सोनम वांगचुक का अनशन 19वें दिन पहुंचा, अदालत ने रोज चिकित्सा निगरानी का निर्देश दिया
अंतिम अद्यतन: 16 जुलाई 2026
नीट परीक्षा से जुड़े आरोपों और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की मांग ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन को राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का अनिश्चितकालीन अनशन गुरुवार को 19वें दिन पहुंच गया। उनकी सेहत को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय ने नियमित चिकित्सीय निगरानी और जरूरत पड़ने पर तत्काल सहायता देने का निर्देश दिया है। इसी बीच सांसदों, वकीलों और कलाकारों ने सरकार से संवाद शुरू करने तथा वांगचुक से अनशन समाप्त करने की अपील की है।

आंदोलन की पृष्ठभूमि
यह प्रदर्शन नीट स्नातक 2026 परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों, परीक्षा व्यवस्था में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग से जुड़ा है। उपलब्ध विवरण के अनुसार परीक्षा में 22 लाख से अधिक विद्यार्थी शामिल हुए थे और आरोपों के बाद परीक्षा रद्द कर 21 जून को दोबारा आयोजित की गई। इसके बाद विद्यार्थियों और युवाओं के बीच जवाबदेही को लेकर नाराजगी बढ़ी।
इसी माहौल में कॉकरोच जनता पार्टी नाम से युवाओं का समूह सामने आया। वांगचुक 6 जून को इसके पहले प्रदर्शन में शामिल हुए और बाद में बेमियादी भूख हड़ताल पर बैठ गए। आंदोलन का केंद्र अब केवल परीक्षा की गड़बड़ियों तक सीमित नहीं है; प्रदर्शनकारी सरकार से सीधे संवाद, जिम्मेदारी तय करने और शिक्षा व्यवस्था में ठोस बदलाव की मांग कर रहे हैं।
मौके से प्रकाशित विवरणों में गर्मी, भारी उमस, अचानक बारिश और सीमित सुविधाओं का उल्लेख है। वांगचुक के अलावा करीब दस अन्य प्रदर्शनकारी भी अलग-अलग अवधि से अनशन कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अपेक्षाकृत कम सार्वजनिक ध्यान मिला है।
घटनाक्रम में क्या हुआ
दिल्ली उच्च न्यायालय ने वांगचुक की सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई की। केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि उनकी प्रतिदिन जांच की जा रही है। अदालत ने सरकारी चिकित्सकों से नियमित जांच, स्वास्थ्य की दैनिक नैदानिक निगरानी और चिकित्सकीय सलाह के आधार पर आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने को कहा। इसके बाद याचिका का निपटारा कर दिया गया।
वांगचुक ने अपने समर्थकों से अनशन समाप्त कराने की अपील के बजाय प्रस्तावित संसद मार्च में शामिल होने को कहा। उन्होंने वीडियो संदेश में कहा, “मेरी तबीयत बहुत अच्छी तो नहीं है, लेकिन उतनी बुरी भी नहीं है।” इसके बाद उन्होंने लोगों से 20 जुलाई को प्रस्तावित शांतिपूर्ण मार्च का हिस्सा बनने का आग्रह किया। पुलिस ने भी इस कार्यक्रम और संसद के मानसून सत्र से पहले जंतर-मंतर पर गतिविधियों को देखते हुए सतर्कता बढ़ाई है।

समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव, धर्मेंद्र यादव और नरेश उत्तम पटेल जंतर-मंतर पहुंचे। उन्होंने वांगचुक का हालचाल जाना और आंदोलन को समर्थन दिया। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव पहले ही उनसे अनशन समाप्त करने की अपील कर चुके हैं, जबकि सांसद प्रिया सरोज ने उठाए गए मुद्दों को संसद से सड़क तक समर्थन देने की बात कही थी।
अदालत की निगरानी, बढ़ते राजनीतिक समर्थन और प्रस्तावित मार्च ने आंदोलन को नए चरण में पहुंचा दिया है। फिर भी उपलब्ध स्रोतों में सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच किसी औपचारिक बातचीत या मांगों पर सहमति की पुष्टि नहीं की गई है।
समर्थकों की प्रतिक्रियाएं
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने वांगचुक से मुलाकात कर अनशन खत्म करने का आग्रह किया। उन्होंने पत्र में लिखा, “प्लीज, अपनी ताकत आगे के लंबे रास्ते के लिए बचाकर रखें। यह अनशन खत्म करें, उस काम पर वापस जाएं जिसमें आप सबसे अच्छे हैं।” उनका कहना था कि शिक्षा व्यवस्था की समस्याओं के विरुद्ध लंबी लड़ाई के लिए वांगचुक का स्वस्थ रहना जरूरी है।
राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने सरकार से पूछा कि जब कोई व्यक्ति अपनी जान दांव पर लगाकर विरोध कर रहा है, तो बातचीत की पहल क्यों नहीं हो रही। अभिनेता अतुल कुलकर्णी ने 16 जुलाई को एक दिन का उपवास रखने की घोषणा की। सोनाक्षी सिन्हा, फातिमा सना शेख, समय रैना, विशाल ददलानी, सुरेंद्र शर्मा और अन्य सार्वजनिक हस्तियों ने भी वांगचुक की सेहत पर चिंता जताते हुए संवाद की मांग की।
इसका व्यापक असर
इस घटनाक्रम का सीधा संबंध उन विद्यार्थियों और परिवारों से है जिनका भविष्य प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता पर निर्भर करता है। 22 लाख से अधिक अभ्यर्थियों वाली परीक्षा में अनियमितता का आरोप केवल एक परीक्षा परिणाम का प्रश्न नहीं रह जाता; इससे तैयारी पर खर्च हुए समय, परिवारों की आर्थिक योजना और संस्थानों पर भरोसा प्रभावित होता है।

आंदोलन में राजनीतिक दलों और कलाकारों की भागीदारी ने सार्वजनिक पहुंच बढ़ाई है, लेकिन इससे मूल मांगों के पीछे छूटने का खतरा भी सामने आया है। प्रकाशित टिप्पणियों में सवाल उठाया गया है कि चर्चा शिक्षा मंत्री की जवाबदेही और परीक्षा सुधार से हटकर नेताओं की उपस्थिति या अनुपस्थिति पर केंद्रित न हो जाए। आंदोलन की विश्वसनीयता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह अपनी मांगें स्पष्ट रखे और विद्यार्थियों से जुड़े ठोस मुद्दों को केंद्र में बनाए रखे।
आगे क्या होगा
अगला घोषित कदम 20 जुलाई का शांतिपूर्ण संसद मार्च है। अदालत के निर्देश के अनुसार तब तक वांगचुक की रोज चिकित्सा निगरानी जारी रहनी है और चिकित्सकों की सलाह पर आवश्यक हस्तक्षेप किया जाना है।
अनशन कब समाप्त होगा और सरकार बातचीत शुरू करेगी या नहीं, इसकी पुष्टि उपलब्ध स्रोतों में नहीं है। आने वाले दिनों में स्वास्थ्य रिपोर्ट, मार्च की अनुमति और सरकार की प्रतिक्रिया आंदोलन की दिशा तय करेंगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सोनम वांगचुक अनशन क्यों कर रहे हैं?
वे नीट स्नातक 2026 प्रश्नपत्र लीक के आरोपों पर कार्रवाई, परीक्षा व्यवस्था में सुधार और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग से जुड़े आंदोलन में अनशन कर रहे हैं।
उनका अनशन कितने दिन से चल रहा है?
16 जुलाई 2026 को उनका अनशन 19वें दिन पहुंचा। अन्य कई प्रदर्शनकारी भी अलग-अलग अवधि से भूख हड़ताल पर बैठे हैं।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने क्या निर्देश दिया?
अदालत ने सरकारी चिकित्सकों से नियमित जांच, दैनिक नैदानिक निगरानी और जरूरत पड़ने पर तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
20 जुलाई को क्या होने वाला है?
आंदोलन से जुड़े लोगों ने 20 जुलाई को संसद की ओर शांतिपूर्ण मार्च का आह्वान किया है। वांगचुक ने समर्थकों से इसमें शामिल होने की अपील की है।
इस आंदोलन का विद्यार्थियों पर क्या असर है?
यह आंदोलन प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता, प्रश्नपत्र सुरक्षा और जिम्मेदारी तय करने की मांग को राष्ट्रीय स्तर पर सामने ला रहा है। इसका परिणाम परीक्षा व्यवस्था पर विद्यार्थियों के भरोसे को प्रभावित कर सकता है।
Resources
Sources and references cited in this article.
