बिहार की शादियों में गूंजती राजनीति: चिराग और लालू समर्थकों के बीच जमकर चले पत्थर — वैशाली में तनाव

बिहार के वैशाली जिले में एक शादी के दौरान चिराग पासवान का गाना बजाने को लेकर दो राजनीतिक गुटों में हिंसक झड़प हो गई। डीजे पर बजते गानों ने जश्न के माहौल को रणक्षेत्र में बदल दिया, जिसमें पत्थरबाजी और मारपीट की खबरें सामने आई हैं।

चिराग पासवान vs लालू समर्थक: बिहार में गाने पर पत्थरबाजी
Last UpdateApr 27, 2026, 3:22:21 PM
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बिहार के वैशाली जिले में एक शादी समारोह उस वक्त अखाड़ा बन गया जब डीजे पर बज रहे एक राजनीतिक गाने ने दो गुटों को आमने-सामने खड़ा कर दिया। घटना बिदुपुर इलाके की है, जहां चिराग पासवान की तारीफ वाले गाने बजने पर लालू प्रसाद यादव के समर्थकों ने आपत्ति जताई और देखते ही देखते बात पत्थरबाजी तक पहुंच गई। बिहार में अब शादियों के डीजे पर भी राजनीति और जाति का रंग चढ़ने लगा है। जश्न बना जंग का मैदान: क्या है पूरी कहानी? मामला वैशाली के एक गांव का है जहां बारात के स्वागत की तैयारियां चल रही थीं। चश्मदीदों के मुताबिक, डीजे पर चिराग पासवान से जुड़ा एक गाना बज रहा था। इस पर गांव के ही दूसरे गुट, जो खुद को लालू यादव और तेजस्वी यादव का समर्थक बता रहे थे, ने गाना बंद करने को कहा। जब गाना बंद नहीं हुआ, तो बहस शुरू हुई और फिर गांव की सड़कों पर ईंट-पत्थर चलने लगे। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि हमलावरों ने न केवल पत्थरबाजी की, बल्कि महिलाओं के साथ अभद्रता भी की। दूल्हे की मां ने रोते हुए बताया कि उपद्रवियों ने उनके जेवर तक छीन लिए और बच्चों को भी नहीं बख्शा। सड़क पर बिखरी ईंटें और टूटे हुए कांच इस बात की गवाही दे रहे हैं कि 'बात का बतंगड़' कितनी जल्दी हिंसक रूप ले सकता है। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला, लेकिन गांव में अभी भी तनाव का माहौल बना हुआ है। झड़प के बाद गांव की सड़कों पर बिखरे पत्थर और रुकी हुई बारात। कौन है इस विवाद के केंद्र में? इस पूरी घटना में मुख्य रूप से दो पक्ष शामिल हैं: चिराग पासवान समर्थक: जो बारात में शामिल थे और अपने नेता की प्रशंसा वाले गाने बजा रहे थे। तेजस्वी/लालू समर्थक: जिन्होंने गानों को अपनी विचारधारा या जाति के खिलाफ मानकर विरोध दर्ज कराया। स्थानीय प्रशासन: बिहार पुलिस अब उन चेहरों की पहचान कर रही है जिन्होंने शांतिपूर्ण समारोह में खलल डाला। बिहार में 'म्यूजिकल वॉर' और इसका गहरा अर्थ बिहार की राजनीति में अब 'म्यूजिकल वॉर' या जाति आधारित गानों का चलन काफी बढ़ गया है। यह सिर्फ मनोरंजन नहीं रह गया है, बल्कि अपनी ताकत दिखाने का जरिया बन गया है। जब भी किसी शादी या सार्वजनिक उत्सव में इस तरह के राजनीतिक या जाति विशेष के गाने बजते हैं, तो वह अक्सर दूसरे गुट को उकसाने का काम करते हैं। जानकारों का मानना है कि यह जमीनी स्तर पर बढ़ते राजनीतिक ध्रुवीकरण का नतीजा है। पहले विवाद जमीन या पुराने झगड़ों को लेकर होते थे, लेकिन अब 'जिसकी लाठी उसकी भैंस' वाली कहावत गानों के जरिए साबित करने की कोशिश की जा रही है। वैशाली की यह घटना कोई इकलौती मिसाल नहीं है; राज्य के कई हिस्सों से ऐसी खबरें आती रहती हैं जहां धार्मिक स्थलों या मिश्रित आबादी वाले इलाकों में बाजा बजाने को लेकर झड़पें होती हैं। घटना के बाद मामले की जांच करती पुलिस टीम। आगे क्या होगा? पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है और कुछ संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और डीजे पर भड़काऊ गाने न बजाने की अपील की है। आने वाले समय में, स्थानीय प्रशासन शादियों में बजाए जाने वाले गानों की सूची या उनके कंटेंट पर सख्त निगरानी रख सकता है ताकि ऐसी हिंसक घटनाओं को दोबारा होने से रोका जा सके। हम लालू के गाने पर चुप रहते, लेकिन वो चिराग का गाना बजते ही पत्थर मारने लगे। यह कैसा लोकतंत्र है?— एक चश्मदीद, वैशाली निवासी अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ) प्रश्न: वैशाली में विवाद की मुख्य वजह क्या थी?उत्तर: विवाद की शुरुआत डीजे पर चिराग पासवान से जुड़े राजनीतिक गाने बजाने से हुई, जिसका दूसरे पक्ष ने विरोध किया और मामला पत्थरबाजी तक पहुंच गया। प्रश्न: क्या इस घटना में कोई घायल भी हुआ है?उत्तर: हां, दोनों पक्षों के बीच हुई पत्थरबाजी में कई लोगों को मामूली चोटें आई हैं और शादी समारोह में मौजूद महिलाओं के साथ भी धक्का-मुक्की की खबर है। प्रश्न: क्या पुलिस ने इस मामले में कोई गिरफ्तारी की है?उत्तर: पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है और वीडियो फुटेज के आधार पर उपद्रवियों की पहचान की जा रही है। कुछ लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है। प्रश्न: बिहार में जाति आधारित गानों का ट्रेंड क्यों बढ़ रहा है?उत्तर: राजनीतिक पार्टियां और उनके समर्थक गानों को अपनी पहचान और शक्ति प्रदर्शन का जरिया मानते हैं, जिससे युवाओं के बीच यह काफी लोकप्रिय हो रहे हैं। प्रश्न: क्या बारात आगे बढ़ पाई?उत्तर: हंगामे और पत्थरबाजी के कारण बारात काफी देर तक रुकी रही और पुलिस के हस्तक्षेप के बाद ही माहौल शांत हो सका।
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लेखक

अहमद सेज़र

वरिष्ठ संपादक

राजनीति, सरकार और सामान्य जनहित के विषयों में विशेषज्ञ।

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