Last updated: 24 अगस्त 2026
जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों के ध्वस्तीकरण पर मंडलायुक्त कोर्ट में सुनवाई, प्रशासनिक फेरबदल से फैसला टलने के आसार
उत्तर प्रदेश के रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों पर ध्वस्तीकरण की तलवार लटकी हुई है, जिसके कानूनी विवाद पर मंडलायुक्त न्यायालय में 25 अगस्त को सुनवाई तय है। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान द्वारा स्थापित इस उच्च शिक्षण संस्थान के भवनों को बिना स्वीकृत मानचित्र के निर्मित बताकर प्रशासन ने गिराने का आदेश दिया था। हालांकि, मुरादाबाद मंडल में नियमित मंडलायुक्त की अनुपस्थिति के कारण इस अहम सुनवाई की तारीख आगे बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

क्या है मामला
रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) और जिला प्रशासन ने मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट द्वारा संचालित जौहर विश्वविद्यालय के कुल 40 भवनों में से 38 भवनों को अनधिकृत माना है। जिलाधिकारी एवं आरडीए उपाध्यक्ष अजय कुमार द्विवेदी ने 15 जुलाई को इन भवनों को अवैध ठहराते हुए 15 दिन के भीतर ध्वस्त करने का सख्त आदेश जारी किया था। प्रशासन का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रबंधन केवल दो भवनों (मेडिकल कॉलेज और अकादमी ब्लॉक) का ही स्वीकृत नक्शा पेश कर पाया।
इस ध्वस्तीकरण आदेश के विरुद्ध मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट ने मंडलायुक्त न्यायालय में अपील दायर की है। याचिका के अंगीकरण (स्वीकृति) पर दोनों पक्षों की दलीलों और साक्ष्यों की जांच के लिए 25 अगस्त की तिथि तय की गई थी।
पृष्ठभूमि और विवाद की जड़ें
विवाद की शुरुआत तब हुई जब जिलाधिकारी ने 28 जून को एक प्रशासनिक दल भेजकर विश्वविद्यालय परिसर के सभी भवनों की पैमाइश कराई और उनके स्वीकृत मानचित्र तलब किए। विश्वविद्यालय ग्राम पंचायत सींगनखेड़ा क्षेत्र के अंतर्गत आता है।

प्रबंधन की ओर से डिप्टी रजिस्ट्रार डॉ. नूर उल सलाम और अधिवक्ता नासिर सुल्तान ने पक्ष रखते हुए दलील दी थी कि निर्माण के समय आरडीए का गठन ही नहीं हुआ था, इसलिए प्राधिकरण को कार्रवाई का अधिकार नहीं है। दूसरी ओर, प्रशासन ने इस तर्क को यह कहकर खारिज कर दिया कि उस समय जिला पंचायत से निर्माण स्वीकृति ली जानी अनिवार्य थी, और ट्रस्ट ने पहले भी दो भवनों के नक्शे पास कराए थे जिससे स्पष्ट है कि वे नियमों से अवगत थे।
विश्वविद्यालय में किसी भी जांच या कार्रवाई का असर छात्र-छात्राओं की पढ़ाई और उनके भविष्य पर नहीं पड़ना चाहिए। जौहर विश्वविद्यालय को बर्बाद करने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए।
ताजा घटनाक्रम और अधिवक्ताओं का रुख
हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा विश्वविद्यालय परिसर में की गई छापेमारी के बाद रामपुर में समाजवादी पार्टी कार्यालय में 30 से अधिक वरिष्ठ अधिवक्ताओं की आपात बैठक आयोजित हुई। बैठक में अधिवक्ता सतनाम सिंह मट्टू समेत अन्य वकीलों ने प्रशासन से छात्रों के शैक्षणिक भविष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की मांग की।

पूर्व सांसद और आजम खान की पत्नी तजीन फातिमा ने भी सरकार से इस ध्वस्तीकरण आदेश पर पुनर्विचार करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों को गिराने के बजाय उनके संरक्षण पर ध्यान दिया जाना चाहिए। सपा प्रदेश सचिव और पूर्व मंत्री सुरेंद्र सिंह सागर ने आरोप लगाया कि संस्थान को राजनीतिक बदले की भावना से निशाना बनाया जा रहा है।
छात्रों और संस्थान पर प्रभाव
बार-बार होने वाली जांच और ध्वस्तीकरण के नोटिसों से संस्थान की प्रशासनिक स्थिरता प्रभावित हो रही है। हजारों विद्यार्थियों के नामांकन और डिग्री की मान्यता को लेकर स्थानीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है। यदि 38 प्रमुख शैक्षणिक व प्रशासनिक ब्लॉक तोड़े जाते हैं, तो विश्वविद्यालय की दैनिक कक्षाएं, प्रयोगशालाएं और छात्रावास व्यवस्था पूरी तरह ठप हो सकती हैं।
क्या बातें अभी स्पष्ट नहीं हैं
वर्तमान में मुरादाबाद मंडल के निवर्तमान मंडलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह को कार्यमुक्त किया जा चुका है और उनके सेवा विस्तार पर शासन का स्पष्ट आदेश नहीं आया है। यद्यपि मुरादाबाद के जिलाधिकारी राजेंद्र सिंह पैंसिया को कार्यवाहक मंडलायुक्त बनाया गया है, लेकिन वे इस न्यायिक प्रकरण की नियमित सुनवाई करेंगे या नहीं, इस पर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट नहीं है। ट्रस्ट के अधिवक्ता मोहम्मद जुनैद एजाज के अनुसार, न्यायिक पीठ खाली होने से 25 अगस्त की सुनवाई आगे टलने के पूरे आसार हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
जौहर यूनिवर्सिटी के कितने भवनों पर ध्वस्तीकरण का आदेश है?
प्रशासन ने विश्वविद्यालय के कुल 40 भवनों में से 38 भवनों को बिना स्वीकृत मानचित्र का मानते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश दिया है।
विश्वविद्यालय के कौन से दो भवन वैध पाए गए हैं?
प्रबंधन द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों के अनुसार केवल मेडिकल कॉलेज और अकादमी ब्लॉक का नक्शा ही विकास प्राधिकरण के रिकॉर्ड में स्वीकृत पाया गया।
मंडलायुक्त कोर्ट में 25 अगस्त की सुनवाई क्यों टल सकती है?
स्थायी मंडलायुक्त के कार्यमुक्त होने और कार्यवाहक मंडलायुक्त द्वारा न्यायिक मामलों की सुनवाई पर संशय होने के कारण सुनवाई स्थगित होने की संभावना है।
प्रशासन ने विश्वविद्यालय प्रबंधन के किस तर्क को खारिज किया?
प्रबंधन का तर्क था कि निर्माण के समय आरडीए अस्तित्व में नहीं था, जिसे प्रशासन ने यह कहकर नकारा कि उस समय जिला पंचायत से अनुमति लेना अनिवार्य था।
अधिवक्ताओं की मुख्य मांग क्या है?
अधिवक्ताओं ने सरकार से मांग की है कि किसी भी कानूनी या प्रशासनिक जांच के दौरान नामांकित विद्यार्थियों की पढ़ाई और डिग्री पर कोई नकारात्मक असर न पड़े।
संसाधन
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