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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर घमासान, इस्तीफे की मांग और 48 घंटे का अल्टीमेटम

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंतरिक मतभेदों और मतदाता सूची विवाद को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं ने इस्तीफे की मांग की है।

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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ देश भर में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। निर्वाचन आयोग के भीतर चल रहे आंतरिक मतभेदों और विशेष सारांश संशोधन (एसएसआर) प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के सामने आने के बाद विपक्ष आक्रामक हो गया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में तीखे हमले करते हुए सीईसी के इस्तीफे की मांग की है और इसे लोकतंत्र की बुनियाद पर हमला बताया है।

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की चेतावनी
मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध और अल्टीमेटम — Navbharat Times

विवाद की जड़ और अंदरूनी बगावत

यह पूरा विवाद एक मीडिया रिपोर्ट के सामने आने के बाद शुरू हुआ, जिसमें दावा किया गया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के बीच विभिन्न फैसलों को लेकर गंभीर मतभेद चल रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इन दोनों चुनाव आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में आयोग की कार्यप्रणाली पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कराई हैं। आरोप है कि ज्ञानेश कुमार ने इन आपत्तियों को नजरअंदाज किया और एकतरफा तरीके से फैसले लिए, जिससे चुनाव निकाय के भीतर आंतरिक संकट पैदा हो गया।

विपक्ष का तीखा हमला और इस्तीफे की मांग

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि देश में वोट चोरी के जरिए लोकतंत्र को कमजोर किया जा रहा है और ज्ञानेश कुमार इसके लिए जिम्मेदार हैं। राहुल गांधी ने सुझाव दिया कि सीईसी को सरकारी गवाह बन जाना चाहिए। वहीं, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने अपने मुखपत्र 'सामना' में कड़े शब्दों में निर्वाचन आयोग की आलोचना की और एसआरआर प्रक्रिया के कारण लाखों मतदाताओं के नाम सूची से गायब होने का दावा किया। तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने भी दिल्ली के संसद मार्ग थाने में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है।

उद्धव ठाकरे का चुनाव आयोग पर बयान
चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते नेता — News18 Hindi

क्या हैं मुख्य आरोप और आंकड़े

विपक्षी दलों और रिपोर्टों के मुताबिक, एसएसआर प्रक्रिया के दौरान देश भर में करीब 13 करोड़ मतदाताओं को मताधिकार से वंचित किए जाने का गंभीर दावा किया गया है। महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में मतदाता सूचियों से नाम हटाए जाने को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। इसके अलावा, कॉकरोच जनता पार्टी जैसे संगठनों ने भी 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है। दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी ने भी उत्तर प्रदेश में आचार संहिता उल्लंघन के मामलों को लेकर चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए हैं।

दिल्ली में विरोध प्रदर्शन और शिकायतें
चुनाव आयोग के खिलाफ विभिन्न स्तरों पर शिकायतें और प्रदर्शन — Dainik Bhaskar

राजनीतिक और कानूनी चुनौतियाँ

कानूनी जानकारों के अनुसार, 'मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023' की धारा 16 के तहत सीईसी को अपने आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन में किए गए कार्यों के लिए सुरक्षा प्राप्त है, जिससे उन पर तुरंत कानूनी कार्रवाई करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें आधारहीन बताया है। विपक्षी दल संसद के आगामी सत्र में महाभियोग लाने की तैयारियों में जुटे हैं, हालांकि इसके लिए आवश्यक संख्या बल जुटाना एक बड़ी चुनौती है।

आगे क्या होगा

इस विवाद के तूल पकड़ने के बाद देश भर में विरोध प्रदर्शनों का दौर शुरू हो गया है। कांग्रेस पार्टी ने 25 सितंबर को राज्य चुनाव आयोग कार्यालयों के बाहर विरोध मार्च निकालने की घोषणा की है, जिसके बाद 28 सितंबर को जिला स्तर पर प्रदर्शन किए जाएंगे। यह देखना अहम होगा कि आयोग इन गंभीर आरोपों और आंतरिक असंतोष पर क्या रुख अपनाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

  • मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर क्या आरोप लगाए जा रहे हैं?
    मुख्य चुनाव आयुक्त पर विशेष संशोधन प्रक्रियाओं के तहत मतदाता सूचियों से नियमों के खिलाफ नाम हटाने और दो अन्य चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों को नजरअंदाज करने का आरोप है।
  • राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्या मांग की है?
    राहुल गांधी ने ज्ञानेश कुमार के तुरंत इस्तीफे की मांग की है और उन्हें इस पूरी प्रक्रिया में गड़बड़ियों का जिम्मेदार ठहराया है।
  • अन्य चुनाव आयुक्तों ने क्या आपत्तियां दर्ज कराई हैं?
    रिपोर्ट्स के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के फैसलों पर कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराई हैं।
  • विपक्ष द्वारा आगे क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
    विपक्ष महाभियोग प्रस्ताव लाने की योजना बना रहा है और कांग्रेस ने 25 सितंबर से देश भर में राज्य चुनाव आयोग कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन करने का निर्देश दिया है।