राघव चड्ढा आज: राज्यसभा में 'हटाए गए उपनेता' का अपनी ही पार्टी पर तीखा तंज

राज्यसभा में भाषण के दौरान राघव चड्ढा ने खुद को 'हटाया गया उपनेता' बताते हुए आम आदमी पार्टी के नेतृत्व पर कटाक्ष किया और उपसभापति हरिवंश को बधाई दी।

राघव चड्ढा राज्यसभा भाषण: पद से हटने के बाद 'आप' पर कसा तंज
Last UpdateApr 17, 2026, 3:03:17 PM
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आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने राज्यसभा में अपने पद से हटाए जाने के बाद पहली बार भाषण दिया, जिसमें उन्होंने अपनी ही पार्टी के नेतृत्व पर तीखा कटाक्ष किया। उन्होंने सदन के भीतर खुद को 'हटाया गया उपनेता' बताते हुए हरिवंश नारायण सिंह को तीसरी बार उपसभापति चुने जाने पर बधाई दी।

राघव चड्ढा राज्यसभा में
राज्यसभा में संबोधन के दौरान राघव चड्ढा का बेबाक अंदाज

सदन के भीतर की पूरी कहानी

शुक्रवार को राज्यसभा का नजारा कुछ अलग था। जैसे ही राघव चड्ढा बोलने के लिए खड़े हुए, सदन में सन्नाटा छा गया। उन्होंने अपनी बात की शुरुआत ही एक जबरदस्त पंचलाइन से की, जिसने सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को हैरान कर दिया। चड्ढा ने कहा, 'मैं राघव चड्ढा, हाल ही में हटाया गया उपनेता, सदन में मौजूद हूं।' यह केवल एक परिचय नहीं था, बल्कि अपनी पार्टी के भीतर चल रही खींचतान की ओर एक सीधा इशारा था।

दिलचस्प बात यह रही कि आम आदमी पार्टी की ओर से उन्हें बोलने के लिए समय नहीं दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अपनी बात रखी। उन्होंने हरिवंश नारायण सिंह को बधाई देते हुए कहा कि जिस तरह उपसभापति अपनी निष्पक्षता के लिए जाने जाते हैं, वह सराहनीय है। उनके इस 'सेल्फ-रोस्ट' और चुटीले अंदाज ने सोशल मीडिया पर भी हलचल मचा दी है।

राघव चड्ढा का तंज
पार्टी नेतृत्व की गैरमौजूदगी पर सवाल उठाते हुए राघव चड्ढा

भाषण के दौरान राघव चड्ढा ने संजय सिंह और अशोक मित्तल की गैरमौजूदगी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आज लीडर और डिप्टी लीडर दोनों गायब हैं। 'हाथी के दांत दिखाने के और, खाने के और होते हैं', वाली कहावत शायद इस वक्त 'आप' के भीतर के हालात पर सटीक बैठती दिख रही है। चड्ढा का यह बागी तेवर बताता है कि पार्टी के अंदर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।

कौन-कौन है इस घटनाक्रम के केंद्र में

  • राघव चड्ढा: आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद, जिन्हें हाल ही में उपनेता (डिप्टी लीडर) के पद से हटाया गया है।
  • हरिवंश नारायण सिंह: राज्यसभा के उपसभापति, जिन्हें राघव ने बधाई दी।
  • संजय सिंह और अशोक मित्तल: पार्टी के वरिष्ठ नेता, जिनकी अनुपस्थिति पर चड्ढा ने तंज कसा।
  • शंकराचार्य: जिन्होंने हाल ही में राघव चड्ढा के समर्थन में बयान देकर इस मामले को नया मोड़ दे दिया है।

इन बयानों का क्या है मतलब

राघव चड्ढा का यह रुख केवल एक भाषण नहीं है, बल्कि एक राजनीतिक संदेश है। जब कोई नेता सार्वजनिक मंच पर अपनी ही पार्टी को लेकर कटाक्ष करता है, तो इसका मतलब साफ है कि संवाद के दरवाजे अंदरूनी तौर पर बंद हो चुके हैं। दिल्ली और पंजाब की राजनीति में दखल रखने वाले चड्ढा का इस तरह 'साइडलाइन' होना कार्यकर्ताओं के बीच भी असमंजस पैदा कर रहा है।

पार्टी ने आधिकारिक तौर पर इस पर अभी कोई कड़ी प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन सूत्रों की मानें तो नेतृत्व इस 'ओपन रिबेलियन' से खुश नहीं है। चड्ढा ने जिस तरह से अपनी स्थिति को स्पष्ट किया, वह दिखाता है कि वह अब चुप रहने के मूड में नहीं हैं।

राघव चड्ढा और राजनीति
राज्यसभा में राघव चड्ढा का भाषण राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना

मैं उस पार्टी का हिस्सा हूं जिसका लीडर सदन में मौजूद नहीं है और मैं खुद एक 'हटाया गया' उपनेता हूं।

राघव चड्ढा, राज्यसभा सांसद

आगे क्या होने वाला है?

आने वाले दिनों में आम आदमी पार्टी के भीतर सांगठनिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। राघव चड्ढा के इस भाषण के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या पार्टी उन पर कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगी या फिर बीच-बचाव का कोई रास्ता निकाला जाएगा। साथ ही, पंजाब की राजनीति में भी इसके गहरे असर देखने को मिल सकते हैं, जहां राघव का काफी प्रभाव रहा है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

राघव चड्ढा को पद से क्यों हटाया गया?
पार्टी ने आधिकारिक तौर पर इसे एक रणनीतिक बदलाव बताया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे अंदरूनी मतभेद और शक्ति संतुलन के खेल के रूप में देखा जा रहा है।
क्या राघव चड्ढा आम आदमी पार्टी छोड़ रहे हैं?
अभी तक ऐसी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। उन्होंने खुद को पार्टी का हिस्सा बताते हुए ही सदन में अपनी बात रखी है, हालांकि उनके तेवर बागी नजर आ रहे हैं।
शंकराचार्य ने राघव चड्ढा के बारे में क्या कहा?
शंकराचार्य ने राघव चड्ढा के पक्ष में बयान देते हुए कहा कि उनके जैसे युवाओं को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, न कि किनारे लगाया जाना चाहिए।
राघव चड्ढा ने सदन में किन नेताओं को घेरा?
उन्होंने विशेष रूप से संजय सिंह और अशोक मित्तल का जिक्र करते हुए कहा कि आज सदन में 'लीडर और डिप्टी लीडर' दोनों ही नदारद हैं।
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लेखक

अहमद सेज़र

वरिष्ठ संपादक

राजनीति, सरकार और सामान्य जनहित के विषयों में विशेषज्ञ।

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