क्या होर्मुज स्ट्रेट संकट से वैश्विक तेल बाज़ार में आग लग जाएगी?

अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज स्ट्रेट में सैन्य टकराव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी हवाई हमलों और नाकेबंदी के बीच कच्चे तेल की कीमतों में 10% की भारी उछाल आई है, जिससे भारत सहित वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संकट गहरा गया है।

होर्मुज स्ट्रेट संकट: अमेरिका-ईरान युद्ध और तेल की कीमतें
Last UpdateJul 20, 2026, 6:41:04 PM
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क्या होर्मुज स्ट्रेट संकट से वैश्विक तेल बाज़ार में आग लग जाएगी?

पश्चिम एशिया के सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ते स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल आपूर्ति पर गंभीर संकट मंडरा रहा है। ट्रुथ सोशल पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक पोस्ट के बाद कच्चे तेल की कीमतों में 10% की भारी उछाल दर्ज की गई, जो पिछले छह वर्षों में एक दिन की सबसे बड़ी बढ़ोतरी है। जून में दोनों देशों के बीच जिस अस्थायी समझौते ने शांति की उम्मीद जगाई थी, वह अब पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है और दोनों पक्ष एक-दूसरे पर उल्लंघन के आरोप लगा रहे हैं।

डोनाल्ड ट्रंप और होर्मुज स्ट्रेट संकट
होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिकी पाबंदियां और राष्ट्रपति ट्रंप का रुख — BBC

मुख्य तथ्य और ताज़ा घटनाक्रम

  • भीषण बमबारी: अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने मंगलवार को ईरान के तटीय डिफेंस सिस्टम, मिसाइल और ड्रोन साइटों पर लगातार पांच घंटे तक भारी हवाई हमले किए।
  • टोल प्रस्ताव पर यू-टर्न: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों पर 20% सुरक्षा शुल्क लगाने का अपना विवादास्पद प्रस्ताव 24 घंटे के भीतर ही वापस ले लिया है।
  • ईरानी जवाबी कार्रवाई: ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने 'नस्र 2' सैन्य अभियान चलाकर जॉर्डन, बहरीन और कुवैत में अमेरिकी ठिकानों पर बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों से हमले का दावा किया है।
  • नौसैनिक नाकेबंदी: अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की ओर जाने वाले और ईरान से जुड़े मालवाहक जहाजों पर पूर्ण नौसैनिक नाकेबंदी लागू कर दी है।

टकराव और कूटनीतिक यू-टर्न का पूरा विवरण

इस पूरे विवाद की जड़ 28 फरवरी को हुई उस सैन्य कार्रवाई में है, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले शुरू किए थे। इसके जवाब में ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण चोकपॉइंट स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ को प्रभावी रूप से बंद करने की कोशिश की। पिछले महीने दोनों देशों के बीच एक अस्पष्ट समझौता ज्ञापन (MoU) हुआ था, जिसमें ईरान को बिना किसी शुल्क के व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई थी। हालांकि, यूएई के दो व्यापारिक जहाजों पर हाल ही में हुए हमलों ने इस युद्धविराम को खत्म कर दिया। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने पहले अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर किसी भी प्रकार के टोल की आलोचना की थी, जिसके बाद ट्रंप को वैश्विक दबाव के कारण अपने 20% शुल्क वाले फैसले से पीछे हटना पड़ा।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जानकारी दी कि ईरान के बंदर अब्बास, चाबहार, जास्क, कोनारक, अबादान, किश, केशम और अबू मूसा द्वीपों पर अमेरिकी मिसाइलें गिरी हैं। ईरानी मीडिया के अनुसार इन हमलों में चार लोग घायल हुए हैं। दूसरी तरफ, खाड़ी में मौजूद अमेरिकी सेना ने भी सुरक्षा चेतावनी जारी करते हुए ओमान की खाड़ी और होर्मुज से गुजरने वाले सभी जहाजों को 'नोटिस टू मैरिनर्स' और 'ब्रिज-टू-ब्रिज चैनल 16' पर सक्रिय रहने की सलाह दी है। सोमवार को इस तनाव के चलते केवल 10 जहाजों ने इस जलमार्ग को पार किया, जो इसके रणनीतिक ठप होने का स्पष्ट संकेत है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज समुद्री मार्ग नक्शा
दुनिया का सबसे अहम तेल आपूर्ति मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज — BBC

वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत पर इसका असर

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री चोकपॉइंट है, जहां से रोजाना लगभग 2 करोड़ बैरल तेल गुजरता है। यह दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का करीब 20 प्रतिशत है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने चेतावनी दी है कि यदि यह मार्ग पूरी तरह बंद होता है, तो वैश्विक जीडीपी पर 1 से 2 प्रतिशत का नकारात्मक असर पड़ेगा और कच्चे तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। इसके अलावा, इस मार्ग से लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) और उर्वरक निर्यात भी जुड़ा है, जिससे दुनिया भर में खाद्य संकट गहराने का खतरा है।

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बहुत बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। ऐसे में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में होने वाली कोई भी बढ़ोतरी सीधे तौर पर आम भारतीय नागरिकों की जेब पर असर डालेगी। भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जैसवाल ने इस संकट पर सधी हुई प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि नई दिल्ली पश्चिम एशिया की स्थिति पर करीब से नजर रख रही है और ऊर्जा व आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए होर्मुज से सुरक्षित और बिना रुकावट वाले नौवहन तथा व्यापार प्रवाह की मांग करती है। ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डी सील्वा ने भी ट्रंप के शुरुआती टोल प्रस्ताव की तीखी आलोचना करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर 'समुद्री डकैती' करार दिया था।

आगामी घटनाक्रम और रणनीतिक चुनौतियां

युद्ध अब अपने पांचवें महीने में प्रवेश करने वाला है। अमेरिकी प्रशासन ने 1973 के वार पावर्स रिजोल्यूशन के तहत कांग्रेस को इस सैन्य अभियान की औपचारिक सूचना दे दी है, जिसके तहत कार्रवाई के 48 घंटे के भीतर राष्ट्रपति के लिए संसद को सूचित करना अनिवार्य होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ट्रंप तेहरान के दक्षिण में स्थित पिकऐक्स माउंटेन जैसे सुरक्षित ईरानी परमाणु केंद्रों को निशाना बनाते हैं, तो यह संघर्ष एक अंतहीन युद्ध में बदल सकता है, ठीक वैसे ही जैसे अतीत में वियतनाम युद्ध ने अमेरिका के संसाधनों को सोख लिया था। फिलहाल खाड़ी देशों ने टोल के बदले अमेरिका में बड़े व्यापार और निवेश समझौते करने पर सहमति जताई है, लेकिन जब तक नौसैनिक नाकेबंदी जारी है, तब तक समुद्री व्यापार पर अनिश्चितता बनी रहेगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ क्यों महत्वपूर्ण है?

यह दुनिया का सबसे बड़ा तेल आपूर्ति समुद्री मार्ग है, जहां से वैश्विक तेल व्यापार का लगभग 20% यानी रोजाना 2 करोड़ बैरल कच्चा तेल गुजरता है।

डोनाल्ड ट्रंप ने जहाजों पर कौन सा टैक्स लगाने का एलान किया था?

ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले मालवाहक जहाजों पर 20% 'संयुक्त राज्य अमेरिका प्रतिपूर्ति शुल्क' लगाने का प्रस्ताव दिया था, जिसे अब वापस ले लिया गया है।

होर्मुज संकट पर भारत का क्या रुख है?

भारत के विदेश मंत्रालय ने सीधे विरोध से बचते हुए वैश्विक ऊर्जा और आर्थिक सुरक्षा के लिए होर्मुज जलमार्ग में सुरक्षित और निर्बाध नौवहन की मांग की है।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान के किन इलाकों पर हमले किए हैं?

अमेरिकी सेना ने ईरान के बंदर अब्बास, चाबहार, जास्क, कोनारक, अबादान, किश, केशम और अबू मूसा द्वीपों पर भारी बमबारी की है।

ईरान के जवाबी सैन्य अभियान का क्या नाम है?

ईरान की आईआरजीसी (IRGC) ने अमेरिकी हमलों के जवाब में 'नस्र 2' सैन्य अभियान चलाया है, जिसके तहत बहरीन, जॉर्डन और कुवैत में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागी गईं।

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Jody Nageeb

Senior Editor

Expert in business, sports, and transportation trends.

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