शामली धर्मांतरण मामला आज: आयुष के दावे और जांच

शामली में आयुष मलिक उर्फ मोहम्मद अली के धर्म परिवर्तन और चांदनी कुरैशी से निकाह का मामला पुलिस जांच, पारिवारिक आरोपों और कानूनी सवालों के बीच फंसा है।

शामली धर्मांतरण मामला: आयुष मलिक के दावे और जांच
अंतिम अपडेटJun 9, 2026, 4:56:58 PM
3 सप्ताह पहले
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शामली धर्मांतरण मामला आज: आयुष मलिक के दावे और पुलिस जांच आमने-सामने

अंतिम अपडेट: 9 जून 2026, 18:34 भारतीय समय

उत्तर प्रदेश के शामली में 9 जून 2026 को आयुष मलिक उर्फ मोहम्मद अली के धर्म परिवर्तन और चांदनी कुरैशी से निकाह का मामला पुलिस जांच, पारिवारिक आरोपों और सार्वजनिक बहस के केंद्र में है। पुलिस ने चांदनी कुरैशी और उनके पिता इस्लाम कुरैशी को गिरफ्तार किया है, जबकि आयुष लगातार कह रहे हैं कि उन्होंने अपनी मर्जी से इस्लाम अपनाया।

मामले का असर केवल एक परिवार तक सीमित नहीं रहा, क्योंकि इसमें धर्म की स्वतंत्रता, कथित दबाव, संपत्ति विवाद और ऑनलाइन धार्मिक सामग्री की भूमिका जैसे सवाल साथ-साथ जुड़ गए हैं। शामली पुलिस अब निकाहनामे, बैंक खातों, मोबाइल फोन, सीसीटीवी और नामजद लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

शामली धर्मांतरण मामले से जुड़ी प्रतीकात्मक तस्वीर
आयुष मलिक का दावा है कि उन्होंने अपनी मर्जी से इस्लाम अपनाया, जबकि परिवार इसे साजिश बता रहा है।

पूरी कहानी

मामला 6 जून को दर्ज एफआईआर के बाद तेज हुआ, जब आयुष मलिक के पिता देवराज मलिक ने पुलिस में शिकायत दी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि उनके बेटे का धर्म परिवर्तन संपत्ति हड़पने के मकसद से कराया गया। इसके बाद पुलिस ने चांदनी कुरैशी, उनके पिता इस्लाम कुरैशी, परिवार से जुड़े लोगों और मौलवियों समेत कुल 10 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया।

आयुष मलिक ने सार्वजनिक रूप से अलग बात कही है। उनका कहना है कि दस्तावेजों में उनका नाम आयुष मलिक है, लेकिन अब वे मोहम्मद अली के नाम से जाने जाते हैं। उन्होंने कहा कि वे स्कूल के समय से इस्लाम के बारे में सीख रहे थे और 2012-13 के आसपास उनकी रुचि और बढ़ी। कुछ स्रोतों में उन्होंने यह भी बताया कि यूट्यूब पर धार्मिक सामग्री देखने और इस्लामी साहित्य पढ़ने से उनकी समझ बनी।

आयुष मलिक और चांदनी कुरैशी मामले की जांच का प्रतीकात्मक दृश्य
पुलिस निकाह, दस्तावेजों और कथित आर्थिक लेनदेन से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है।

चांदनी कुरैशी से मुलाकात को लेकर आयुष ने बताया कि वे कंधे की चोट के इलाज के दौरान फिजियोथेरेपी सेंटर गए थे, वहीं दोनों की पहचान हुई। उनके मुताबिक रिश्ता आगे बढ़ा और चार साल पहले निकाह हुआ, लेकिन वे साथ नहीं रह रहे थे। परिवार का आरोप है कि यह रिश्ता सामान्य प्रेम कहानी नहीं, बल्कि योजनाबद्ध तरीके से बनाया गया संबंध था।

देवराज मलिक ने दावा किया है कि उनके बेटे को डराया गया और परिवार की संपत्ति पर नजर रखी गई। दूसरी तरफ आयुष का कहना है कि उनके नाम कोई संपत्ति नहीं है और वे अपने पिता से कह चुके हैं कि संपत्ति उनकी बहनों और मां के नाम कर दी जाए। यही टकराव इस मामले को निजी आस्था से आगे ले जाकर आर्थिक आरोपों और आपराधिक जांच तक ले आया है। मामले की विस्तृत पृष्ठभूमि में दोनों पक्षों के दावे दर्ज हैं।

कौन-कौन शामिल है

इस मामले के केंद्र में आयुष मलिक हैं, जो शामली के दवा कारोबारी परिवार से आते हैं और खुद को मोहम्मद अली कहते हैं। उनके पिता देवराज मलिक शामली के दवा व्यवसायिक संघ से जुड़े बताए गए हैं और उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।

चांदनी कुरैशी, जिनसे आयुष निकाह का दावा करते हैं, इस मामले में गिरफ्तार की गई हैं। उनके पिता इस्लाम कुरैशी को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस ने चांदनी के परिवार के कुछ लोगों और मौलवियों को भी नामजद किया है। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक तीन मौलाना समेत कई आरोपियों की तलाश की जा रही है।

मेरा दिल किया तो मैंने इस्लाम अपनाया, संविधान मुझे ऐसा करने की इजाज़त देता है.

आयुष मलिक, मामले के केंद्र में मौजूद युवक

शामली के पुलिस अधीक्षक नरेंद्र प्रताप सिंह ने मीडिया से कहा कि संपत्ति हड़पने के उद्देश्य से साजिशन धर्म परिवर्तन के आरोप में गिरफ्तारी हुई है। पुलिस का रुख है कि जांच में यह देखा जाएगा कि धर्म परिवर्तन स्वेच्छा से हुआ या किसी दबाव, प्रलोभन या साजिश के तहत।

आंकड़ों में मामला

एफआईआर में 9 नामजद अभियुक्तों और 1 अज्ञात व्यक्ति का जिक्र है। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक पुलिस 50 से अधिक संदिग्धों की भूमिका देख रही है और चांदनी व उनके पिता को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।

जांच में भारतीय न्याय संहिता की धाराएं 318(4), 336(3), 338, 61(2), 351(3), 308(5) जोड़ी गई हैं। इनके साथ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 की धारा 3 और 5(1) भी लगाई गई हैं। ये धाराएं धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक साजिश, धमकी और बल, प्रलोभन या धोखे से धर्म परिवर्तन जैसे आरोपों से जुड़ी हैं।

परिवार की ओर से संपत्ति को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। कुछ रिपोर्टों में शोरूम की कीमत करीब 20 करोड़ रुपये और कुल संपत्ति 50 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई, जबकि कुछ आरोपों में 60-70 करोड़ रुपये की संपत्ति का जिक्र है। ये दावे अभी पुलिस जांच का हिस्सा हैं, इसलिए इन्हें आरोप के तौर पर ही पढ़ा जाना चाहिए। संपत्ति वाले पहलू ने इस केस को और संवेदनशील बना दिया है।

धर्म परिवर्तन विरोधी कानून
उत्तर प्रदेश का यह कानून बल, प्रलोभन, धोखे या अनुचित प्रभाव से कराए गए धर्म परिवर्तन को अपराध मानता है।
निकाहनामा
मुस्लिम विवाह से जुड़ा दस्तावेज, जिसकी वैधता और समय को लेकर इस मामले में जांच की बात सामने आई है।
एफआईआर
पुलिस में दर्ज शुरुआती रिपोर्ट, जिसके आधार पर आपराधिक जांच आगे बढ़ती है।

इसका मतलब क्या है

यह मामला इसलिए बड़ा बन गया है क्योंकि इसमें दो संवैधानिक और कानूनी सवाल साथ खड़े हैं। एक तरफ किसी वयस्क व्यक्ति की धार्मिक स्वतंत्रता है, दूसरी तरफ परिवार का आरोप है कि यह फैसला दबाव, प्रभाव और संपत्ति के लालच से जुड़ा है। जब तक जांच पूरी नहीं होती, दोनों दावों को अलग-अलग रखना जरूरी है।

धर्म स्वतंत्रता और पुलिस जांच से जुड़ा प्रतीकात्मक चित्र
मामले ने निजी आस्था, पारिवारिक भरोसे और कानून की सीमा को लेकर बहस तेज कर दी है।

भारत में ऐसे मामलों में सामाजिक प्रतिक्रिया अक्सर बहुत तेज होती है, खासकर जब प्रेम विवाह, धर्म परिवर्तन और संपत्ति एक ही कहानी में आ जाएं। शामली में भी यही हुआ है। हिंदू संगठनों की प्रतिक्रिया, परिवार का दबाव और पुलिस कार्रवाई ने इस घटना को स्थानीय विवाद से राष्ट्रीय चर्चा तक पहुंचा दिया।

पाठकों के लिए यहां सबसे अहम बात यह है कि वयस्क व्यक्ति की पसंद और आपराधिक साजिश के आरोप दो अलग मुद्दे हैं। अदालत और जांच एजेंसियां दस्तावेज, गवाह, आर्थिक लेनदेन और कथित दबाव जैसे ठोस पहलुओं को देखेंगी। केवल सार्वजनिक बयान से पूरा सच तय नहीं होगा।

आगे क्या हो सकता है

पुलिस निकाहनामे, बैंक खातों, मोबाइल फोन, सीसीटीवी फुटेज और नामजद आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए शामली, मुजफ्फरनगर और गाजियाबाद समेत कई जगह दबिश दी जा रही है।

अगला अहम चरण पुलिस जांच की प्रगति, गिरफ्तार आरोपियों की कानूनी कार्यवाही और आयुष मलिक के बयान की जांच से जुड़ा होगा। चांदनी कुरैशी और उनके परिवार की ओर से विस्तृत कानूनी पक्ष सामने आने पर तस्वीर और साफ होगी। आयुष के अपने बयान इस जांच की बहस में प्रमुख आधार बने हुए हैं।

लोग यह भी पूछ रहे हैं

शामली के आयुष मलिक ने इस्लाम क्यों अपनाने की बात कही?

आयुष मलिक का दावा है कि उन्होंने वर्षों तक इस्लाम के बारे में पढ़ा, सुना और समझा। उन्होंने कहा कि यह फैसला किसी दबाव या लालच से नहीं, बल्कि अपनी समझ और आस्था से लिया गया।

चांदनी कुरैशी को क्यों गिरफ्तार किया गया?

पुलिस ने आयुष के पिता की शिकायत के आधार पर चांदनी कुरैशी और उनके पिता इस्लाम कुरैशी को गिरफ्तार किया। आरोप है कि धर्म परिवर्तन संपत्ति हड़पने की साजिश के तहत कराया गया, लेकिन आयुष इस आरोप को नकारते हैं।

एफआईआर में कितने लोगों के नाम हैं?

मामले में 9 नामजद अभियुक्तों और 1 अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने की बात सामने आई है। इनमें चांदनी के परिवार से जुड़े लोगों और मौलवियों का भी जिक्र है।

क्या आयुष और चांदनी का निकाह हुआ था?

आयुष का दावा है कि उन्होंने चार साल पहले चांदनी कुरैशी से निकाह किया था। परिवार ने निकाहनामे पर सवाल उठाए हैं और पुलिस इसकी जांच कर रही है।

क्या यह मामला केवल धर्म परिवर्तन का है?

नहीं, इस मामले में धर्म परिवर्तन के साथ संपत्ति, कथित दबाव, निकाह और ऑनलाइन धार्मिक सामग्री की भूमिका जैसे कई पहलू जुड़े हैं। पुलिस इसी वजह से दस्तावेजों और आर्थिक लेनदेन की भी जांच कर रही है।

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लेखक

Ahmed Sezer

वरिष्ठ संपादक

राजनीति, सरकार और सामान्य जनहित के विषयों में विशेषज्ञ।

यह लेख AI-सहायता प्राप्त संपादकीय टूल की मदद से तैयार किया गया और प्रकाशन से पहले Trend Digest के संपादकीय मानकों के तहत समीक्षा की गई।

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