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गिल्लियां पहले गिरीं, करुणारत्ने बच गए

भारत-ए की 8 रन की जीत में चमिका करुणारत्ने का विवादित रनआउट फैसला चर्चा में रहा, क्योंकि गेंद लगने से पहले गिल्लियां गिर चुकी थीं।

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दांबुला की दोपहर में गेंद स्टंप्स से टकराई, भारतीय खिलाड़ी जश्न की तरफ बढ़े और फिर स्क्रीन पर फैसला पलटता दिखा। चमिका करुणारत्ने क्रीज से बाहर थे, मगर रनआउट नहीं दिए गए। भारत-ए ने मंगलवार, 9 जून को श्रीलंका-ए को 8 रन से हराया, लेकिन 42वें ओवर का यह पल मैच के स्कोर से भी ज्यादा चर्चा में रहा। भारत-ए के 277/6 के जवाब में श्रीलंका-ए 48.5 ओवर में 269 रन पर सिमट गई।

दांबुला में भारत-ए और श्रीलंका-ए मैच का विवादित रनआउट क्षण
दांबुला में रनआउट के फैसले ने मुकाबले की नब्ज बदल दी।

घटनाक्रम कैसे आगे बढ़ा

मामला श्रीलंका-ए की पारी के 42वें ओवर का था। करुणारत्ने ने ऑफ स्टंप के बाहर पड़ी गेंद को बैकवर्ड पॉइंट की ओर हल्के हाथों से खेला और रन के लिए निकल पड़े। दूसरे छोर से वापसी का इशारा मिला, तो वह तेजी से क्रीज की ओर लौटे।

भारतीय फील्डर की थ्रो विकेटकीपर एंड की तरफ आई। पहली नजर में लगा कि सीधी हिट हुई है और करुणारत्ने बाहर हैं। फैसला तीसरे अंपायर के पास गया, जहां रिप्ले ने पूरा मामला बदल दिया।

रिप्ले में दिखा कि विकेटकीपर प्रभसिमरन सिंह ने गेंद स्टंप्स तक पहुंचने से पहले ही दस्तानों से गिल्लियां गिरा दी थीं। गेंद बाद में स्टंप्स से टकराई, लेकिन तब तक विकेट पहले ही टूट चुका था। इसी वजह से करुणारत्ने को नॉट आउट दिया गया। पूरे प्रकरण का विवरण रनआउट विवाद के ब्यौरे में भी यही बताया गया।

इससे कहानी और विचित्र बन गई, क्योंकि गेंद स्टंप्स से टकराकर दूर निकल गई और श्रीलंकाई बल्लेबाजों ने ओवरथ्रो का एक अतिरिक्त रन भी ले लिया। यानी जिस गेंद पर भारत-ए विकेट की उम्मीद कर रहा था, उसी पर श्रीलंका-ए को विकेट बचने के साथ रन भी मिल गया।

अहम बारीकियां

क्रिकेट में रनआउट सिर्फ इस बात से तय नहीं होता कि बल्लेबाज क्रीज से बाहर था या गेंद स्टंप्स से टकराई। विकेट का सही तरीके से टूटना भी जरूरी है। जब गिल्लियां पहले ही हट चुकी हों, तब फील्डिंग पक्ष को गेंद हाथ में लेकर स्टंप उखाड़ना होता है, तभी रनआउट वैध माना जा सकता है।

गिल्लियां पहले गिरने के कारण रनआउट अमान्य होने की स्थिति
गिल्लियां पहले गिरने से नियम की बारीकी निर्णायक बन गई।

यही कारण था कि सीधी हिट दिखने के बावजूद फैसला भारत-ए के पक्ष में नहीं गया। यह तकनीकी फैसला था, भावनात्मक नहीं। भारतीय खिलाड़ियों की नाराजगी समझी जा सकती थी, क्योंकि आंखों से दिखने वाला दृश्य रनआउट जैसा था, लेकिन रिप्ले ने नियम की दूसरी परत सामने रख दी।

मैच का संदर्भ भी बड़ा था। भारत-ए ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 50 ओवर में 277 रन बनाए। रुतुराज गायकवाड़ ने 114 गेंदों में 101 रन बनाए, जबकि तिलक वर्मा ने 60 रन जोड़े। रन चेज में श्रीलंका-ए के लिए सहान अराच्चिगे ने 74 रन की अहम पारी खेली।

भारत की गेंदबाजी में अरशद खान, अनुकूल रॉय, आयुष बदोनी और विपराज निगम ने 2-2 विकेट लिए। अंशुल कंबोज को 1 विकेट मिला। इसी संतुलन ने करीबी मुकाबले में भारत-ए को बचाए रखा।

प्रतिक्रियाएं और जवाब

फैसला आने के बाद भारतीय खिलाड़ी मैदान पर साफ नाराज दिखे। उन्होंने ऑन-फील्ड अंपायरों से बात भी की, लेकिन तीसरे अंपायर का फैसला नियमों के आधार पर कायम रहा। इस मैच में ऑन-फील्ड अंपायर रवींद्र विमलासिरी और रवींद्र कोट्टाहच्ची थे, टीवी अंपायर हेमंथा बोतेजू थे और मैच रेफरी मनोज मेंडिस थे।

सोशल मीडिया पर यह वीडियो तेजी से फैल गया। कई प्रशंसकों ने इसे बेहद अजीब रनआउट मामला बताया, जबकि नियम समझने वाले लोगों ने इसे तकनीकी रूप से सही फैसला माना। विवाद इसलिए भी बढ़ा क्योंकि मैच के सभी अंपायर श्रीलंका से थे।

भारत-ए की पारी में भी एक अलग रनआउट चर्चा में रहा। 13वें ओवर में प्रियांश आर्य और रुतुराज गायकवाड़ एक ही छोर पर पहुंच गए। प्रियांश का बल्ला विकेटकीपर निरोशन डिकवेला के जूते से टकराकर रुक गया और वह क्रीज में नहीं पहुंच पाए। इस घटना का विवरण प्रियांश आर्य के रनआउट में सामने आया।

बड़े परिप्रेक्ष्य में यह फैसला

इस मैच ने एक ही दिन में रनआउट के दो अलग-अलग चेहरे दिखा दिए। पहले भारत-ए की बल्लेबाजी में गलतफहमी और जूते की रुकावट से विकेट गिरा। फिर श्रीलंका-ए की पारी में गिल्लियां पहले गिरने से करुणारत्ने बच गए। दोनों घटनाओं में नतीजा नियमों से निकला, सिर्फ दृश्य से नहीं।

भारत-ए बनाम श्रीलंका-ए करीबी मुकाबले का स्कोर संदर्भ
करीबी स्कोरलाइन ने हर रन और हर फैसले का वजन बढ़ा दिया।

भारत-ए के लिए यह जीत छोटी दिख सकती है, लेकिन 8 रन का अंतर बताता है कि विवादित रन, ओवरथ्रो और बची हुई विकेटें मैच को कितना प्रभावित कर सकती थीं। भारत में क्रिकेट देखने वाले दर्शकों के लिए यह घटना सिर्फ मनोरंजन नहीं, नियमों की याद भी है। मैदान पर जो साफ दिखता है, तीसरे अंपायर के कमरे में वह अलग अर्थ ले सकता है।

युवा खिलाड़ियों के लिए भी सबक साफ है। विकेटकीपर के दस्ताने, बल्लेबाज की क्रीज और गिल्लियों की स्थिति जैसे छोटे विवरण बड़े फैसले बनाते हैं। भारत-ए ने मैच जीत लिया, इसलिए विवाद हार की कहानी नहीं बना, लेकिन यह पल लंबे समय तक दोहराया जाएगा।

आगे क्या होगा

भारत-ए ने त्रिकोणीय वनडे सीरीज की शुरुआत जीत से की है। रुतुराज गायकवाड़ का शतक, तिलक वर्मा की पारी और गेंदबाजों की साझी मेहनत टीम के लिए सकारात्मक संकेत हैं।

करुणारत्ने वाला फैसला अब क्रिकेट नियमों पर चर्चा का नया उदाहरण बन गया है। आने वाले मैचों में भारत-ए को ऐसी करीबी स्थितियों में और सतर्क रहना होगा, खासकर रनआउट और ओवरथ्रो जैसे पलों में, जहां एक छोटी गलती पूरे मुकाबले की दिशा बदल सकती है। मैच के आंकड़ों में भारत-ए की 8 रन से जीत दर्ज है, लेकिन इस मैच की याद गिल्लियों से जुड़ी रहेगी।

सवाल-जवाब

चमिका करुणारत्ने रनआउट क्यों नहीं दिए गए?

क्योंकि गेंद स्टंप्स से टकराने से पहले ही विकेटकीपर प्रभसिमरन सिंह के दस्तानों से गिल्लियां गिर गई थीं। ऐसे में वैध रनआउट के लिए गेंद हाथ में लेकर स्टंप उखाड़ना जरूरी था।

भारत-ए बनाम श्रीलंका-ए मैच कौन जीता?

भारत-ए ने 9 जून को दांबुला में श्रीलंका-ए को 8 रन से हराया। भारत-ए ने 277/6 बनाए और श्रीलंका-ए 269 पर ऑलआउट हुई।

रुतुराज गायकवाड़ ने कितने रन बनाए?

रुतुराज गायकवाड़ ने 114 गेंदों में 101 रन बनाए। उनकी पारी ने भारत-ए को शुरुआती झटकों के बाद मजबूत स्कोर तक पहुंचाया।

प्रियांश आर्य का रनआउट कैसे हुआ?

प्रियांश आर्य और रुतुराज गायकवाड़ एक ही छोर पर पहुंच गए थे। प्रियांश का बल्ला विकेटकीपर निरोशन डिकवेला के जूते से रुक गया और वह क्रीज पूरी नहीं कर सके।

इस मैच में भारत-ए के लिए किसने विकेट लिए?

अरशद खान, अनुकूल रॉय, आयुष बदोनी और विपराज निगम ने 2-2 विकेट लिए। अंशुल कंबोज को 1 विकेट मिला।