Last updated: 12 अप्रैल 2026, दोपहर 06:49
बिहार में सत्ता परिवर्तन आज: नीतीश के इस्तीफे के बाद कौन होगा नया मुख्यमंत्री?
बिहार की सियासत में एक युग का अंत होने जा रहा है क्योंकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 14 अप्रैल को अपनी कैबिनेट की आखिरी बैठक बुला ली है। इसके ठीक बाद वे राजभवन जाकर अपना इस्तीफा सौंप देंगे, जिससे राज्य में नए नेतृत्व के लिए रास्ता साफ हो जाएगा। 15 अप्रैल को नए मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण समारोह तय माना जा रहा है, लेकिन सस्पेंस इस बात पर है कि ताज किसके सिर सजेगा।

अब तक की बड़ी हलचल
पटना की गलियों से लेकर दिल्ली के गलियारों तक केवल एक ही चर्चा है—बिहार का अगला 'कप्तान' कौन? नीतीश कुमार की विदाई के साथ ही भाजपा और जेडीयू के बीच विभागों के बंटवारे का 'रिवर्स खेल' शुरू हो गया है। सूत्रों की मानें तो इस बार भाजपा मुख्यमंत्री पद अपने पास रखने के लिए पूरी तरह तैयार है, जबकि जेडीयू के अंदर से नीतीश के बेटे निशांत कुमार को कमान सौंपने की मांग उठने लगी है। बहती गंगा में हाथ धोने की तर्ज पर हर गुट अपनी दावेदारी मजबूत कर रहा है।
सम्राट चौधरी और नित्यानंद राय के नाम रेस में सबसे आगे चल रहे हैं, लेकिन भाजपा अक्सर अपने फैसलों से चौंकाती रही है। क्या दिल्ली में नाम फाइनल हो चुका है? सम्राट चौधरी की नीतीश कुमार से हालिया मुलाकात इसी ओर इशारा कर रही है। ताजा अपडेट्स के अनुसार, गृह विभाग और वित्त जैसे मलाईदार विभागों पर इस बार खींचतान लंबी खिंच सकती है।

इस सत्ता परिवर्तन को 'रिवर्स मोड' रणनीति कहा जा रहा है, जहां भाजपा बड़े भाई की भूमिका में आकर प्रशासन पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है। राज्य में 15 अप्रैल की तारीख ऐतिहासिक होने वाली है, क्योंकि इसी दिन नई सरकार का गठन होगा।
क्या कह रहे हैं दिग्गज?
राजनीतिक हलकों में बयानों का दौर शुरू हो चुका है। जहां जेडीयू कार्यकर्ता निशांत कुमार के लिए लामबंद हो रहे हैं, वहीं भाजपा नेता संयम बरतने की सलाह दे रहे हैं।
मुख्यमंत्री पद को लेकर भाजपा आलाकमान का निर्णय सर्वोपरि होगा। बिहार को अब एक नई ऊर्जा और विकास की गति की जरूरत है।
वहीं भितहा में हुई जेडीयू की बैठक में कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट कहा कि पार्टी की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए निशांत कुमार सबसे उपयुक्त चेहरा हैं।
आम जनता पर क्या होगा असर?
बिहार के लोगों के लिए यह सिर्फ चेहरों का बदलाव नहीं है। प्रशासनिक फेरबदल का सीधा असर सरकारी योजनाओं की रफ्तार और कानून व्यवस्था पर पड़ता है। दूध का जला छाछ भी फूंक-फूंक कर पीता है, इसी तर्ज पर जनता को उम्मीद है कि नई सरकार रोजगार और शिक्षा के वादों को नहीं भूलेगी। विभागों के फेरबदल में यदि 'गृह विभाग' भाजपा के पास जाता है, तो राज्य की पुलिसिंग और सुरक्षा नीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

आगे क्या होने वाला है?
आने वाले 48 घंटे बिहार की राजनीति के लिए बेहद संवेदनशील हैं। 14 अप्रैल की सुबह कैबिनेट की बैठक होगी, दोपहर तक नीतीश कुमार का इस्तीफा और शाम तक एनडीए विधायक दल की बैठक में नए नेता का चुनाव संभव है। 15 अप्रैल को राजभवन में भव्य शपथ ग्रहण समारोह की तैयारी की जा रही है।
मुख्य बातें एक नजर में
- 14 अप्रैल: नीतीश कुमार की आखिरी कैबिनेट बैठक और मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा।
- 15 अप्रैल: बिहार के नए मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण समारोह।
- प्रमुख दावेदार: सम्राट चौधरी और नित्यानंद राय के नामों की सबसे ज्यादा चर्चा।
- जेडीयू की मांग: कार्यकर्ताओं ने नीतीश के बेटे निशांत कुमार को सीएम बनाने की मांग उठाई।
- विभागों का बंटवारा: गृह और वित्त विभाग को लेकर भाजपा-जेडीयू में नई डील संभव।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
- नीतीश कुमार इस्तीफा क्यों दे रहे हैं?
- यह एनडीए के भीतर सत्ता हस्तांतरण और नए नेतृत्व को मौका देने की एक पूर्व-नियोजित रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
- बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन बनेगा?
- अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन सम्राट चौधरी का नाम रेस में सबसे आगे है।
- क्या जेडीयू और भाजपा का गठबंधन बना रहेगा?
- हां, यह गठबंधन सरकार ही रहेगी, केवल नेतृत्व और मंत्रालयों की जिम्मेदारी में बदलाव होगा।
- शपथ ग्रहण समारोह कब और कहां होगा?
- शपथ ग्रहण 15 अप्रैल को पटना स्थित राजभवन में होने की प्रबल संभावना है।
संसाधन
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