एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट शेयर: आईपीओ से 13 कर्मचारी बने करोड़पति, लेकिन लिस्टिंग के बाद इश्यू प्राइस से नीचे फिसला स्टॉक
एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के दफ्तरों में एक तरफ ईसॉप्स (ESOPs) के दम पर कर्मचारियों के करोड़पति बनने का जश्न था, तो दूसरी तरफ दलाल स्ट्रीट की ट्रेडिंग स्क्रीन पर लाल निशान छा रहा था। देश की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी के बाजार में उतरते ही एक अनोखा विरोधाभास देखने को मिला। 41 गुना से अधिक सब्सक्राइब होने वाले इस विशाल आईपीओ ने जहां अपनी सीनियर लीडरशिप की संपत्ति में रातोंरात करोड़ों का इजाफा कर दिया, वहीं आम निवेशकों को लिस्टिंग के कुछ ही दिनों के भीतर शेयर के इश्यू प्राइस से नीचे जाने का झटका लगा।

लोग क्या सर्च कर रहे हैं
शेयर बाजार के निवेशकों और विश्लेषकों के बीच इस समय सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर देश के सबसे बड़े म्यूचुअल फंड हाउस का शेयर आईपीओ प्राइस ₹574 से नीचे क्यों गिर गया? क्या ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) पर ₹101 तक के लिस्टिंग गेन का अनुमान लगाने वाले निवेशकों को अब मुनाफावसूली का सामना करना पड़ रहा है, या फिर यह लंबी अवधि के लिए खरीदारी का अवसर है? इसके अलावा, कंपनी के कर्मचारियों को ईसॉप्स (ESOPs) के तहत मिले ₹121 करोड़ तक के शेयर मूल्य को लेकर भी काफी चर्चा हो रही है।
क्या पुष्टि हो चुकी है
एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट का ₹9,795.31 करोड़ से ₹9,813 करोड़ का आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) था, जिसमें भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और उसकी फ्रांसीसी पार्टनर कंपनी अमुंडी (Amundi) ने अपनी हिस्सेदारी बेची। इस इश्यू को कुल 41.73 गुना सब्सक्रिप्शन मिला था, जिसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) का कोटा 140.11 गुना भरा था।
कंपनी के शेयर 21 जुलाई 2026 को बीएसई पर करीब 6.27% प्रीमियम के साथ ₹610 पर और एनएसई पर 6.85% प्रीमियम के साथ ₹613.30 पर लिस्ट हुए। हालांकि, लिस्टिंग के बाद शेयर अपने हाई लेवल ₹625 से लुढ़ककर शुक्रवार तक बीएसई में अपने इश्यू प्राइस से नीचे ₹572.15 तक पहुंच गए।

कंपनी द्वारा साल 2018 में शुरू की गई ईसॉप (ESOP) योजना के कारण कम से कम 13 वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी करोड़पति बन गए:
- डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर देविंदर पाल सिंह के पास मौजूद 21.14 लाख वेस्टेड शेयरों की वैल्यू इश्यू प्राइस पर लगभग ₹121 करोड़ दर्ज की गई।
- चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर (CIO) श्रीनिवासन रामा अय्यर के वेस्टेड शेयरों का मूल्य लगभग ₹105 करोड़ रहा।
- चीफ स्ट्रैटेजी, डिजिटल एंड टेक्नोलॉजी अधिकारी स्रीनिवास जैन के पास लगभग ₹59 करोड़ और फिक्स्ड इनकम CIO राजीव राधाकृष्णन के पास लगभग ₹36 करोड़ की हिस्सेदारी आई।
क्या अनिश्चित है
बाजार विशेषज्ञों के बीच शेयर की अल्पकालिक चाल को लेकर अलग-अलग राय है। लिस्टिंग पर अनुमानित 11% से 17% तक के लिस्टिंग गेन की तुलना में महज 7% का लिस्टिंग प्रीमियम मिलने के बाद, यह स्पष्ट नहीं है कि शेयर पर बिकवाली का दबाव कब तक बना रहेगा। हालांकि बाजार विश्लेषकों का मानना है कि 3 से 6 महीने की अवधि में शेयर वापसी करते हुए ₹650 से ₹700 का स्तर छू सकता है, लेकिन तत्काल रिकवरी का कोई निश्चित समय स्पष्ट नहीं है।
व्यापक परिदृश्य
एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट देश की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) है, जो एसबीआई म्यूचुअल फंड को मैनेज करती है। तिमाही औसत प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियों (QAAUM) में कंपनी की बाजार हिस्सेदारी 15.3% है। भारतीय स्टेट बैंक के चेयरमैन सी एस शेट्टी ने साफ किया है कि बैंक फिलहाल अपनी बची हुई 55% से अधिक हिस्सेदारी को और घटाने की योजना नहीं बना रहा है। सेबी के न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता नियमों के तहत प्रवर्तकों (एसबीआई और अमुंडी) को अपनी सम्मिलित हिस्सेदारी 88% से घटाकर 75% करनी होगी, जो प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी।
वर्तमान स्थिति
वर्तमान में एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के शेयर ₹572.15 से ₹584.70 के दायरे में कारोबार कर रहे हैं। भारतीय शेयर बाजार में म्यूचुअल फंड उद्योग की लंबी अवधि की संभावनाओं और मजबूत कॉर्पोरेट गवर्नेंस को देखते हुए संस्थागत निवेशक इस शेयर पर नजर बनाए हुए हैं। प्रवर्तक कंपनियों ने भी अपने दीर्घकालिक सहयोग की पुष्टि की है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट का आईपीओ प्राइस कितना था?
एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के आईपीओ का ऊपरी इश्यू प्राइस ₹574 प्रति शेयर तय किया गया था।
लिस्टिंग के दिन शेयर किस भाव पर खुले थे?
शेयरों की लिस्टिंग बीएसई पर ₹610 और एनएसई पर ₹613.30 पर हुई थी, जो कि इश्यू प्राइस से लगभग 6% से 7% अधिक थी।
कंपनी में सबसे ज्यादा फायदा किस अधिकारी को मिला?
कंपनी के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर देविंदर पाल सिंह को उनके 21.14 लाख वेस्टेड शेयरों के आधार पर ₹121 करोड़ का मूल्य मिला।क्या भारतीय स्टेट बैंक इसमें अपनी हिस्सेदारी और बेचेगा?
एसबीआई के चेयरमैन सी एस शेट्टी के अनुसार, बैंक फिलहाल अपनी हिस्सेदारी को और कम करने पर विचार नहीं कर रहा है।
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