Last updated: 5 मई 2026, 10:10 AM
पंजाब की सियासी जंग राष्ट्रपति भवन पहुंची — भगवंत मान और राघव चड्ढा के बीच बढ़ी दूरियां
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा आज दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से अलग-अलग मुलाकात कर रहे हैं। आम आदमी पार्टी के भीतर चल रही इस खींचतान ने अब संवैधानिक दहलीज पर दस्तक दे दी है जिससे राज्य की सियासत गर्मा गई है।

क्या है पूरा मामला?
पंजाब की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से उबाल है और अब यह लड़ाई दिल्ली के गलियारों तक आ पहुंची है। मुख्यमंत्री भगवंत मान अपने साथ विधायकों का एक बड़ा जत्था लेकर चंडीगढ़ से दिल्ली के लिए रवाना हुए हैं। दिलचस्प बात यह है कि मान के पहुंचने से ठीक पहले सांसद राघव चड्ढा ने राष्ट्रपति से मिलने का समय ले लिया था।
पार्टी सूत्रों की मानें तो चड्ढा ने पंजाब सरकार पर राज्य मशीनरी के दुरुपयोग और प्रशासनिक खामियों के आरोप लगाए हैं। वहीं मान खेमा इसे सरकार के कामकाज में बाहरी दखलअंदाजी के तौर पर देख रहा है। दोनों पक्षों का एक ही दिन राष्ट्रपति भवन जाना यह साफ करता है कि पर्दे के पीछे सब कुछ ठीक नहीं है।

संदीप पाठक को अरविंद केजरीवाल ने पहले ही इस विवाद को सुलझाने की जिम्मेदारी सौंपी थी, लेकिन लगता है कि सुलह की कोशिशें फिलहाल नाकाम रही हैं। विधायकों का मान के साथ दिल्ली आना उनके शक्ति प्रदर्शन के रूप में भी देखा जा रहा है।
कौन-कौन है इस विवाद के केंद्र में?
- भगवंत मान: पंजाब के मुख्यमंत्री, जो विधायकों के समर्थन के साथ अपनी स्थिति मजबूत कर रहे हैं।
- राघव चड्ढा: राज्यसभा सांसद, जो राज्य प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं।
- संदीप पाठक: पार्टी के संगठन महासचिव, जिन्हें विवाद सुलझाने का जिम्मा दिया गया था।
- द्रौपदी मुर्मू: भारत की राष्ट्रपति, जिनसे दोनों पक्ष अपनी बात रखने पहुंचे हैं।
मुलाकात के पीछे का गणित
सियासी जानकारों का मानना है कि यह महज एक औपचारिक मुलाकात नहीं है। पंजाब में जिस तरह से सरकारी मशीनरी के इस्तेमाल को लेकर आरोप लग रहे हैं, उसने दिल्ली में बैठे आलाकमान की चिंता बढ़ा दी है। 90 से ज्यादा विधायकों वाली सरकार में इस तरह की अंदरूनी कलह दूध में दरार की तरह है।
अरविंद केजरीवाल ने संदीप पाठक पर भरोसा किया था और उन्हें राघव चड्ढा को मनाने की जिम्मेदारी दी थी।

अब आगे क्या होगा?
राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद दोनों नेता मीडिया से मुखातिब हो सकते हैं। मान खेमा अपनी एकजुटता दिखाने की कोशिश करेगा, जबकि चड्ढा की ओर से लगाए गए आरोपों पर राष्ट्रपति भवन का क्या रुख रहता है, यह देखना अहम होगा। आने वाले 24 घंटे पंजाब की राजनीति और आम आदमी पार्टी के भविष्य के लिए बेहद निर्णायक साबित हो सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
भगवंत मान और राघव चड्ढा राष्ट्रपति से क्यों मिल रहे हैं?
दोनों नेता पंजाब के मौजूदा राजनीतिक संकट और सरकारी कामकाज को लेकर अपनी-अपनी बात रखने के लिए राष्ट्रपति से मुलाकात कर रहे हैं। चड्ढा ने मशीनरी के दुरुपयोग का आरोप लगाया है जबकि मान अपना पक्ष स्पष्ट करेंगे।
क्या आम आदमी पार्टी में कोई बड़ी टूट होने वाली है?
अभी तक किसी आधिकारिक टूट की खबर नहीं है, लेकिन मुख्यमंत्री और सांसद का अलग-अलग राष्ट्रपति से मिलना पार्टी के भीतर गहरे मतभेदों को दर्शाता है। संदीप पाठक फिलहाल बीच-बचाव की कोशिश कर रहे हैं।
भगवंत मान के साथ कितने विधायक दिल्ली गए हैं?
रिपोर्ट्स के अनुसार, मुख्यमंत्री के साथ पंजाब के अधिकांश विधायक और कैबिनेट मंत्री दिल्ली पहुंचे हैं ताकि राष्ट्रपति के सामने अपनी ताकत और एकजुटता का प्रदर्शन किया जा सके।
अरविंद केजरीवाल का इस विवाद पर क्या रुख है?
केजरीवाल ने इस मामले को सुलझाने के लिए संदीप पाठक को जिम्मेदारी दी थी। पार्टी आलाकमान फिलहाल सीधे दखल देने के बजाय संगठन के जरिए शांति बनाने की कोशिश कर रहा है।
संसाधन
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