28 जुलाई 2026 को लोकसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक 2026 पर चर्चा के दौरान बेंगलुरु दक्षिण से भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने मोदी सरकार के परीक्षा सुधारों का पक्ष रखा। संसद भवन में एंटी-पेपर लीक बिल पर बोलते हुए तेजस्वी सूर्या ने Gen-Z भाषा के लोकप्रिय शब्दों जैसे 'डेलुलु' और 'फोमो' का इस्तेमाल करके विपक्ष पर सीधा हमला बोला। इसके साथ ही उन्होंने नीट परीक्षा प्रणाली के मानसिक दबाव और कोचिंग कल्चर पर युवाओं का दर्द खुलकर बयां किया।

संसद में छाया जेन-जी भाषा का रंग
संसदीय बहस के दौरान तेजस्वी सूर्या ने Gen-Z भाषा का प्रयोग करते हुए कहा कि विपक्ष को लगता है कि देश का युवा उनके साथ है, लेकिन यह उनका सबसे बड़ा 'डेलुलु' (भ्रम) है। उन्होंने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्हें 'पॉलिटिकल फोमो' (छूट जाने का डर) हो गया था और इसी कारण वे प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने पर बैठ गए। उन्होंने युवाओं द्वारा सरकार की जवाबदेही तय करने की तारीफ करते हुए कहा कि छात्रों ने सवाल पूछकर बिल्कुल सही काम किया है।
नीट की तैयारी और परीक्षा प्रणाली पर क्या बोले?
सदन में अपने संबोधन के दौरान तेजस्वी सूर्या ने देश के युवाओं की मानसिक स्थिति का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि किस तरह आठवीं कक्षा से ही बच्चे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुट जाते हैं और मशीन बनकर रह जाते हैं।

- समय से पहले दबाव: कोटा जैसे शहरों में छात्र वर्षों तक केवल रट्टा लगाने की संस्कृति में रहते हैं, जिससे उनकी दोस्ती, खेल और सामाजिक जीवन खत्म हो जाता है।
- तीन घंटे का फैसला: वर्षों की मेहनत का फैसला केवल 3 घंटे की एक परीक्षा से होना छात्रों पर बेहद भारी मानसिक दबाव डालता है।
- व्यावहारिक मूल्यांकन: देश का युवा परीक्षा आसान नहीं चाहता, बल्कि बहुविषयक और व्यावहारिक शिक्षा प्रणाली की मांग कर रहा है।
युवाओं को राजनीति नहीं, ठोस समाधान चाहिए
सूर्या ने स्पष्ट किया कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा आम छात्र राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में नहीं उलझना चाहता। युवाओं को इस बात की चिंता है कि भविष्य के लिए परीक्षा प्रणाली कितनी पारदर्शी बनेगी। उन्होंने कहा कि 34 साल बाद आई नई शिक्षा नीति (एनईपी) छात्रों को रटंत विद्या से बाहर निकालकर कौशल और नवाचार की ओर ले जाने का काम कर रही है।

आगे क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
नीट पेपर लीक मामले पर बात करते हुए सूर्या ने बताया कि सरकार ने तीन प्राथमिकताओं—न्याय, सुरक्षा और सुधार—के तहत कदम उठाए हैं। इसमें सीबीआई जांच, तुरंत गिरफ्तारियां, और रिकॉर्ड समय में री-नीट का आयोजन शामिल है। भविष्य में पेपर लीक रोकने के लिए सरकार कंप्यूटर आधारित टेस्ट (सीबीटी) की ओर बढ़ रही है और पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक हाई-पावर कमेटी का गठन किया गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. तेजस्वी सूर्या ने लोकसभा में क्या बयान दिया?
तेजस्वी सूर्या ने एंटी-पेपर लीक बिल पर बोलते हुए नीट अभ्यर्थियों के मानसिक दबाव को उठाया और विपक्ष पर Gen-Z शब्दावली के जरिए राजनीतिक हमले किए।
2. संसद में 'डेलुलु' और 'फोमो' शब्दों का प्रयोग क्यों हुआ?
सांसदों ने युवाओं से जुड़ने और विपक्ष के रुख पर तंज कसने के लिए इन जेन-जी स्लैंग्स का इस्तेमाल किया, जहां 'डेलुलु' का अर्थ भ्रम और 'फोमो' का अर्थ छूट जाने का डर होता है।
3. एंटी-पेपर लीक विधेयक के तहत क्या प्रमुख सुधार किए जा रहे हैं?
विधेयक के तहत परीक्षाओं को पारदर्शी बनाने, सीबीआई जांच, फास्ट-ट्रैक अदालतों का गठन, और कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) प्रणाली को मजबूत करने के कदम शामिल हैं।
