गेहूँ उत्पादन पर मौसम की मार — सरकारी खरीद में 11% की बड़ी गिरावट

भारत में बेमौसम बारिश और गर्मी के कारण गेहूँ उत्पादन प्रभावित हुआ है। सरकारी खरीद में 11% की कमी आई है और सर्वर की समस्याओं ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

गेहूँ उत्पादन और सरकारी खरीद 2026: 11% की गिरावट और मौसम का असर
Last UpdateApr 26, 2026, 5:04:37 PM
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Last updated: 26 अप्रैल 2026, 05:04 PM

भारत में गेहूँ उत्पादन पर मौसम की दोहरी मार — सरकारी खरीद में 11% की गिरावट

बेमौसम बारिश और मार्च की तपती गर्मी ने इस साल देश के अन्नदाताओं की मेहनत पर पानी फेर दिया है, जिससे गेहूँ का दाना पतला और पैदावार कम हो गई है। हालत यह है कि सरकारी खरीद के आंकड़ों में पिछले साल के मुकाबले 11 प्रतिशत की भारी कमी दर्ज की गई है, जिससे अब रसोई के बजट पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। ग्रामीण भारत से लेकर दिल्ली के गलियारों तक, अब चर्चा इस बात की है कि क्या भारत अपने 50 लाख टन निर्यात के लक्ष्य को पूरा कर पाएगा या घरेलू आपूर्ति बनाए रखना ही प्राथमिकता होगी।

खेत में खराब हुई गेहूँ की फसल
बेमौसम बारिश और गर्मी के कारण देश के कई राज्यों में गेहूँ की गुणवत्ता प्रभावित हुई है।

खेतों से लेकर मंडियों तक का हाल

इस साल मौसम का मिजाज कुछ ऐसा बदला कि किसानों की उम्मीदें धराशायी हो गईं। उत्तर प्रदेश के बदायूं से लेकर बिहार के गोपालगंज तक, किसानों का कहना है कि मार्च में चली गर्म पछुआ हवाओं ने फसल को पकने से पहले ही सुखा दिया। इसकी वजह से गेहूँ का दाना पूरी तरह विकसित नहीं हो पाया और काफी पतला रह गया है। 'करेला और नीम चढ़ा' वाली स्थिति तब पैदा हुई जब कटाई के समय बेमौसम बारिश ने बची-कुची कसर पूरी कर दी।

विशेषज्ञों का अनुमान है कि प्रतिकूल मौसम के कारण कुल उत्पादन में लगभग 1 करोड़ टन की गिरावट आ सकती है। हालांकि कुछ क्षेत्रों में रकबा (बुवाई क्षेत्र) बढ़ने से उम्मीदें जगी थीं, लेकिन प्रति एकड़ उपज कम होने से गणित बिगड़ गया है। मंडियों में आवक देरी से होने के कारण अब तक केवल 148 लाख टन गेहूँ की ही सरकारी खरीद हो सकी है।

मंडी में गेहूँ की खरीद
सरकारी केंद्रों पर किसानों की भीड़ तो है, लेकिन तकनीकी खामियां रुकावट बन रही हैं।

मध्य प्रदेश के सीहोर जैसे इलाकों में तो प्रशासनिक अव्यवस्था ने किसानों की मुसीबतें और बढ़ा दी हैं। बड़े किसानों की बुकिंग शुरू होते ही पोर्टल का सर्वर डाउन हो गया, जिससे हजारों किसान कतार में खड़े रह गए। अब तक केवल 35% किसानों से ही गेहूँ खरीदा जा सका है, जबकि 16 दिन बीत चुके हैं।

क्या कहते हैं जिम्मेदार और जानकार?

सरकारी एजेंसियों और कृषि विशेषज्ञों के बीच उत्पादन के आंकड़ों को लेकर अब भी मंथन जारी है। जहाँ एक तरफ विभाग बेहतर रकबे का हवाला दे रहा है, वहीं जमीनी स्तर पर किसान उपज घटने से परेशान हैं।

मार्च में अचानक बढ़े तापमान ने गेहूँ की बाली को झुलसा दिया, जिससे दानों का वजन कम हो गया है। इस बार पैदावार पिछले सालों के औसत से काफी नीचे रहने की आशंका है।

राम शरण, स्थानीय किसान और कृषि प्रतिनिधि

आम आदमी और बाजार पर असर

यदि आप सोच रहे हैं कि यह केवल किसानों की समस्या है, तो आप गलत हैं। गेहूँ के उत्पादन में कमी का सीधा असर आटे की कीमतों पर पड़ सकता है। सरकारी भंडारण में कम स्टॉक का मतलब है कि खुले बाजार में कीमतों को नियंत्रित करना सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण होगा। भारत ने इस साल 50 लाख टन गेहूँ निर्यात करने का जो लक्ष्य रखा था, उस पर भी अब पुनर्विचार किया जा सकता है।

कटी हुई गेहूँ की फसल
देश के कई हिस्सों में कटाई का काम अब अपने अंतिम चरण में है, लेकिन पैदावार कम है।

मंडियों में आवक कम होने से व्यापारियों ने भी स्टॉक जमा करना शुरू कर दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों में खरीद केंद्रों पर सर्वर की समस्या के कारण मैसेज और बुकिंग की प्रक्रिया बाधित हो रही है, जिससे किसान परेशान हैं।

आगे की राह

आने वाले हफ्तों में सरकार खरीद के आंकड़ों को बढ़ाने के लिए कुछ नियमों में ढील दे सकती है। विशेष रूप से नमी और दानों की गुणवत्ता के मानकों को लचीला बनाया जा सकता है ताकि अधिक से अधिक किसान सरकारी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का लाभ उठा सकें।

मुख्य बातें

  • गेहूँ की सरकारी खरीद में पिछले साल की तुलना में 11% की गिरावट दर्ज की गई।
  • अब तक कुल 148 लाख टन गेहूँ ही खरीदा गया है।
  • मार्च की गर्मी और बेमौसम बारिश से 1 करोड़ टन तक उत्पादन घटने का अनुमान।
  • मध्य प्रदेश में सर्वर की समस्या से 65% किसान अभी भी अपनी उपज बेचने का इंतजार कर रहे हैं।
  • निर्यात लक्ष्य (50 लाख टन) पर घरेलू कमी के कारण संकट के संकेत।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न: इस साल गेहूँ की सरकारी खरीद कम क्यों हो रही है?
उत्तर: इसका मुख्य कारण फसल के आने में देरी और खराब मौसम की वजह से पैदावार में आई गिरावट है। कई राज्यों में सर्वर की तकनीकी खराबी भी एक बड़ी बाधा बनी हुई है।

प्रश्न: क्या आने वाले दिनों में आटे के दाम बढ़ेंगे?
उत्तर: उत्पादन में करीब 1 करोड़ टन की कमी और सरकारी स्टॉक में गिरावट की खबरों के बीच बाजार में कीमतों में मामूली उछाल की संभावना जताई जा रही है।

प्रश्न: मौसम का फसल पर क्या असर पड़ा है?
उत्तर: मार्च की अत्यधिक गर्मी ने गेहूँ के दानों को पतला कर दिया और कटाई के समय हुई बारिश ने फसल की गुणवत्ता खराब कर दी है।

प्रश्न: क्या सरकार गेहूँ के निर्यात पर रोक लगा सकती है?
उत्तर: फिलहाल 50 लाख टन निर्यात का लक्ष्य है, लेकिन यदि सरकारी खरीद लक्ष्य से बहुत पीछे रहती है, तो घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए निर्यात नीतियों की समीक्षा की जा सकती है।

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लेखक

अहमद सेज़र

वरिष्ठ संपादक

राजनीति, सरकार और सामान्य जनहित के विषयों में विशेषज्ञ।

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