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश और चिकित्सकों की सलाह के आधार पर बिगड़ती सेहत के कारण उन्हें अस्पताल ले जाया गया।
- प्रदर्शन की प्रमुख मांगों में धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, पेपर लीक पर जवाबदेही और परीक्षा प्रणाली में सुधार शामिल हैं।
- वांगचुक को अस्पताल ले जाए जाने के बाद अभिजीत दीपके ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने की घोषणा की।
- प्रदर्शनकारियों ने 20 जुलाई को संसद की ओर प्रस्तावित मार्च जारी रखने की बात कही है।
घटनाक्रम कैसे बदला
आंदोलन की शुरुआत परीक्षा पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी कथित गड़बड़ियों पर जवाबदेही की मांग के साथ हुई। कॉकरोच जनता पार्टी ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई और कहा कि यदि वह पद नहीं छोड़ते हैं तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें हटाएं। सोनम वांगचुक इसी मांग के समर्थन में प्रदर्शन से जुड़े और 28 जून से भूख हड़ताल पर बैठ गए। उनके साथ छात्र संगठन आइसा के सदस्य नेहा, मनीष और आमीन भी अनशन पर रहे।
प्रदर्शन लंबा खिंचने के साथ वांगचुक की सेहत चिंता का विषय बन गई। 16 जुलाई को दिल्ली हाई कोर्ट ने सरकार को उनकी सेहत पर निगरानी रखने का निर्देश दिया। नई दिल्ली के पुलिस उपायुक्त सचिन शर्मा के अनुसार, स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद अदालत के निर्देश और चिकित्सकीय सलाह के अनुरूप उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे अंगमो ने कहा कि उनकी सहमति के बिना मुंह या नस के जरिए कुछ भी न दिया जाए।

वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाए जाने के बाद अभिजीत दीपके मंच पर पहुंचे और भूख हड़ताल शुरू करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि आंदोलन समाप्त नहीं होगा और संसद मार्च तय कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेगा। इसके बाद संगठन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग भी उठाई। पुलिस कार्रवाई को लेकर प्रदर्शनकारियों ने बल प्रयोग के आरोप लगाए, जबकि पुलिस ने वांगचुक को अस्पताल ले जाने का कारण उनकी बिगड़ती सेहत और अदालत के निर्देशों को बताया।
यह मामला क्यों अहम है
यह आंदोलन केवल एक मंत्री के इस्तीफे तक सीमित मांग के रूप में पेश नहीं किया जा रहा। अभिजीत दीपके ने सरकार से देश में हुए पेपर लीक पर श्वेत पत्र जारी करने, प्रत्येक पेपर लीक के 14 दिनों के भीतर संसद में जवाबदेही तय करने और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को अधिक स्वायत्त स्वरूप देने के लिए स्वतंत्र आयोग बनाने जैसी मांगें भी रखी हैं। इससे आंदोलन का केंद्र व्यक्तिगत जवाबदेही के साथ परीक्षा व्यवस्था में संस्थागत बदलाव पर भी है।

भारत में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए इस आंदोलन का सीधा सवाल परीक्षा की विश्वसनीयता और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ता है। प्रदर्शन में शामिल मनीष ने कहा कि उनकी भूख हड़ताल जारी रहेगी जब तक सरकार जिम्मेदारी लेने और धर्मेंद्र प्रधान को हटाने के लिए तैयार नहीं होती। आमीन ने शिक्षा नीति और शिक्षा के निजीकरण से जुड़े सवाल भी उठाए हैं।
- श्वेत पत्र
- किसी बड़े सार्वजनिक मुद्दे पर सरकार की ओर से तथ्य, स्थिति और नीति संबंधी जानकारी प्रस्तुत करने वाला औपचारिक दस्तावेज।
- राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी
- वह संस्था जिसका अधिक स्वायत्त और संस्थागत स्वरूप सुनिश्चित करने के लिए आंदोलनकारियों ने स्वतंत्र आयोग की मांग रखी है।
अब आगे क्या होगा
प्रदर्शनकारियों के अनुसार अगला तय कदम 20 जुलाई को संसद की ओर मार्च है। कॉकरोच जनता पार्टी ने कहा है कि वांगचुक के अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद कार्यक्रम जारी रहेगा, जबकि जंतर-मंतर पर अन्य अनशनकारी भी अपनी भूख हड़ताल जारी रखने की बात कह रहे हैं।
सोनम वांगचुक अस्पताल में हैं और प्रदर्शन स्थल पर नेतृत्व की जिम्मेदारी अब अभिजीत दीपके तथा अन्य अनशनकारियों पर अधिक आ गई है। उपलब्ध स्रोतों में सरकार की ओर से प्रदर्शनकारियों की मांगों पर किसी नई औपचारिक बातचीत या निर्णय की जानकारी नहीं दी गई है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग क्यों हो रही है?
प्रदर्शनकारी परीक्षा पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी कथित गड़बड़ियों के लिए राजनीतिक जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं और इसी आधार पर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई गई है।
सोनम वांगचुक कितने दिन से भूख हड़ताल पर थे?
उन्होंने 28 जून से अनशन शुरू किया था और 18 जुलाई को उनकी भूख हड़ताल का 21वां दिन था।
सोनम वांगचुक को अस्पताल क्यों ले जाया गया?
दिल्ली पुलिस के अनुसार उनकी बिगड़ती सेहत, दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देश और चिकित्सकों की सलाह के आधार पर उन्हें सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया।
20 जुलाई को क्या होने वाला है?
प्रदर्शनकारियों ने जंतर-मंतर से संसद की ओर मार्च की योजना बनाई है और वांगचुक के अस्पताल में होने के बावजूद इसे जारी रखने की घोषणा की गई है।
आंदोलन की दूसरी प्रमुख मांगें क्या हैं?
पेपर लीक पर श्वेत पत्र, हर पेपर लीक के 14 दिनों के भीतर संसद में जवाबदेही, परीक्षा सुधारों की सार्वजनिक जानकारी और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के लिए स्वतंत्र आयोग की मांग रखी गई है।
संसाधन
इस लेख में उद्धृत स्रोत और संदर्भ।
