शक्तिकांत दास का नाम अचानक क्यों चर्चा में आ गया?
अंतिम अद्यतन: 26 जून 2026, दोपहर 3:05 बजे
नई दिल्ली में 26 जून 2026 को मोदी मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल की चर्चाओं के बीच पूर्व रिजर्व बैंक गवर्नर शक्तिकांत दास का नाम वित्त मंत्रालय के लिए चर्चा में आया है। यह चर्चा इसलिए तेज हुई है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने हाल के दिनों में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की है। जॉर्ज कुरियन के इस्तीफे और कुछ मंत्रियों को संगठन में भूमिका मिलने से दिल्ली के सत्ता गलियारों में हलचल और बढ़ गई है।
दास अभी संसद के किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं, इसलिए अगर उन्हें मंत्री बनाया जाता है तो उन्हें छह महीने के भीतर किसी सदन की सदस्यता लेनी होगी। यही वह बिंदु है जो इस चर्चा को सिर्फ नामों की अटकलबाजी से आगे ले जाकर संवैधानिक प्रक्रिया से जोड़ता है।

पूरी कहानी
मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल को लेकर कई रिपोर्टों में 28 या 29 जून की संभावना बताई गई है। हालांकि, कुछ खबरों में यह भी कहा गया है कि विस्तार संसद के मानसून सत्र के बाद तक टल सकता है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार सरकार इस समय संसद में अहम संवैधानिक प्रस्तावों और बड़े विधेयकों के लिए समर्थन जुटाने पर ध्यान दे रही है।
इस पूरे घटनाक्रम को हवा जॉर्ज कुरियन के इस्तीफे से मिली। कुरियन अल्पसंख्यक मामलों के साथ-साथ मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय में राज्य मंत्री थे। उनका राज्यसभा कार्यकाल 21 जून को खत्म हुआ और भाजपा ने उन्हें दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर उनका इस्तीफा स्वीकार किया।

इसी बीच शक्तिकांत दास का नाम इसलिए अलग नजर आता है क्योंकि वह पेशेवर नौकरशाह और आर्थिक प्रशासक रहे हैं। नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार दास वित्त मंत्रालय में आठ केंद्रीय बजट तैयार करने की प्रक्रिया का हिस्सा रहे हैं। वे राजस्व सचिव और आर्थिक मामलों के सचिव जैसे पदों पर भी काम कर चुके हैं।
दास दिसंबर 2018 से दिसंबर 2024 तक रिजर्व बैंक के गवर्नर रहे। फरवरी 2025 में उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रधान सचिव नियुक्त किया गया। रिपोर्टों में उन्हें प्रधानमंत्री के भरोसेमंद अधिकारियों में गिना गया है, खासकर नोटबंदी और कोविड-19 महामारी के दौर में सरकार और रिजर्व बैंक के बीच समन्वय के संदर्भ में।
मुख्य चेहरे
शक्तिकांत दास इस कहानी के केंद्र में हैं। उनका जन्म 26 फरवरी 1957 को ओडिशा के भुवनेश्वर में हुआ। वे 1980 बैच के तमिलनाडु कैडर के आईएएस अधिकारी रहे और डिंडिगुल तथा कांचीपुरम जिले के कलेक्टर भी रहे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से हालिया मुलाकातों ने फेरबदल की अटकलों को बल दिया। जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा मंत्रिपरिषद में खाली जगह और बदलाव की चर्चा का तात्कालिक कारण बना।
धर्मेंद्र प्रधान, हरदीप सिंह पुरी, निर्मला सीतारमण, नितिन गडकरी और मनोहर लाल खट्टर जैसे नाम अलग-अलग रिपोर्टों में विभाग बदलने या जिम्मेदारी बदलने की अटकलों से जुड़े हैं। वहीं श्रीकांत शिंदे, अनुराग ठाकुर, अरुण गोविल, राघव चड्ढा या अशोक मित्तल जैसे नाम संभावित नए चेहरों के रूप में चर्चा में हैं।
- मंत्रिमंडल फेरबदल
- जब सरकार मंत्रियों के विभाग बदलती है, कुछ नए चेहरों को शामिल करती है या कुछ को बाहर करती है।
- राज्यसभा सदस्यता
- किसी ऐसे व्यक्ति के लिए जरूरी संसदीय रास्ता, जो मंत्री तो बने लेकिन पहले से संसद का सदस्य न हो।
- प्रधान सचिव
- प्रधानमंत्री कार्यालय में शीर्ष प्रशासनिक जिम्मेदारियों में से एक पद।
आंकड़े और तथ्य
शक्तिकांत दास की उम्र रिपोर्टों के अनुसार 69 साल है। वे 37 साल से लंबे प्रशासनिक करियर के बाद आर्थिक और वित्तीय मामलों में प्रमुख भूमिकाओं से जुड़े रहे। उन्होंने वित्त मंत्रालय में आठ केंद्रीय बजटों की तैयारी में भूमिका निभाई।
अगर दास वित्त मंत्री बनते हैं, तो वे रिजर्व बैंक गवर्नर रहे उन चुनिंदा नामों की पंक्ति में आ सकते हैं जिनमें सी डी देशमुख और डॉ. मनमोहन सिंह शामिल रहे। रिपोर्टों के अनुसार देशमुख 1950 से 1956 तक वित्त मंत्री रहे, जबकि मनमोहन सिंह 1991 से 1996 तक वित्त मंत्री रहे।
उत्तर प्रदेश की राजनीति भी इस फेरबदल की चर्चा से जुड़ी है। लाइव हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश भाजपा की नई टीम में 60 फीसदी नए चेहरों को शामिल किया गया है और छह पद बढ़ाए गए हैं। यह संकेत देता है कि सरकार और संगठन, दोनों स्तरों पर बदलाव की तैयारी साथ-साथ चल रही है।
इसका मतलब क्या है
शक्तिकांत दास का नाम सामने आना सिर्फ एक व्यक्ति की संभावित नियुक्ति की खबर नहीं है। यह इस बात का संकेत भी है कि आर्थिक नीति, प्रशासनिक अनुभव और राजनीतिक संतुलन को एक साथ साधने की कोशिश हो सकती है। वित्त मंत्रालय जैसा विभाग बाजार, कर नीति, निवेश और आम लोगों की जेब—चारों पर सीधा असर डालता है।

भारत के पाठकों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर वित्त मंत्रालय में बदलाव होता है तो अगली आर्थिक प्राथमिकताएं कैसी दिखेंगी। रिपोर्टों में विदेशी निवेश, डिजिटल ढांचे और संसदीय रणनीति जैसे मुद्दे साथ-साथ दिखाई देते हैं। ऐसे में वित्त मंत्री का चेहरा सिर्फ सरकार के भीतर की नियुक्ति नहीं, बल्कि आर्थिक संदेश भी बन सकता है।
राजनीतिक रूप से यह फेरबदल उत्तर प्रदेश, पंजाब, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और बिहार जैसे राज्यों की दिशा में भी पढ़ा जा रहा है। कई रिपोर्टों में सहयोगी दलों को प्रतिनिधित्व देने, संगठन में नेताओं को भेजने और नए चेहरों को लाने की चर्चा है। इसलिए यह बदलाव केवल मंत्रालयों की कुर्सियों का फेर नहीं, बल्कि आने वाले चुनावी नक्शे का हिस्सा भी हो सकता है।
आगे क्या हो सकता है
अब नजरें 28 या 29 जून और फिर संसद के मानसून सत्र पर रहेंगी। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार मंत्रिमंडल विस्तार मानसून सत्र के बाद तक टल सकता है, जबकि कुछ अन्य रिपोर्टों में तत्काल फेरबदल की संभावना बताई गई है।
सरकार की ओर से तारीख, नाम या विभागों पर आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है। इसलिए शक्तिकांत दास को वित्त मंत्रालय मिलने की बात अभी रिपोर्टों और राजनीतिक चर्चा तक सीमित है। पुष्ट तस्वीर तभी बनेगी जब राष्ट्रपति भवन या सरकार की ओर से औपचारिक सूचना जारी होगी।
झटपट सवाल-जवाब
शक्तिकांत दास क्यों चर्चा में हैं?
मोदी मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल की खबरों के बीच उनका नाम वित्त मंत्री पद के लिए चर्चा में आया है।
क्या शक्तिकांत दास अभी मंत्री हैं?
नहीं। रिपोर्टों के अनुसार वे अभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधान सचिव हैं और संसद के किसी सदन के सदस्य नहीं हैं।
अगर वे मंत्री बने तो संसद सदस्यता कैसे मिलेगी?
मंत्री बनने के बाद उन्हें छह महीने के भीतर लोकसभा या राज्यसभा में से किसी एक सदन का सदस्य बनना होगा।
कैबिनेट फेरबदल की चर्चा क्यों तेज हुई?
जॉर्ज कुरियन के इस्तीफे, प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह की राष्ट्रपति से मुलाकात और कुछ मंत्रियों को संगठन में जिम्मेदारी मिलने से चर्चा तेज हुई।
जॉर्ज कुरियन ने इस्तीफा क्यों दिया?
उनका राज्यसभा कार्यकाल 21 जून को समाप्त हुआ था। राष्ट्रपति भवन ने उनका इस्तीफा स्वीकार किया, हालांकि इस्तीफे की वजह प्रेस रिलीज में नहीं बताई गई।
क्या फेरबदल की तारीख तय है?
नहीं। कुछ रिपोर्टों में 28 या 29 जून की चर्चा है, जबकि कुछ में मानसून सत्र के बाद की संभावना बताई गई है। आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है।
संसाधन
इस लेख में उद्धृत स्रोत और संदर्भ।

