बैंक की कतारों में अटकी पेंशन: बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ में बुजुर्गों का इंतजार लंबा
अंतिम अद्यतन: 12 जून 2026
तेज धूप में बैंक और सीएससी केंद्रों के बाहर खड़े बुजुर्गों के हाथ में पासबुक है, पर खाते में वही पुराना खालीपन दिख रहा है। कहीं दो महीने, कहीं तीन महीने और छत्तीसगढ़ में करीब पांच महीने से सामाजिक सुरक्षा पेंशन का भुगतान अटका बताया जा रहा है। बिहार के कटिहार और मुजफ्फरपुर से लेकर सुपौल, भोजपुर, बांका, वैशाली, झारखंड के देवघर और छत्तीसगढ़ के सरगुजा-रायपुर तक शिकायतों की एक जैसी तस्वीर बन रही है। मामला केवल रकम का नहीं, उन लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का है जिनके लिए पेंशन दवा, राशन और छोटे खर्चों का मुख्य सहारा है।

घटनाक्रम कैसे आगे बढ़ा
बिहार के कटिहार में मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन योजना की राशि 10 जून को खातों में भेजी गई। इसी के बाद केंद्र प्रायोजित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था, विधवा और दिव्यांग पेंशन योजनाओं के लाभुक भी बैंक और सीएससी केंद्रों पर पहुंचे। खाते की जांच हुई, लेकिन रकम नहीं आई। कटिहार की पेंशन स्थिति में कुल 1,49,508 लाभुक दर्ज हैं, जिनमें 91,018 इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना से जुड़े हैं।
मुजफ्फरपुर में भी तस्वीर लगभग वैसी ही है। वहां 60 हजार से अधिक इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धजन पेंशन योजना के लाभुक भुगतान का इंतजार कर रहे हैं, जबकि मुख्यमंत्री पेंशन योजना की राशि भेजी जा चुकी है। कुढ़नी के चढ़ुआ के सीएससी संचालक सुशील कुमार ने बताया कि भुगतान की सूचना के बाद लाभुक उत्साहित थे, लेकिन खाते में पैसा न आने पर वे निराश लौटे।
सुपौल के पिपरा प्रखंड में निर्मली रतौली, कटैया, तुलापट्टी, पथरा उत्तर, पथरा दक्षिण और थुमहा सहित कई पंचायतों के वृद्ध लाभुक दो महीने से पेंशन न मिलने की शिकायत लेकर प्रखंड कार्यालय पहुंचे। पिपरा के बीडीओ अमरेन्द्र पंडित ने तकनीकी और प्रशासनिक समस्याओं की जानकारी मिलने की बात कही और संबंधित विभाग से समन्वय कर प्रक्रिया तेज करने का आश्वासन दिया।
झारखंड के देवघर जिले के काशीडीह गांव में कई बुजुर्गों ने तीन महीने से पेंशन न आने की बात कही। बांका के पंजवारा, सबलपुर और लौंढिया खुर्द में भी बुजुर्गों ने बताया कि पेंशन न मिलने से दवा और भोजन की व्यवस्था प्रभावित हो रही है। भोजपुर के चरपोखरी क्षेत्र में विधवा और वृद्धावस्था पेंशनधारक बैंक और सीएसपी के चक्कर लगा रहे हैं।
अहम तथ्य
कटिहार के आंकड़े बताते हैं कि देरी केवल भुगतान जारी होने तक सीमित नहीं है। वहां चार प्रमुख योजनाओं को मिलाकर 47,502 लाभुकों का बायोमेट्रिक सत्यापन अभी लंबित है, जबकि 4,665 लाभुकों का आधार मैपिंग पूरा नहीं हो पाया है। वृद्धावस्था पेंशन योजना में ही 32,797 लाभुकों का सत्यापन बाकी है और 3,334 का आधार मैपिंग लंबित है।

यही वह बिंदु है जहां प्रशासनिक प्रक्रिया और गरीब परिवारों की जरूरत सीधे टकरा रही है। आधार सीडिंग और बायोमेट्रिक सत्यापन भुगतान प्रणाली को सही व्यक्ति तक रकम पहुंचाने के लिए बनाए गए हैं, लेकिन जब सत्यापन अधूरा रहता है या पोर्टल में बदलाव होता है, तो इसका भार सबसे कमजोर लोगों पर पड़ता है। बैंक तक जाना, पासबुक अपडेट कराना और फिर खाली हाथ लौटना उनके लिए केवल असुविधा नहीं, बल्कि खर्च भी है।
सरगुजा में विभाग ने अलग वजह बताई है। ईटीवी भारत की रिपोर्ट के मुताबिक, पेंशन में देरी एसएनए-स्पर्श पोर्टल के कारण बताई गई, क्योंकि इसी पोर्टल के माध्यम से अब केंद्र और राज्य दोनों योजनाओं का भुगतान होना है। विभाग का दावा है कि केंद्रीय योजना का अप्रैल तक और राज्य योजनाओं का मई तक भुगतान हो चुका है, जबकि कई हितग्राहियों ने दिसंबर या जनवरी के बाद राशि न मिलने की शिकायत की।
छत्तीसगढ़ में मामला राजनीतिक स्तर तक भी पहुंचा। रायपुर में कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर ने राज्यपाल रमन डेका को पत्र लिखकर कहा कि प्रदेश के करीब 22.70 लाख पेंशनधारियों को लगभग 5 महीने से पेंशन नहीं मिली है। उन्होंने वृद्धावस्था, विधवा, दिव्यांग और अन्य सामाजिक सुरक्षा पेंशनधारियों को बकाया राशि दिलाने की मांग की।
प्रतिक्रियाएं और जवाब
कटिहार के सामाजिक सुरक्षा कोषांग की सहायक निदेशक यशस्वी के अनुसार मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन योजना की राशि राज्य सरकार जारी करती है, इसलिए वह लाभुकों के खातों में पहुंच चुकी है। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था, विधवा और दिव्यांग पेंशन योजनाएं केंद्र प्रायोजित हैं, इसलिए उनकी राशि केंद्र सरकार से प्राप्त होने के बाद भुगतान किया जाएगा। उन्होंने जून माह में राशि जारी होने की संभावना जताई।
पिपरा के बीडीओ अमरेन्द्र पंडित ने लाभुकों को आश्वासन दिया कि संबंधित विभाग से समन्वय कर प्रक्रिया तेज की जा रही है और एक सप्ताह के भीतर लंबित लाभुकों के खातों में राशि भेजने का प्रयास किया जाएगा। यह आश्वासन उन वृद्धजनों के लिए राहत की उम्मीद है, जो दो महीने से दवा और भोजन जैसे खर्चों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
वैशाली के जंदाहा में शारदा देवी ने बताया कि 400 रुपये से बढ़कर 1100 रुपये हुई पेंशन दो महीने से नहीं मिली, जिससे घर चलाना मुश्किल हो गया है। इसी क्षेत्र की सिया देवी ने खुद को आर्थिक रूप से कमजोर बताते हुए कहा कि वृद्धा पेंशन उनके लिए एकमात्र सहारा है। ऐसे बयान स्थानीय स्तर की समस्या को सीधा मानवीय चेहरा देते हैं।
बड़ी तस्वीर में इसका मतलब
पेंशन की देरी कागज पर प्रशासनिक समस्या दिखती है, लेकिन जमीन पर यह दवा छूटने, राशन उधार लेने और बार-बार बैंक जाने की मजबूरी में बदल जाती है। जिन लाभुकों के पास कोई स्थायी आय नहीं है, उनके लिए दो या तीन महीने की देरी भी बड़ा झटका है। बांका और देवघर की रिपोर्टों में बुजुर्गों ने इसी बात को दोहराया कि पेंशन उनके जीवन-यापन का मुख्य साधन है।

बिहार में मुख्यमंत्री पेंशन और केंद्र प्रायोजित इंदिरा गांधी योजनाओं के भुगतान में अंतर भी साफ दिख रहा है। राज्य योजना की राशि कई जगह खातों में पहुंची, जबकि केंद्र प्रायोजित योजनाओं की रकम लंबित बताई गई। इससे लाभुकों में भ्रम बढ़ा, क्योंकि एक ही परिवार या गांव में किसी को पैसा मिला और किसी को नहीं।
छत्तीसगढ़ में एसएनए-स्पर्श पोर्टल का हवाला यह दिखाता है कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था में बदलाव का असर सीधे अंतिम लाभार्थी पर पड़ सकता है। यदि डेटा, सत्यापन और भुगतान चैनल एक साथ नहीं चलते, तो योजना का उद्देश्य कमजोर पड़ता है। भारत में सामाजिक सुरक्षा योजनाएं बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगों के लिए न्यूनतम सहारा देती हैं; देरी होने पर उसका असर परिवार की छोटी अर्थव्यवस्था तक फैलता है।
आगे क्या तय है
कटिहार और मुजफ्फरपुर के अधिकारियों ने केंद्र प्रायोजित योजनाओं की राशि जून में मिलने की उम्मीद जताई है। पिपरा में बीडीओ ने एक सप्ताह के भीतर भुगतान कराने का प्रयास करने की बात कही है। सरगुजा में विभाग का दावा है कि भुगतान प्रक्रिया का समाधान हो गया है और अलग-अलग योजनाओं की राशि एसएनए-स्पर्श से खातों में जाएगी।
लाभुकों के लिए अभी सबसे अहम काम अपने आधार मैपिंग, बायोमेट्रिक सत्यापन और बैंक खाते की स्थिति की जांच कराना है, खासकर उन जिलों में जहां सत्यापन लंबित है। प्रशासन के लिए चुनौती यह है कि तकनीकी सुधार और भुगतान प्रक्रिया के बीच बुजुर्ग, विधवा और दिव्यांग लाभुकों को बार-बार बैंक-केंद्रों के चक्कर न लगाने पड़ें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
कटिहार में कितने पेंशन लाभुक प्रभावित हैं?
कटिहार में सामाजिक सुरक्षा की विभिन्न पेंशन योजनाओं के कुल 1,49,508 लाभुक पंजीकृत हैं। इनमें 91,018 लाभुक इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना से जुड़े हैं।
बिहार में पेंशन भुगतान क्यों अटका बताया जा रहा है?
कटिहार और मुजफ्फरपुर में अधिकारियों ने कहा कि मुख्यमंत्री पेंशन योजना की राशि राज्य सरकार से आई, लेकिन केंद्र प्रायोजित इंदिरा गांधी योजनाओं की राशि अभी प्राप्त नहीं हुई।
सरगुजा में पेंशन देरी की वजह क्या बताई गई?
सरगुजा में रिपोर्ट के अनुसार देरी एसएनए-स्पर्श पोर्टल से जुड़ी बताई गई, जिसके माध्यम से अब केंद्र और राज्य दोनों योजनाओं का भुगतान होना है।
छत्तीसगढ़ में कितने पेंशनधारियों का मुद्दा उठाया गया?
पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर ने राज्यपाल रमन डेका को लिखे पत्र में करीब 22.70 लाख पेंशनधारियों को लगभग 5 महीने से भुगतान न मिलने का दावा किया।
लाभुकों को अभी क्या जांचना चाहिए?
जिन लाभुकों का भुगतान अटका है, उन्हें बैंक खाते, आधार मैपिंग और बायोमेट्रिक सत्यापन की स्थिति स्थानीय बैंक, सीएससी या संबंधित प्रखंड कार्यालय में जांचनी चाहिए।
संसाधन
इस लेख में उद्धृत स्रोत और संदर्भ।
