[5] मुख्य बातें: E20 विवाद पर नितिन गडकरी का टेक दिग्गजों पर केस

E20 पेट्रोल विवाद और एआई डीपफेक वीडियो को लेकर नितिन गडकरी ने बॉम्बे हाई कोर्ट में मेटा, एक्स और गूगल के खिलाफ 11 करोड़ का मानहानि मुकदमा दायर किया है।

E20 विवाद: नितिन गडकरी ने मेटा, एक्स और गूगल पर ठोका केस
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E20 पेट्रोल विवाद: नितिन गडकरी पहुंचे बॉम्बे हाई कोर्ट, टेक कंपनियों पर 11 करोड़ का मानहानि केस

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सोशल मीडिया पर अपने खिलाफ चल रहे डीपफेक और भ्रामक अभियानों पर कड़ा रुख अपनाया है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने उन्हें मेटा (फेसबुक/इन्स्टाग्राम), एक्स (ट्विटर) और गूगल जैसी दिग्गज टेक कंपनियों के खिलाफ 11 करोड़ रुपये का मानहानि मुकदमा (सिविल सूट) दायर करने की मंजूरी दे दी है।

नितिन गडकरी बॉम्बे हाई कोर्ट केस
बॉम्बे हाई कोर्ट ने केंद्रीय मंत्री को कानूनी कार्रवाई की अनुमति दी — Navbharat Times

क्या है पूरा मामला

पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया पर एआई (AI) से तैयार डीपफेक वीडियो, फर्जी तस्वीरें और मीम्स शेयर किए जा रहे थे। इनमें आरोप लगाया गया कि सरकार की E20 (पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिश्रण) नीति से नितिन गडकरी और उनके परिवार को व्यक्तिगत रूप से भारी वित्तीय फायदा पहुंच रहा है। बॉम्बे हाई कोर्ट के जस्टिस अभय आहूजा की पीठ ने उन्हें इन टेक दिग्गजों और अज्ञात इंटरनेट यूजर्स ('जॉन डो') के खिलाफ कोर्ट जाने की अनुमति दी, जिसके बाद अब इस मानहानि याचिका पर अगली सुनवाई जस्टिस आरिफ डॉक्टर की पीठ करेगी।

मामले की पृष्ठभूमि

नितिन गडकरी कानूनी कार्रवाई
गडकरी ने 86 पन्नों की याचिका दाखिल कर ₹11 करोड़ का हर्जाना मांगा है — AajTak

भारत सरकार ने कच्चे तेल के महंगे आयात को कम करने, विदेशी मुद्रा बचाने और किसानों की आय बढ़ाने के मकसद से इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम (EBP) की शुरुआत की थी। इसे 2025-26 तक 20% यानी E20 तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया गया। हालांकि, जब से E20 ईंधन बाजार में आया, पुरानी गाड़ियों के मालिकों ने माइलेज घटने और इंजन पार्ट्स में खराबी की शिकायतें दर्ज करानी शुरू कर दीं। सोशल मीडिया पर इस असंतोष का ठीकरा नितिन गडकरी पर फोड़ा जाने लगा, क्योंकि वे लगातार वैकल्पिक ईंधनों की वकालत करते रहे हैं।

ताजा घटनाक्रम और गडकरी का पक्ष

बॉम्बे हाईकोर्ट सुनवाई
हाईकोर्ट 5 अगस्त को इस मामले पर अगली सुनवाई करेगा — Jagran

कोर्ट में पेश 86 पन्नों की याचिका में नितिन गडकरी ने अपने वकील संदीप एस. लड्डा के जरिए स्पष्ट किया कि E20 इथेनॉल नीति पूरी तरह से पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) के अधीन आती है और कैबिनेट ही इसका मूल्य निर्धारण करती है। सड़क परिवहन मंत्री होने के नाते इस नीति के संचालन या वित्तीय फैसलों से उनका कोई संबंध नहीं है।

परिवार पर लगे आरोपों को 'दस्तावेजी झूठ' बताते हुए गडकरी ने कहा कि उनके बेटों के व्यवसाय में इथेनॉल की हिस्सेदारी बेहद मामूली है। देश के कुल इथेनॉल कारोबार में उनके पारिवारिक उद्यम का हिस्सा 0.5% से भी कम है और उन पर लगभग 1600 करोड़ रुपये का कर्ज है। याचिका में 26 विशिष्ट लिंक्स का उल्लेख किया गया है, जहां उनकी अनुमति के बिना एआई-जनरेटेड वॉयस और फेस-स्वैप वीडियो का इस्तेमाल करके मानहानि की गई।

इसके क्या मायने हैं

यह मामला भारत में एआई-जनरेटेड डीपफेक और सोशल मीडिया पर मानहानिकारक कंटेंट के खिलाफ किसी वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री द्वारा उठाया गया सबसे बड़ा कानूनी कदम है। गडकरी ने साफ किया है कि वे नीतियों की जायज और निष्पक्ष राजनीतिक आलोचना के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन व्यक्तिगत छवि खराब करने के लिए गढ़ी गई फर्जी सामग्री और गालियों पर कानूनी कार्रवाई जरूरी है। इस मुकदमे में टेक प्लेटफॉर्म्स के अलावा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) को भी पक्षकार बनाया गया है ताकि ऑनलाइन फर्जी कंटेंट हटाने की जवाबदेही तय की जा सके।

क्या अब भी स्पष्ट नहीं है

यद्यपि कोर्ट ने सिविल सूट दायर करने की प्रक्रियात्मक मंजूरी दे दी है, लेकिन अंतरिम राहत—जैसे कि विवादित वीडियो और लिंक्स को तुरंत हटाने या ब्लॉक करने के आदेश—पर फैसला होना अभी बाकी है। बॉम्बे हाई कोर्ट की बेंच इस मानहानि याचिका पर आगे सुनवाई करेगी, जिसके बाद ही टेक कंपनियों और केंद्र सरकार को दिए जाने वाले निर्देशों का दायरा साफ हो सकेगा।

सवाल-जवाब (FAQ)

नितिन गडकरी ने किन कंपनियों के खिलाफ कोर्ट का रुख किया है?

उन्होंने मेटा (फेसबुक/इन्स्टाग्राम), एक्स (ट्विटर), गूगल/यूट्यूब और अज्ञात सोशल मीडिया यूजर्स के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया है।

नितिन गडकरी ने कितना हर्जाना मांगा है?

उन्होंने अपनी और अपने परिवार की छवि खराब करने वाले डीपफेक कंटेंट के खिलाफ 11 करोड़ रुपये के हर्जाने का दावा किया है।

E20 इथेनॉल नीति किस मंत्रालय की है?

यह नीति पूरी तरह से केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) द्वारा संचालित और लागू की जाती है।

गडकरी के परिवार की इथेनॉल कारोबार में कितनी हिस्सेदारी है?

गडकरी के अनुसार उनके पारिवारिक बिजनेस में इथेनॉल सिर्फ 10% है, जो देश के कुल इथेनॉल कारोबार का मात्र 0.5% से भी कम हिस्सा है।

यह विवाद अचानक क्यों बढ़ा?

पुराने वाहन मालिकों द्वारा E20 ईंधन से माइलेज घटने और इंजन में खराबी की शिकायतों के बाद सोशल मीडिया पर डीपफेक वीडियो बनाकर गडकरी पर आरोप लगाए जा रहे थे।

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लेखक

Ahmed Sezer

वरिष्ठ संपादक

राजनीति, सरकार और सामान्य जनहित के विषयों में विशेषज्ञ।

यह लेख AI-सहायता प्राप्त संपादकीय टूल की मदद से तैयार किया गया और प्रकाशन से पहले Trend Digest के संपादकीय मानकों के तहत समीक्षा की गई।

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